प्रतापगढ़ क्षेत्र में एक माह से बघेरे का आतंक, 20 से ज्यादा मवेशियों का शिकार

Leopard terror in Pratapgarh region for a month over 20 livestock killed

चार पिंजरे लगाने, गश्त बढ़ाने और नियमानुसार मुआवजा देने पर बनी सहमति; ग्रामीणों ने 7 घंटे बाद धरना समाप्त किया

हलधर किसान न्यूज प्रतापगढ़ | प्रतापगढ़ क्षेत्र के झिरी गांव और आसपास के इलाकों में पिछले करीब एक माह से बघेरे की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बघेरा अब तक 20 से अधिक मवेशियों का शिकार कर चुका है। सोमवार रात एक बार फिर बघेरे ने कलसीकाला क्षेत्र में एक बाड़े में बंधे चार मवेशियों को अपना शिकार बना लिया। लगातार हो रहे हमलों से आक्रोशित ग्रामीण मृत पशुओं के शव लेकर वन विभाग की चौकी के बाहर पहुंच गए और बघेरे को जल्द पकड़ने सहित मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।

ग्रामीणों का कहना था कि बघेरा पिछले कई दिनों से गांवों के आसपास घूम रहा है और रात के समय पशुओं को निशाना बना रहा है। बार-बार हो रहे हमलों के बावजूद बघेरे को पकड़ने की ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। उनका कहना था कि यदि समय रहते बघेरे को नहीं पकड़ा गया तो भविष्य में जनहानि की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

रात में बाड़े में घुसकर चार पशुओं को मारा

सोमवार रात बघेरा झिरी गांव के कलसीकाला क्षेत्र में रामकिशोर पुत्र मूलचंद मीणा के बाड़े में घुस गया। यहां बंधी तीन बकरियों और एक छोटे बछड़े पर हमला कर उन्हें मार डाला। सुबह घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।

ग्रामीणों ने मृत पशुओं को पिकअप वाहन में रखकर वन विभाग की चौकी के बाहर पहुंचाया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हो गए और बघेरे को तत्काल पकड़ने, मृत पशुओं का उचित मुआवजा देने तथा वन विभाग के उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप था कि पिछले एक माह से लगातार पशुओं का शिकार हो रहा है, लेकिन बघेरे की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने मांग रखी कि बघेरे की गतिविधियों वाले इलाकों में पिंजरे लगाए जाएं और वन विभाग की टीमें नियमित रूप से गश्त करें।

अधिकारियों ने समझाइश की, लेकिन ग्रामीण मांगों पर अड़े रहे

धरने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब 11 बजे राजगढ़ एसीएफ शुभम गोयल और घाटा रेंज अधिकारी जितेंद्र कुमार सैन ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और स्थानीय पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पूर्व उप जिला प्रमुख ललिता मीणा, थानागाजी से लोकेश मीणा, प्रतापगढ़ प्रशासक कप्तान सिंह, पिपलाई प्रशासक विश्राम मीणा और झिरी प्रशासक रामस्वरूप कोली सहित कई लोगों ने ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया।

करीब सात घंटे तक चले धरने के बाद वन विभाग और प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया।

बघेरे की निगरानी के लिए चार पिंजरे लगाए जाएंगे

राजगढ़ एसीएफ शुभम गोयल ने बताया कि बघेरे की लगातार हो रही गतिविधियों को देखते हुए उसके मूवमेंट वाले क्षेत्रों में चार पिंजरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा वन विभाग की गश्त भी बढ़ाई जाएगी, ताकि बघेरे की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उसे पकड़ने के प्रयास तेज किए जा सकें।

वन विभाग ने ग्रामीणों को यह भी भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में तैनात वनकर्मियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे। इससे ग्रामीण बघेरे की किसी भी गतिविधि या संदिग्ध मूवमेंट की तत्काल सूचना वन विभाग तक पहुंचा सकेंगे।

अधिकारी के अनुसार, बघेरे की निगरानी और पकड़ने के लिए रैपिड रिस्पांस फोर्स की टीम भी गठित की जाएगी। बघेरे के मूवमेंट वाले स्थानों पर शाम से ही वन विभाग की टीमें तैनात कर दी गई हैं।

मृत पशुओं का पोस्टमार्टम, मुआवजे का भरोसा

वन विभाग की ओर से मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है। ग्रामीणों को वन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पात्रता के आधार पर जल्द मुआवजा दिलाने पर सहमति बनी है।

ग्रामीणों की मांग थी कि बघेरे के हमले में मारे गए पशुओं के लिए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, क्योंकि लगातार हो रहे हमलों से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रशासन और वन विभाग ने नियमानुसार मुआवजा प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने का आश्वासन दिया है।

इन गांवों में लगातार सामने आए बघेरे के हमले

ग्रामीणों के अनुसार झिरी, हमीरपुर और पिपलाई क्षेत्र में पिछले करीब एक माह से बघेरे की गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई पशुओं को बघेरा अपना शिकार बना चुका है।

28 जुलाई को हमीरपुर गांव की नाथों की ढाणी में बाबूलाल योगी की चार बकरियों का शिकार किया गया। इसके अगले दिन 29 जुलाई को बंशी योगी की एक बछड़ी को बघेरे ने मार दिया। 1 अगस्त को हमीरपुर में रामस्वरूप मीणा की पांच बकरियां बघेरे के हमले का शिकार हुईं। इसके बाद 15 अगस्त को झिरी के शाखा का गुवाड़ा क्षेत्र में कालूराम की छह बकरियों को बघेरे ने मार डाला।

लगातार हो रहे इन हमलों के बाद अब सोमवार रात चार और मवेशियों की मौत ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। वन विभाग की ओर से चार पिंजरे लगाने, गश्त बढ़ाने और रैपिड रिस्पांस टीम गठित करने के निर्णय से ग्रामीणों को राहत की उम्मीद है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बघेरे को पकड़कर क्षेत्र से सुरक्षित रूप से हटाया नहीं जाता, तब तक भय का माहौल बना रहेगा। अब वन विभाग के सामने चुनौती बघेरे की लगातार निगरानी करते हुए उसे जल्द पकड़ने की है, ताकि ग्रामीणों और उनके पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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