हलधर किसान दिल्ली। उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ संकेत दिए कि अब देश की खेती एक समान नीति से नहीं बल्कि क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जलवायु, जल उपलब्धता, भूमि और फसल पैटर्न के आधार पर अलग-अलग रणनीति बनाकर ही किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य उत्तर भारत की खेती-किसानी को नई दिशा देना है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पूरे देश को 5 हिस्सों में बांटकर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों की श्रृंखला शुरू की है, जिसमें लखनऊ का यह सम्मेलन दूसरा चरण है। इसके जरिए राज्यों के साथ मिलकर खरीफ और रबी सीजन के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
प्रेसवार्ता में उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों का समन्वय बेहद जरूरी है, क्योंकि योजनाएं केंद्र बनाता है लेकिन उनका क्रियान्वयन राज्यों के माध्यम से होता है। इस सम्मेलन में किसानों की आय, उत्पादन और बाजार से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।
श्री चौहान ने कहा कि अब खेती केवल गेहूं और धान तक सीमित नहीं रह सकती। देश को दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। इसके साथ ही बागवानी, फल-सब्जी उत्पादन, प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि भारत खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बना चुका है, लेकिन पोषण सुरक्षा और आय बढ़ाने के लिए विविधीकरण जरूरी है।
छोटे किसानों पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने कहा कि कम जमीन में अधिक आय देने वाले इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल अपनाना होगा। इसमें फसल के साथ पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और बागवानी को जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार ऐसे मॉडल राज्यों के साथ साझा कर रही है।
किसानों को सस्ता और समय पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) अभियान को तेज करने की बात भी उन्होंने कही। उनका मानना है कि अगर किसान को आसानी से ऋण मिलेगा तो वह बेहतर बीज, उर्वरक और तकनीक का उपयोग कर सकेगा।
फार्मर आईडी को उन्होंने कृषि क्षेत्र में बड़ा सुधार बताते हुए कहा कि इससे किसान की पूरी जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी और तेज तरीके से मिलेगा तथा किसानों को बार-बार दस्तावेजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
‘लैब टू लैंड’ पहल पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीम गांव-गांव जाकर किसानों को नई तकनीक और आधुनिक खेती की जानकारी देगी। इससे शोध का लाभ सीधे खेत तक पहुंचेगा।
उत्तर प्रदेश के किसानों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आलू के दाम गिरने पर सरकार ने राहत देते हुए 20 लाख मीट्रिक टन खरीद की अनुमति दी है। साथ ही राज्य में एक इंटरनेशनल प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने की योजना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
उर्वरक कीमतों को लेकर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा। केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 41,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर यूरिया और डीएपी को सस्ती दरों पर उपलब्ध रखने का निर्णय लिया है।
नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त रुख अपनाते हुए श्री चौहान ने कहा कि सरकार जल्द ही सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल फसल नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार संक्रमण काल में किसानों को आर्थिक सहायता भी दे रही है, ताकि वे सुरक्षित रूप से इस दिशा में आगे बढ़ सकें।
अंत में उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल चर्चा का मंच नहीं बल्कि एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने का अवसर है, जिससे उत्तर भारत की खेती को टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाया जा सकेगा।
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