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बारिश की हर बूंद बचाने का राष्ट्रीय आह्वान, ‘कैच द रेन’ अभियान से जल संरक्षण को मिलेगी नई गति

A national call to save every raindrop the ‘Catch the Rain campaign will give new momentum to water conservation

नई दिल्ली। देश में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने और वर्षा की प्रत्येक बूंद को सहेजने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बार फिर नागरिकों से सामूहिक प्रयास करने की अपील की है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 135वें संस्करण में देशवासियों से वर्षा जल की हर बूंद को संरक्षित करने और जल संरक्षण के प्रयासों को निरंतर गति देने का आह्वान किया। इसके बाद 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक देशभर में केंद्रित राष्ट्रव्यापी अभियान के माध्यम से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कैच द रेन—इस मिशन के जरिये हमें वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को मिलकर बचाना है। मैं सभी देशवासियों से विशेष आग्रह करता हूं कि वर्षा जल की हर एक बूंद को सामूहिक प्रयास से संरक्षित करें।”

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अभियान के तहत प्रत्येक घर, सोसायटी और कार्यस्थल पर वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही उपयुक्त स्थानों पर रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट बनाने, अनुपयोगी बोरवेलों की मरम्मत कर उन्हें भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोग में लाने तथा बावड़ियों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जा रहा है।

तालाबों और जलाशयों से गाद हटाकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि मानसून के दौरान अधिक से अधिक वर्षा जल का संरक्षण किया जा सके। जल संरक्षण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत करने की पहल भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

‘जल संचय जन भागीदारी’ से मिली नई दिशा

जल संरक्षण में जनभागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘जल संचय जन भागीदारी’ (जेएसजेबी) अभियान की शुरुआत 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत से की गई थी। इस पहल के माध्यम से समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और लागत—इन तीन ‘सी’ के सिद्धांतों पर आधारित मॉडल को बढ़ावा दिया गया।

इस अभियान में जनभागीदारी, संस्थागत सहयोग, सीएसआर योगदान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से जल संरक्षण के प्रयासों को गति दी गई। कम लागत वाली भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण संरचनाओं के निर्माण, अनुपयोगी बोरवेलों की बहाली तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक समाधान अपनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

‘जल संचय जन भागीदारी 1.0’ के तहत कम से कम 10 लाख भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था। अभियान के दौरान देशभर में 27 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण की सूचना प्राप्त हुई, जो निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक है।

जेएसजेबी 2.0 में भूजल पुनर्भरण पर जोर

पहले चरण की सफलता के बाद 1 जून 2025 को ‘जल संचय जन भागीदारी 2.0’ की शुरुआत की गई। इस चरण में विशेष रूप से उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कम लागत वाली संरचनाओं के माध्यम से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा दिया गया।

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31 मई 2026 तक देशभर में कम से कम एक करोड़ भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। वहीं, 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाओं के निर्माण की सूचना प्राप्त हुई है। इन संरचनाओं का वर्तमान में भौतिक सत्यापन और क्षेत्रीय प्रमाणीकरण किया जा रहा है।

‘जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन’ 2026

‘जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन’ अभियान का शुभारंभ 1 जून 2026 को किया गया। इसके तहत ‘जल संचय जन भागीदारी’ पहल का विस्तार करते हुए इसे ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ से जोड़ा गया है।

अभियान का उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल भंडारण और जनभागीदारी को एक साथ जोड़ते हुए प्रत्येक वर्षा को जल संरक्षण के अवसर में बदलना है। इसके अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इनमें विकसित भारत-जी राम जी, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’, जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं पुनर्स्थापन, कैंपा, वित्त आयोग के अनुदान और राज्य सरकार की योजनाएं शामिल हैं।

अभियान में पंचायती राज संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, महिला समूहों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय समुदायों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

2021 से लगातार आगे बढ़ रहा ‘कैच द रेन’

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर ‘जहां वर्षा हो, जब वर्षा हो, वर्षा जल को संचित करें’ विषय के साथ ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ की शुरुआत की थी। वर्ष 2019 में शुरू हुए जल शक्ति अभियान की सफलता के आधार पर इसे व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया।

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वर्ष 2021 में वर्षा जल संचयन, जल निकायों की जियो-टैगिंग और वैज्ञानिक जल प्रबंधन पर जोर दिया गया। वर्ष 2022 में पारंपरिक जलाशयों के पुनर्जीवन, भूजल पुनर्भरण, आर्द्रभूमियों और नदियों के कायाकल्प को प्राथमिकता मिली। वर्ष 2023 में पेयजल स्रोतों की स्थिरता और 150 जल-संकटग्रस्त जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। वहीं, वर्ष 2024 में ‘नारी शक्ति से जल शक्ति’ थीम के तहत महिलाओं के नेतृत्व में जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया।

जल शक्ति केंद्र बन रहे ज्ञान और सुविधा केंद्र

जल संरक्षण अभियान के तहत देश के जिलों में जल शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र जल संरक्षण के ज्ञान और सुविधा केंद्र के रूप में कार्य करते हैं। इनके माध्यम से वर्षा जल संचयन तकनीकों की जानकारी, स्थानीय समुदायों और जिला प्रशासन को तकनीकी मार्गदर्शन तथा जल संरक्षण गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान किया जाता है।

कृषि और ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण

जल संरक्षण की ये पहलें केवल पानी बचाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी है। वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जलाशयों के पुनर्जीवन से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण आजीविका मजबूत होने के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी।

जल की बढ़ती मांग और बदलती जलवायु के दौर में वर्षा की प्रत्येक बूंद का संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। वैज्ञानिक योजना, स्थानीय स्वामित्व और सामूहिक भागीदारी के माध्यम से ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जन भागीदारी’ जैसे अभियान देश में जल संरक्षण को एक व्यापक जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं। जल संरक्षण के इन प्रयासों से कृषि को मजबूती, ग्रामीण विकास को गति और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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