भोपाल। खरीफ सीजन के दौरान बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को कृषि आदानों के उपयोग में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मध्यप्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने कहा कि खेती पूरी तरह प्रकृति और मौसम पर आधारित कार्य है। यदि मौसम अनुकूल रहता है तो फसल का विकास बेहतर होता है, कीट एवं रोगों का प्रकोप कम होता है और किसानों को अच्छी पैदावार प्राप्त होती है। वहीं मौसम प्रतिकूल होने पर कृषि आदानों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि कृषि आदान विक्रेताओं का उद्देश्य किसानों तक हमेशा उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद उपलब्ध कराना है। चाहे खरपतवारनाशी दवाएं हों, कीटनाशक हों या जैविक एवं बायो उत्पाद, कोई भी जिम्मेदार विक्रेता ऐसा उत्पाद नहीं देना चाहता जिससे किसान की फसल को नुकसान पहुंचे। लेकिन कई बार मौसम की परिस्थितियां कृषि आदानों के प्रभाव को प्रभावित कर देती हैं।
श्री दुबे ने बताया कि यदि किसान खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव करने के तुरंत बाद लगातार बारिश हो जाती है तो दवा का प्रभाव कम हो सकता है। यही स्थिति कीटनाशकों और जैविक उत्पादों के साथ भी देखने को मिलती है। इसलिए किसानों को किसी भी कृषि आदान का उपयोग करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान अवश्य देखना चाहिए। यदि मौसम अनुकूल हो तभी छिड़काव किया जाए, ताकि दवा का पूरा लाभ मिल सके और अनावश्यक खर्च से बचा जा सके।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खरीफ मौसम में कीटनाशक एवं जैविक उत्पादों के साथ अच्छी गुणवत्ता का स्टिकिंग एजेंट (चिपको) भी मिलाकर छिड़काव करें। इससे दवा पौधों की पत्तियों पर बेहतर तरीके से चिपकती है और बारिश या नमी की स्थिति में भी उसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक समय तक बना रहता है। इससे किसानों को बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
श्री दुबे ने खेती को जीव विज्ञान से जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार मौसम का प्रभाव मनुष्यों के स्वास्थ्य पर पड़ता है, उसी प्रकार फसलों पर भी पड़ता है। ठंड या बारिश के मौसम में जैसे लोगों को सर्दी, जुकाम और बुखार जैसी समस्याएं होती हैं, उसी प्रकार पौधों की वृद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादन भी मौसम के अनुसार प्रभावित होते हैं। बीज से अंकुरण, पौधे का विकास, फूल और फल बनने तक प्रत्येक चरण में मौसम की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए केवल कृषि आदानों के भरोसे अच्छी पैदावार की अपेक्षा करना उचित नहीं है, बल्कि मौसम की परिस्थितियों को भी समान रूप से समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कई बार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कृषि आदानों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता, लेकिन ऐसी स्थिति में किसान बिना पूरी जानकारी के कृषि आदान विक्रेताओं को दोषी ठहराने लगते हैं। कई बार व्यापारियों पर गलत दवा देने के आरोप लगाए जाते हैं, जबकि वास्तविक कारण मौसम या अन्य प्राकृतिक परिस्थितियां होती हैं।
श्री दुबे ने कहा कि वर्षों से इस व्यवसाय में कार्य कर रहे अनुभवी कृषि आदान व्यापारी किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हैं और उनकी सफलता में ही अपनी सफलता देखते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ नए व्यापारियों के पास तकनीकी जानकारी का अभाव हो सकता है, जिसके कारण कभी-कभी गलत सलाह या उत्पाद चयन जैसी समस्याएं सामने आ जाती हैं। ऐसे मामलों में किसानों को जागरूक रहकर उचित जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसान और कृषि आदान व्यापारी एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि किसान समृद्ध होंगे तो कृषि आदान व्यापार भी मजबूत होगा। इसलिए दोनों के बीच विश्वास और सहयोग बना रहना आवश्यक है। बिना तथ्य जाने किसी व्यापारी को बदनाम करना या उस पर अनावश्यक आरोप लगाना उचित नहीं है।
अपने संदेश के अंत में श्री कृष्णा दुबे ने प्रदेश के सभी कृषि आदान विक्रेताओं से भी अपील की कि वे अपने प्रतिष्ठानों से केवल प्रमाणित, गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय कंपनियों के कृषि आदानों का ही विक्रय करें। यदि व्यापारी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बेचेंगे तो विभागीय जांच या सैंपलिंग के दौरान उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ईमानदार व्यापारी को नियमों का पालन करने के बावजूद विभागीय स्तर पर अनुचित रूप से परेशान किया जाता है, तो कृषि आदान विक्रेता संघ उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यापारी अपनी शिकायत संगठन तक पहुंचाएं, ताकि संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर उचित समाधान कराया जा सके।
खरीफ सीजन के दौरान विशेषज्ञों का भी मानना है कि मौसम की सही जानकारी, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों का चयन और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उनका उपयोग ही बेहतर उत्पादन और सुरक्षित खेती की कुंजी है।
यह भी पढेंः- तोतापुरी आम के किसानों को केंद्र की बड़ी राहत, शिवराज सिंह चौहान ने गठित की विशेषज्ञ समिति
