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कृषि क्षेत्र में नई दिशा: मधुमक्खी पालन से डिजिटल किसान आईडी और तिलहन-दलहन उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर

A New Direction in the Agricultural Sector Government Focuses on Beekeeping Digital Farmer IDs and Boosting Oilseed and Pulse Production

नई दिल्ली। देश में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को मजबूत करने और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। एक ओर राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम) के जरिए वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर एग्रीस्टैक और डिजिटल कृषि मिशन के माध्यम से किसानों को डिजिटल पहचान और कृषि सेवाओं से जोड़ने का काम तेज हुआ है। इसके साथ ही तिलहन और दलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने के लिए विशेष मिशनों पर भी जोर दिया जा रहा है।

मधुमक्खी पालन को वैज्ञानिक बनाने पर जोर

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के माध्यम से केंद्रीय क्षेत्र योजना राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य मधुमक्खी पालन उद्योग का समग्र विकास करना, वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना, शहद एवं अन्य मधुमक्खी उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना तथा किसानों के लिए आय और रोजगार के अवसर पैदा करना है।

मिशन के तहत कृषि और गैर-कृषि परिवारों को आजीविका सहायता देने के साथ-साथ मधुमक्खी पालन के माध्यम से महिलाओं के सशक्तीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र, शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं, मधुमक्खी रोग निदान प्रयोगशालाएं और गुणवत्तापूर्ण न्यूक्लियस स्टॉक विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

सरकार के अनुसार अब तक 7 विश्वस्तरीय शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं, 66 मिनी प्रयोगशालाएं, 83 शहद प्रसंस्करण इकाइयां तथा 90 शहद संग्रहण, ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। वहीं गुणवत्तापूर्ण रानी मधुमक्खियों के उत्पादन और मधुमक्खी कॉलोनियों के विस्तार के लिए 81 न्यूक्लियस स्टॉक विकास केंद्रों को सहायता दी गई है। इसका असर शहद उत्पादन में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2014-15 में 80,530 मीट्रिक टन शहद उत्पादन की तुलना में वर्ष 2025-26 में उत्पादन बढ़कर 1,51,690 मीट्रिक टन हो गया है।

डिजिटल किसान आईडी से कृषि सेवाओं में तेजी

कृषि क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार एग्रीस्टैक को किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित कर रही है। इसमें किसान का विवरण, भूमि रिकॉर्ड, उगाई जाने वाली फसलें तथा पशुधन और मत्स्य पालन जैसी परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल की जा रही है।

एग्रीस्टैक के तहत किसान रजिस्टर, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और बोई गई फसल के रजिस्टर को कृषि क्षेत्र के तीन प्रमुख डिजिटल रजिस्टर के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को ऋण, फसल बीमा, मौसम संबंधी सलाह और एमएसपी आधारित खरीद जैसी सेवाएं अधिक तेज और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना है।

3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। वहीं रबी 2025-26 में देश के 648 जिलों में 31.3 करोड़ से अधिक भूखंडों को कवर करते हुए डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया गया। मणिपुर में भी डिजिटल फसल सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

किसानों के डेटा की सुरक्षा के लिए एग्रीस्टैक को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के अनुरूप विकसित किया गया है। किसान की जानकारी उसकी सहमति से ही एकत्र करने और अधिकृत संस्थाओं के साथ डेटा साझा करने पर किसान को नियंत्रण देने की व्यवस्था की गई है।

कृषि उपज के सटीक आकलन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। फसल बीमा योजना की ‘यस-टेक’ पहल में धान, गेहूं और सोयाबीन के लिए तकनीक आधारित उपज आकलन किया जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम विकसित किया गया है, जो फसल उत्पादन के अनुमान के लिए समय पर और सटीक उपज आंकड़े उपलब्ध कराने के उद्देश्य से काम करता है।

तिलहन उत्पादन बढ़ाने का मिशन

खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (एनएमईओ-ओएस) को मंजूरी दी है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2022-23 के 39 मिलियन टन प्राथमिक तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर वर्ष 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।

मिशन के तहत देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर संचालित किए जा चुके हैं। इनमें किसानों को उच्च उपज देने वाली किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीज और उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कटाई के बाद की व्यवस्था मजबूत करने के लिए तेल मिलों की स्थापना और उन्नयन को भी सहायता दी जा रही है। साथ ही प्रजनक बीजों की खरीद के लिए 100 प्रतिशत सहायता, नए सीड हब और विशेषीकृत बीज भंडारण इकाइयों की स्थापना पर जोर है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार तिलहन उत्पादन वर्ष 2022-23 में 413.55 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 430.59 लाख टन हो गया। खाद्य तेलों का आयात भी वर्ष 2022-23 के 165 लाख टन से घटकर वर्ष 2024-25 में 160.72 लाख टन रहा।

दलहन में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

दालों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार ने 11 अक्टूबर 2025 को ‘दालों में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन’ शुरू किया। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 242 लाख टन से बढ़ाकर 350 लाख टन करना है।

मिशन के तहत किसानों को गुणवत्तापूर्ण और जलवायु-अनुकूल प्रमाणित बीज, नई उत्पादन तकनीक, बीज किट, प्रशिक्षण और कटाई के बाद की सुविधाओं के लिए सहायता दी जा रही है। तूर, उड़द और मसूर की सरकारी खरीद को भी पीएम-आशा के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है।

वर्ष 2025-26 में 4.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई उत्पादन एवं संरक्षण तकनीकों के प्रदर्शन किए गए। किसानों को 9.25 लाख बीज किट नि:शुल्क वितरित किए गए। इसी अवधि में दलहन उत्पादन 242.46 लाख टन से बढ़कर 274.09 लाख टन हो गया। वहीं दलहन आयात वर्ष 2024-25 के 72.56 लाख टन से घटकर वर्ष 2025-26 में 59.64 लाख टन रह गया।

कृषि को बहुआयामी मजबूती

मधुमक्खी पालन से अतिरिक्त आय और रोजगार, एग्रीस्टैक से डिजिटल सेवाएं, एआई आधारित फसल आकलन तथा तिलहन-दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे मिशन कृषि क्षेत्र को एक साथ कई मोर्चों पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सरकार का फोकस उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन, सरकारी खरीद और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने पर है। इससे किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के साथ कृषि क्षेत्र को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

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