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कृषक चौपाल में प्राकृतिक खेती से कीट नियंत्रण की दी जानकारी

Information on pest control through natural farming was provided at the farmers meeting

हरदोली और केशलेवाड़ा में DSR फसल प्रदर्शन का निरीक्षण, खेतों में नहीं मिली कीट-व्याधि

बालाघाट, 16 सितंबर 2026। जिले में किसानों को प्राकृतिक एवं पर्यावरण हितैषी कृषि पद्धतियों से जोड़ने तथा फसलों को कीट एवं व्याधियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 16 सितंबर को ग्राम बाघाटोला में कृषक चौपाल आयोजित की गई। चौपाल में किसानों को प्राकृतिक खेती के माध्यम से फसलों में होने वाली कीट-व्याधियों के नियंत्रण और फसल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।

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कृषि विभाग के उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए ऐसी कृषि पद्धति है, जिसमें खेत और पर्यावरण की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कृषक चौपाल के दौरान किसानों को बताया गया कि फसल में कीट एवं रोगों की समस्या को गंभीर होने से पहले पहचानना जरूरी है। इसके लिए खेतों की नियमित निगरानी, फसल की स्थिति का अवलोकन और प्रारंभिक लक्षणों की पहचान महत्वपूर्ण है।

प्राकृतिक एवं जैविक उपायों पर जोर

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कृषक चौपाल में किसानों को प्राकृतिक खेती एवं जैविक उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कृषि विभाग की ओर से बताया गया कि फसलों में अनावश्यक रूप से रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करने के बजाय उपलब्ध प्राकृतिक एवं जैविक उपायों का उपयोग किया जा सकता है। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ मिट्टी, पर्यावरण और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को भी सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

किसानों को यह भी समझाया गया कि किसी भी फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर बिना जानकारी के कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। समस्या की सही पहचान के बाद ही कृषि विशेषज्ञों या विभागीय अधिकारियों से सलाह लेकर आवश्यक कदम उठाना उचित है। समय पर निगरानी और सही प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

हरदोली और केशलेवाड़ा में DSR फसल प्रदर्शन का निरीक्षण

इसी क्रम में विकासखंड बालाघाट के ग्राम हरदोली एवं ग्राम केशलेवाड़ा में DSR (फार्मर स्कूल) डेमो का भी भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों के खेतों में पहुंचकर फसल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। ग्राम हरदोली में कृषक श्री गेंदलाल पांचे तथा ग्राम केशलेवाड़ा में कृषक श्री बसंत चौधरी के खेत में फसल का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खेतों में फसल की बढ़वार, स्वास्थ्य एवं वर्तमान स्थिति को देखा। विभागीय निरीक्षण में दोनों खेतों में वर्तमान समय में किसी प्रकार की कीट-व्याधि नहीं पाई गई। अधिकारियों ने खेतों में फसल की स्थिति का अवलोकन करते हुए किसानों से खेती से जुड़ी जानकारी भी ली और उन्हें आगे भी नियमित रूप से फसल की निगरानी करते रहने की सलाह दी।

शुरुआती लक्षणों की पहचान जरूरी

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी कि फसल में किसी भी प्रकार के बदलाव को नजरअंदाज नहीं करें। पत्तियों का रंग बदलना, पत्तियों पर धब्बे दिखाई देना, पत्तियों का मुड़ना, पौधों की असामान्य वृद्धि या किसी हिस्से का अचानक सूखना जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल इसकी जांच कराई जाए। कीट या रोग की शुरुआती पहचान होने पर समय रहते प्रबंधन के उपाय किए जा सकते हैं।

अधिकारियों ने किसानों से कहा कि खेतों का नियमित भ्रमण केवल फसल की स्थिति देखने तक सीमित न रहे, बल्कि पौधों के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से निरीक्षण भी किया जाए। इससे संभावित कीट एवं रोग की समस्या को शुरुआती अवस्था में पहचानने में मदद मिल सकती है।

अनावश्यक कीटनाशक प्रयोग से बचने की अपील

उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने किसानों से प्राकृतिक खेती एवं जैविक उपायों को अपनाने के साथ-साथ खेतों की नियमित निगरानी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल में समस्या आने पर किसान बिना विशेषज्ञ सलाह के किसी भी कीटनाशक या अन्य कृषि रसायन का प्रयोग करने से बचें।

कृषि विभाग की ओर से किसानों को सलाह दी गई कि फसल में कीट-व्याधि के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें, ताकि समस्या की पहचान कर उचित सलाह दी जा सके। विभाग का उद्देश्य किसानों को फसल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है, जिनसे उत्पादन सुरक्षित रखने के साथ पर्यावरण और मिट्टी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा सके।

ग्राम बाघाटोला की कृषक चौपाल और हरदोली एवं केशलेवाड़ा में DSR फसल प्रदर्शन के निरीक्षण के माध्यम से कृषि विभाग ने किसानों को एक बार फिर यह संदेश दिया कि समय पर खेत की निगरानी, कीट-व्याधि की शुरुआती पहचान और उचित कृषि सलाह फसल सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक एवं जैविक उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर किसान खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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