लंपी स्किन पर सरकार की सख्ती, 36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों का टीकाकरण

Government cracks down on Lumpy Skin over 36.18 crore cattle vaccinated

निगरानी से लेकर वैक्सीनेशन तक तेज हुए प्रयास, देश में फिलहाल 3,461 एक्टिव मामले

हलधर किसान नई दिल्ली | देश में मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करने वाली लंपी स्किन डिजीज (LSD) को लेकर केंद्र सरकार ने निगरानी और रोग नियंत्रण के प्रयास तेज कर दिए हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर बीमारी की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। सरकार का जोर समय पर टीकाकरण, संक्रमित पशुओं को अलग रखने, बीमारी फैलाने वाले कीटों पर नियंत्रण और प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई पर है।

केंद्र सरकार के अनुसार, देश में अब तक 36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों को लंपी स्किन डिजीज के खिलाफ टीका लगाया जा चुका है या उनका पुनः टीकाकरण किया गया है। प्रभावित राज्यों में टीकाकरण और अन्य नियंत्रण उपाय जारी हैं, जबकि गैर-प्रभावित राज्यों में भी बीमारी की रोकथाम के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

बछियों और युवा पशुओं के टीकाकरण पर जोर

हाल ही में हुई समीक्षा बैठकों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष रूप से बछियों और युवा मवेशियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही बीमारी के संभावित प्रसार को रोकने के लिए रिंग वैक्सीनेशन को भी महत्वपूर्ण उपाय बताया गया है।

सरकार ने पशुपालकों और प्रशासन को संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने, पशुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने, नए खरीदे या लाए गए पशुओं को क्वारंटीन में रखने तथा पशु बाड़ों की नियमित सफाई और कीटाणुशोधन करने पर जोर दिया है।

इसके अलावा मच्छर, मक्खी और अन्य बीमारी फैलाने वाले वाहकों यानी वेक्टर कंट्रोल पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है। आवारा पशुओं के प्रबंधन, बीमार पशुओं के उपचार और प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई जैसे कदमों को भी रोग नियंत्रण रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।

उत्तर प्रदेश में भेजी गई केंद्रीय विशेषज्ञ टीम

बीमारी की जमीनी स्थिति का आकलन करने और राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में उत्तर प्रदेश में एक केंद्रीय विशेषज्ञ दल भेजा था। टीम ने क्षेत्र में बीमारी की स्थिति का जायजा लेने के साथ ही राज्य द्वारा किए जा रहे नियंत्रण उपायों की निगरानी की और आगे की तैयारी तथा प्रतिक्रिया के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

केंद्र सरकार ने 27 अगस्त और 7 सितंबर 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समीक्षा बैठकें भी कीं। इन बैठकों में बीमारी की वर्तमान स्थिति, टीकाकरण, निगरानी और नियंत्रण उपायों की समीक्षा की गई तथा राज्यों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

जुलाई से कुछ राज्यों में सामने आए मामले

सरकार के मुताबिक जुलाई 2026 से मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड सहित कुछ अन्य राज्यों में लंपी स्किन डिजीज के छिटपुट मामले सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर मामले छोटे और युवा पशुओं में देखे गए हैं।

हालांकि बीमारी की गंभीरता इस समय काफी कम बताई जा रही है। प्रभावित पशु सामान्य तौर पर करीब एक सप्ताह के भीतर ठीक हो रहे हैं। सरकार के अनुसार संक्रमण की गंभीरता और मृत्यु दर में भी पहले की तुलना में काफी कमी आई है।

भारत में लंपी स्किन डिजीज के मामले पहली बार सितंबर 2019 में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सामने आए थे। इसके बाद बीमारी ने देश के विभिन्न हिस्सों में पशुधन को प्रभावित किया।

क्या है लंपी स्किन डिजीज?

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लंपी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करती है। यह कैप्रिपॉक्स वायरस के कारण होती है और इसका प्रसार मुख्य रूप से आर्थ्रोपोड वैक्टर यानी मच्छर, मक्खी और अन्य रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से होता है।

इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में बुखार और शरीर की त्वचा पर गांठें पड़ना शामिल हैं। बीमारी की गंभीरता अलग-अलग पशुओं में अलग हो सकती है। समय पर पहचान, संक्रमित पशु को अलग रखना, उपचार और टीकाकरण इसके नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जांच और प्रयोगशाला नेटवर्क मजबूत

बीमारी की पहचान और निगरानी के लिए देश में जांच व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। आईसीएआर-एनआईएचएसएडी, भोपाल से प्राप्त तकनीकी सहयोग के साथ क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशालाओं (RDDLs) और केंद्रीय रोग निदान प्रयोगशाला (CDDL) सहित प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के माध्यम से एलएसडी की जांच और टेस्टिंग क्षमता बढ़ाई गई है।

इससे बीमारी की समय पर पहचान करने और प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से नियंत्रण उपाय लागू करने में मदद मिल रही है।

टीकाकरण, प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए वित्तीय सहायता

केंद्र सरकार ने लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीकाकरण, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है।

इसके अलावा पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पशु चिकित्सा कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल मौजूदा मामलों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि भविष्य में बीमारी के संभावित प्रसार से निपटने के लिए राज्यों की तैयारी को मजबूत करना भी है।

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में

केंद्र सरकार के अनुसार देश में लंपी स्किन डिजीज की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। वर्तमान में करीब 3,461 एक्टिव मामले हैं। इनमें मुख्य रूप से छोटे, बिना टीका लगाए गए और अन्य बीमारियों से प्रभावित पशु शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि संक्रमण की गंभीरता और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके बावजूद सभी राज्यों को सतर्क रहने और बीमारी की घटनाओं की समय पर तथा पारदर्शी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।

पशुपालन और डेयरी विभाग स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और राज्यों को तकनीकी मार्गदर्शन, टीकाकरण सहायता, जांच एवं प्रयोगशाला सहयोग तथा आवश्यक वित्तीय मदद उपलब्ध करा रहा है।

पशुपालकों के लिए जरूरी संदेश

लंपी स्किन से बचाव के लिए पशुपालक अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं, बीमार पशु को तुरंत अलग रखें, पशुशाला की साफ-सफाई बनाए रखें और मच्छर-मक्खियों पर नियंत्रण रखें। किसी पशु में बुखार, त्वचा पर गांठ या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। बीमारी की रोकथाम में समय पर पहचान और सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है।

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