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वनकर्मियों ने जमा कराए शस्त्र, लटेरी घटना में कार्रवाई का विरोध

हलधर किसान। विदिशा जिले के लटेरी में वन विभाग की फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत होने पर प्रशासन ने वनकर्मियों पर कार्रवाई की है। इसके कार्रवाई का प्रदेश भर विरोध बढ़ता जा रहा है। लगभग हर जिले में जिला मुख्यालय पर वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही वन विभाग के कर्मचारी संगठनों ने ज्ञापन सौंपा, जिसमें वनकर्मियों पर लगाई गई धारा-302 को खारिज करने की मांग की। मध्य प्रदेश रेंजर एसोसिएशन एवं मध्य प्रदेश के अन्य वन संगठनों के आह्वान पर संपूर्ण मध्य प्रदेश के समस्त रेंजर और वन अमले ने शासकीय अस्त्र-शस्त्र जमा कर की गई कार्रवाई वापस लेने की मांग की है।
बता दें कि 9 अगस्त को वन परिक्षेत्र दक्षिण लटेरी खटियापुरा के जंगल में कुख्यात वन माफियाओं गिरोह को सागौन की लकड़ी की तस्करी और अवैध कटाई को रोकने के लिए लटेरी के वन अमले ने रोकने की कोशिश की। इस पर वन अमले व अपराधियों के मध्य हुई मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी जिसके विरुद्ध पूर्व से प्रकरण माननीय न्यायालय में विचाराधीन हैं की मृत्यु हो गई। इस कारण शासकीय कर्तव्य के दौरान वन सुरक्षा के लिए तैनात वन अमले के अधिकारियों व कर्मचारियों पर राजनैतिक एवं शासन के दबाव के चलते विदिशा पुलिस प्रशासन ने नियम विरूद्ध तरीके से बिना न्यायिक जांच के एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तार किया। इसके बाद इन्हें जेल अभिरक्षा में भेजा गया है।
इसी के विरोध में मध्य प्रदेश के वन विभाग के समस्त वन कर्मचारियों एवं अधिकारियों में रोष व्याप्त है। इसी के चलते मध्य प्रदेश रेंजर एसोसिएशन और मध्य प्रदेश वन विभाग के अन्य वन संगठनों के आह्वान पर विरोध किया। विगत दिवस उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदाय किए जाने वाले प्रशस्ति पत्रों का बहिष्कार करते हुए मंगलवार को धार व संपूर्ण मध्यप्रदेश में वन सुरक्षा के लिए प्रदाय अस्त्र-शस्त्र वापस करने का निर्णय लिया। ज्ञापन में कहा गया कि क्षेत्रीय वन कर्मचारियों और वन अधिकारियों को प्रदाय किए गए अस्त्र-शस्त्रों के परिचालन के दौरान होने वाली घटना के संबंध में पर्याप्त संरक्षण प्रदाय नहीं किए गए हैं और न ही वन अमले को सशस्त्र वन बल घोषित किया गया है। अस्त्र-शस्त्र परिचालन के दौरान भारतीय दंड संहिता की धारा 45 एवं 197 के साथ-साथ इंडियन पेनल कोड की धारा 76 का पर्याप्त संरक्षण और अधिकार प्राप्त नहीं होने से शो पीस के रूप में वन अमले को प्राप्त शासकीय अस्त्र-शस्त्र विरोध स्वरूप जमा कराए गए। साथ ही आगामी समय में ऐसी घटनाएं घटित न हो इस सुरक्षा की दृष्टि से वन विभाग ने अस्त्र-शस्त्र शासन को वापस करने का निर्णय लिया गया। मध्यप्रदेश में समस्त वन अमले ने शासकीय अस्त्र-शस्त्रों को जमा कराए गए।
साथ ही कहा कि शस्त्र जमा उपरांत शासन स्तर से वनों की सुरक्षा में संलग्न वन अमले को सुरक्षा के लिए पर्याप्त संरक्षण और नियम लिखित में प्राप्त नहीं होते हैं तो एक निश्चित अवधि के बाद संपूर्ण मध्यप्रदेश का समस्त वन अमला अपने कर्तव्यों से विरक्त होकर हड़ताल के लिए मजबूर होगा। जिससे भविष्य में वन संपदा को होने वाली नुकसानी और हानि के लिए पूर्ण रूप से मध्य प्रदेश वन विभाग के अधिकारी और मध्यप्रदेश शासन जवाबदार होगा।

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