6 जुलाई से शुरु होगा चातुर्मास, 4 माह तक मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक

Chaturmas will start from 6th July auspicious activities will be prohibited for 4 months

हलधर किसान, अजमेर (धर्म)। सनातन धर्म में तिथियों, गृह- नक्षत्रों का बड़ा महत्व माना गया है। गृह नक्षत्रों के इस परिवर्तन में चातुर्मास का समय भी आता है, जिसे देवों के विश्राम का समय कहा जाता है। इस वर्ष चातुर्मास की शुरुआत 6 जुलाई याने देवशयनी एकादशी से होने जा रही है। आगामी चार महीने तक इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य या मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते। यह अवधि आषाढ़ शुक्ल पक्ष से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक जारी रहती है।

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अमजेर के ज्योतिषाचार्य सुदीप सोनी (जैन) ने बताया कि इस बार आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 5 जुलाई को शाम 6.58 बजे से लेकर 6 जुलाई को रात 9.14 बजे तक है।  देवशयनी एकादशी का व्रत 6 जुलाई उदया तिथि रविवार को रखा जाएगा। एकादशी के दिन 4 शुभ योगों का निर्माण होने वाला है। इस दिन साध्य योग, शुभ योग, रवि योग और त्रिपुष्कर योग बन रहे हैं।
ऐसा माना जाता है कि घर में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश शुभ तिथि में ही करने चाहिए, जिससे कार्य में सफलता और सकारात्मकता बनी रहती है। लेकिन कुछ विशेष तिथियां ऐसी होती हैं, जब मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं और ये तिथियां चातुर्मास के दौरान आती हैं।
आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है, यहीं से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। चातुर्मास की अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, और चार महीने तक सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। इस समय में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक आयोजन नहीं किए जाते। चातुर्मास का 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ समापन होगा और इसके बाद फिर से शुभ कार्य आरंभ हो सकेंगे।

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