हलधर किसान नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरणीय मानकों के प्रभावी पालन को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी है। आयोग के प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की 139वीं बैठक 14 सितंबर 2026 को आयोजित हुई, जिसमें 24 अगस्त से 7 सितंबर 2026 तक की 15 दिनों की रिपोर्टिंग अवधि के दौरान एनसीआर में किए गए निरीक्षणों, उल्लंघनों पर कार्रवाई और विभिन्न इकाइयों की अनुपालन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में सामने आया कि उक्त 15 दिनों की अवधि में एनसीआर में कुल 150 निरीक्षण किए गए। इनमें निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों से जुड़े 7 निरीक्षण, औद्योगिक क्षेत्रों में 98 निरीक्षण तथा डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से संबंधित 45 निरीक्षण शामिल रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी।
नूंह में विशेष अभियान, 35 परिसरों की जांच
रिपोर्टिंग अवधि के दौरान 3 सितंबर 2026 को हरियाणा के नूंह जिले में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड की आठ टीमों ने जिला प्रशासन, पुलिस कर्मियों और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के अधिकारियों के साथ मिलकर जिले में कुल 35 परिसरों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान 13 परिसर निर्धारित नियमों के अनुरूप पाए गए। वहीं, 7 इकाइयां बंद मिलीं, जिनका संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दोबारा निरीक्षण किया जाना है। अभियान के दौरान नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की सिफारिश की गई। इनमें एक मामले में व्यक्तिगत सुनवाई, एक मामले में डीजी सेट सील करने, 7 मामलों में आदेश जारी करने तथा 6 मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) लगाने की कार्रवाई शामिल है।
उल्लंघन पर बंदी और डीजी सेट सील करने की कार्रवाई
ईटीएफ की बैठक में संबंधित क्षेत्रों से प्राप्त उल्लंघन की रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तावित कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। इसके तहत 3 निर्माण एवं विकास परियोजनाओं और एक औद्योगिक इकाई को बंद करने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
इसके अलावा निर्माण एवं विकास स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों में नियमों का पालन नहीं करने वाले 25 डीजी सेटों को सील करने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक निर्माण एवं विकास मामले, दो औद्योगिक मामलों और डीजी सेट से जुड़े मामलों में आदेश एवं निर्देश जारी करने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।
दो औद्योगिक मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके अलावा कुछ मामलों में परियोजना प्रस्तावकों को पत्र जारी करने, पुनः निरीक्षण कराने और आवश्यक होने पर अभियोजन की कार्रवाई के लिए मामलों की पहचान की गई है। उपयुक्त मामलों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के समक्ष भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी।
6 इकाइयों को काम फिर शुरू करने की अनुमति
बैठक में पिछली ईटीएफ बैठक के बाद जारी किए गए काम फिर से शुरू करने के आदेशों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। 10 सितंबर 2026 तक पिछली बैठक के बाद कुल 6 इकाइयों/स्थलों के लिए काम दोबारा शुरू करने के आदेश जारी किए गए। इनमें एक औद्योगिक इकाई और 5 निर्माण एवं विध्वंस स्थल शामिल हैं।
राज्यवार स्थिति में हरियाणा में 3 और उत्तर प्रदेश में 3 ऐसे आदेश जारी किए गए हैं। इन मामलों में अनुपालन की स्थिति के सत्यापन के बाद ही दोबारा गतिविधियां शुरू करने की अनुमति दी गई है।
अब तक 28,547 इकाइयों और परियोजनाओं का निरीक्षण
सीएक्यूएम की बैठक में 14 सितंबर 2026 तक की संचयी प्रवर्तन स्थिति की भी समीक्षा की गई। आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड द्वारा अब तक एनसीआर में कुल 28,547 इकाइयों, परियोजनाओं और संस्थाओं का निरीक्षण किया जा चुका है।
इन निरीक्षणों के आधार पर नियमों के उल्लंघन के मामलों में 1,829 बंद करने के निर्देश जारी किए गए। इनमें से अनुपालन की पुष्टि और सत्यापन के बाद 1,479 को दोबारा काम शुरू करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
इसके अलावा 126 मामलों को अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) अथवा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को भेजा गया है। वहीं, 224 संस्थाएं दोबारा काम शुरू करने के आदेश जारी करने से पहले जांच के अधीन हैं।
सख्त निगरानी और समय पर अनुपालन सत्यापन पर जोर
आयोग ने बैठक में निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही अनुपालन का समय पर सत्यापन तथा केंद्र और राज्य स्तर की विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को जरूरी बताया गया।
सीएक्यूएम ने विशेष रूप से औद्योगिक इकाइयों, निर्माण एवं विकास गतिविधियों और डीजी सेट जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण, सख्त अनुपालन निगरानी और उल्लंघन पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
आयोग का कहना है कि एनसीआर में वायु प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका जमीन पर सख्ती से पालन भी सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से निरीक्षण, अनुपालन सत्यापन और उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आने वाले समय में भी प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मानकों के पालन पर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।
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