नकली और घटिया बीजों पर कसेगा शिकंजा, नए ‘सीड एक्ट’ पर किसान संगठनों से सीधा संवाद करेंगे शिवराज

Crackdown on spurious and substandard seeds

आज 10 सितंबर को कृषि भवन में देशभर के किसान प्रतिनिधियों के साथ होगी अहम बैठक, सख्त कानून में भारी जुर्माने और जेल का प्रावधान प्रस्तावित

हलधर किसान नई दिल्ली। देश में नकली, मिलावटी और घटिया बीजों की समस्या से किसानों को राहत दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। किसानों को खराब गुणवत्ता वाले बीजों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार नए और सख्त ‘सीड एक्ट’ को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी सिलसिले में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज 10 सितंबर को अपराह्न 4 बजे कृषि भवन, नई दिल्ली में देशभर के प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे।

इस बैठक को प्रस्तावित नए सीड कानून को लेकर किसानों के साथ सरकार के सीधे संवाद के रूप में देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि कानून तैयार करते समय किसानों के वास्तविक अनुभव, उनकी समस्याओं और जमीनी सुझावों को भी इसमें शामिल किया जाए। खासतौर पर ऐसे मामलों पर चर्चा होगी, जिनमें किसान कंपनियों या व्यापारियों से बीज खरीदने के बाद फसल खराब होने की स्थिति में आर्थिक नुकसान उठाते हैं।

नकली बीज बेचने वालों पर होगी सख्ती

प्रस्तावित नए कानून में नकली, मिलावटी अथवा घटिया गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान किए जाने की तैयारी है। इसमें भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा जैसे प्रावधान शामिल किए जाने की बात सामने आई है।

किसानों के लिए बीज केवल एक कृषि इनपुट नहीं, बल्कि पूरी फसल की नींव है। किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई बीज, खाद, दवा और अन्य कृषि आदानों पर खर्च करता है। यदि बीज की गुणवत्ता खराब निकलती है तो उसका असर पूरी फसल पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में किसान को केवल बीज की कीमत का ही नुकसान नहीं उठाना पड़ता, बल्कि खेत की तैयारी, मजदूरी, खाद, सिंचाई और अन्य खर्च भी प्रभावित होते हैं।

इसी वजह से केंद्र सरकार ऐसा मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है, जिसमें बीज की गुणवत्ता को लेकर जवाबदेही तय हो और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

किसान संगठनों से सीधे लिए जाएंगे सुझाव

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान संगठनों और किसान प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक का उद्देश्य केवल प्रस्तावित कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि किसान संगठनों से सीधे सुझाव और राय लेना भी है।

इस राष्ट्रीय विमर्श में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे। भारतीय किसान संघ, बीकेयू के विभिन्न घटक, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (AIKCC), किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, गांव किसान उन्नयन और सोसाइटी फॉर इंडिपेंडेंट फार्मर्स एसोसिएशन (SIFA) सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी है।

इसके अलावा कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ, महाराष्ट्र के शेतकारी संगठन, गुजरात के खेदुत समाज, राजस्थान और बिहार की राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन, तमिलनाडु के व्यवसाइगल संघम, झारखंड के प्रगतिशील कृषि मंच तथा केरल के कोट्टायम क्षेत्र के कृषक संगठनों सहित विभिन्न राज्यों के किसान प्रतिनिधि भी बैठक में अपनी बात रखेंगे।

बीज की गुणवत्ता और ट्रेसिंग सिस्टम पर जोर

प्रस्तावित कानून में केवल सजा का प्रावधान ही नहीं, बल्कि बीज की गुणवत्ता और उसकी पहचान से जुड़ी व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि बीज की पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़े और जरूरत पड़ने पर यह पता लगाया जा सके कि बीज किस कंपनी या स्रोत से आया, उसका वितरण किस स्तर पर हुआ और किसान तक वह किस माध्यम से पहुंचा।

ऐसी व्यवस्था मजबूत होने से शिकायतों की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में भी आसानी हो सकती है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना और गलत जानकारी या घटिया उत्पाद के जरिए किसानों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना नए कानून की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है।

पारंपरिक बीजों के अधिकारों की सुरक्षा भी अहम

नए सीड एक्ट को लेकर होने वाली चर्चा में किसानों के पारंपरिक और स्थानीय बीजों के अधिकारों का विषय भी महत्वपूर्ण रहेगा। देश के कई हिस्सों में किसान पीढ़ियों से पारंपरिक बीजों का संरक्षण और उपयोग करते आ रहे हैं। इसलिए नए कानून में गुणवत्ता नियंत्रण और किसानों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।

केंद्र सरकार का प्रयास बताया जा रहा है कि नया कानून किसानों को नकली और अमानक बीजों से सुरक्षा देने के साथ-साथ उनके पारंपरिक बीजों से जुड़े अधिकारों की भी रक्षा करे।

संसद सत्र से पहले अहम पहल

प्रस्तावित नए सीड एक्ट को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों से किया जा रहा यह संवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार आगामी संसद सत्र से पहले इस विषय पर व्यापक राय और सुझाव जुटाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान हितों से जुड़े नीतिगत विषयों पर किसान संगठनों के साथ संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है। ऐसे में 10 सितंबर की यह बैठक देश की बीज व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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