हलधर किसान अंतर्राष्ट्रीय। ऑस्ट्रेलिया में गन्ने की खेती से निकलने वाले कृषि अवशेष अब विमानन क्षेत्र के लिए स्वच्छ ईंधन का स्रोत बनने जा रहे हैं। इटली की एमएआईआरई समूह की कंपनी नेक्स्टकेम को ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड स्थित बर्डेकिन क्षेत्र में प्रस्तावित प्रोजेक्ट लायन के लिए तकनीक, प्रोसेस डिजाइन और इंजीनियरिंग सेवाओं का महत्वपूर्ण ठेका मिला है। इस परियोजना में गन्ने की पत्तियों, ऊपरी हिस्सों और कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अन्य कृषि अवशेषों से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) और नवीकरणीय डीजल तैयार किया जाएगा।
परियोजना को पूरी क्षमता पर संचालित किए जाने के बाद हर साल करीब 1.25 लाख टन तक सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल का उत्पादन किया जा सकेगा। यह परियोजना कृषि अवशेषों को कचरा समझने के बजाय उन्हें मूल्यवान ऊर्जा संसाधन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गन्ने के अवशेष बनेंगे ईंधन का कच्चा माल
प्रोजेक्ट लायन में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गन्ने के अवशेषों को मुख्य कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। गन्ने की कटाई के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में पत्तियां, ऊपरी हिस्से और अन्य जैविक अवशेष बच जाते हैं। कई क्षेत्रों में इन अवशेषों का निपटान खेतों में जलाकर किया जाता है। इससे एक ओर कृषि संसाधन नष्ट होते हैं, वहीं दूसरी ओर धुआं और कार्बन उत्सर्जन जैसी पर्यावरणीय समस्याएं भी पैदा होती हैं।
प्रस्तावित परियोजना इसी कृषि अवशेष को उपयोगी कच्चे माल में बदलने की कोशिश करेगी। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र से निकलने वाले बायोमास के लिए नया आर्थिक उपयोग विकसित हो सकता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से कम-कार्बन ईंधन तैयार करने का अवसर मिलेगा।
गैसीफिकेशन तकनीक से तैयार होगी सिंथेसिस गैस
नेक्स्टकेम की सहायक कंपनी मायरेकेमिकल को इस परियोजना के लिए लाइसेंस, प्रोसेस डिजाइन पैकेज और इंजीनियरिंग सेवाओं का ठेका दिया गया है। यह ठेका स्काई रिन्यूएबल्स बर्देकिन पीटीवाई लिमिटेड की ओर से दिया गया है।
परियोजना में नेक्स्टकेम की NX Circular Gasification तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से गन्ने के अवशेषों को गैसीफाई कर शुद्ध सिंथेसिस गैस तैयार की जाएगी। इसके बाद अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं और सहयोगी कंपनियों की तकनीक के माध्यम से इस सिंथेसिस गैस को सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और नवीकरणीय डीजल में बदला जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया की खासियत यह है कि इसमें कृषि क्षेत्र से निकलने वाले ऐसे अवशेषों को उपयोग में लाया जाएगा, जिनका पारंपरिक रूप से सीमित आर्थिक मूल्य होता है। इस तरह कृषि अवशेषों से ऊर्जा उत्पादन का एक नया मॉडल विकसित किया जा सकता है।
विमानन क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन में मदद
विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करना दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है। पारंपरिक विमान ईंधन जीवाश्म ईंधन पर आधारित होते हैं, इसलिए विमानन क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है। कृषि अवशेषों जैसे नवीकरणीय स्रोतों से SAF तैयार करने की तकनीक विकसित होने से विमानन क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रोजेक्ट लायन इसी सोच को आगे बढ़ाता है। गन्ने के अवशेषों को जलाने या बेकार छोड़ने के बजाय उन्हें ईंधन उत्पादन में इस्तेमाल करने से एक साथ दो लाभ हासिल करने का प्रयास होगा—कृषि अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन और कम-कार्बन ईंधन का उत्पादन।
ऑस्ट्रेलिया में बढ़ रहा सस्टेनेबल फ्यूल का बाजार
नेक्स्टकेम के मैनेजिंग डायरेक्टर फैबियो फ्रितेली के अनुसार, यह परियोजना नवीकरणीय और अपशिष्ट आधारित सामग्री से सस्टेनेबल फ्यूल तैयार करने में कंपनी की तकनीक की उपयोगिता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया सस्टेनेबल फ्यूल उद्योग के विकास के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बाजार बन रहा है और कंपनी देश में अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।
उनके मुताबिक गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गन्ने के अवशेषों को कम-कार्बन ईंधन में बदला जा सकता है। इससे विमानन क्षेत्र के उत्सर्जन को कम करने के वैश्विक प्रयासों में भी योगदान मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए भी बन सकता है नया अवसर
गन्ने की खेती वाले क्षेत्रों में कृषि अवशेषों का उपयोग केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है। यदि कृषि अवशेषों की मांग ऊर्जा उद्योग में बढ़ती है, तो किसानों और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोगों के लिए अतिरिक्त आय के रास्ते खुल सकते हैं।
प्रोजेक्ट लायन इस बात का उदाहरण है कि कृषि क्षेत्र से निकलने वाले अवशेषों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक नया तालमेल विकसित होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया का यह प्रोजेक्ट गन्ने के कचरे को विमानन ईंधन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हर साल 1.25 लाख टन तक SAF उत्पादन की संभावित क्षमता वाली यह परियोजना यह संकेत देती है कि आने वाले समय में कृषि अवशेष केवल खेतों का कचरा नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ ईंधन के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन सकते हैं। गन्ने के अवशेषों से SAF उत्पादन कृषि अपशिष्ट के बेहतर उपयोग, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और विमानन क्षेत्र को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
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