नई दिल्ली, हलधर किसान। देश की कृषि नीति, किसानों की आय और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी (AIKCC) सहित विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। करीब सभी प्रमुख कृषि राज्यों के किसान नेताओं की मौजूदगी में हुई इस बैठक में एथेनॉल नीति, राष्ट्रीय कृषि नीति, एमएसपी, कृषि उत्पादों के विपणन, आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) और फ्यूचर मार्केट जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि किसान संगठनों ने पहली बार इतने स्पष्ट रूप से कहा कि वे एथेनॉल के विरोध में नहीं बल्कि उसके समर्थन में हैं, लेकिन उसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए।

बैठक में किसान नेताओं ने केंद्रीय मंत्री के सामने कहा कि देश में एथेनॉल को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर इसे किसानों और उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदायक बताने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि एथेनॉल भारतीय किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक बड़ा अवसर बन सकता है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि एथेनॉल कार्यक्रम को किसान-केंद्रित बनाया जाए तो गन्ना, मक्का, धान (चावल) सहित कई फसलों के उत्पादकों को नया और स्थायी बाजार मिलेगा तथा कृषि क्षेत्र में निवेश और रोजगार भी बढ़ेंगे।
किसानों ने बैठक में स्पष्ट किया कि एथेनॉल केवल ऊर्जा क्षेत्र का विषय नहीं है, बल्कि यह कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकता है। उनका कहना था कि जब कृषि उत्पाद केवल मंडियों तक सीमित न रहकर ऊर्जा उद्योग तक पहुंचेंगे तो किसानों को अधिक खरीदार मिलेंगे, फसल के दाम स्थिर रहेंगे और भंडारण की समस्या भी कम होगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसी नीति बनाए जिससे एथेनॉल उत्पादन का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिले, न कि केवल उद्योगों या बिचौलियों को।

AIKCC के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय कृषि नीति पर भी सरकार से व्यापक चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु संकट, उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक बाजार की चुनौतियों को देखते हुए देश को एक ऐसी आधुनिक कृषि नीति की जरूरत है जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित करे। साथ ही आयात शुल्क, फ्यूचर मार्केट और कृषि उत्पादों के विपणन से जुड़े नियमों की समीक्षा कर किसानों के हित में आवश्यक बदलाव करने का आग्रह भी किया गया।
बैठक में किसानों ने यह सुझाव भी दिया कि एथेनॉल को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार और किसान संगठन मिलकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाएं। वैज्ञानिक तथ्यों, शोध रिपोर्टों, छोटे वीडियो, सोशल मीडिया और गांव स्तर की बैठकों के माध्यम से किसानों और आम जनता को बताया जाए कि एथेनॉल से किन फसलों को लाभ होगा और इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा कैसे मजबूत होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान संगठनों द्वारा रखे गए सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और कहा कि केंद्र सरकार किसान हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए कृषि भवन के दरवाजे हमेशा खुले हैं और सरकार संवाद के माध्यम से ही बेहतर कृषि नीति तैयार करना चाहती है। उन्होंने दोहराया कि उनके लिए किसान भगवान के समान हैं और सरकार का हर निर्णय किसान हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि एथेनॉल सहित सभी मुद्दों पर प्राप्त सुझावों का गंभीर अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मक्का, गन्ना, चावल और अन्य फीडस्टॉक फसलों की मांग और कीमतों का संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार लगातार समीक्षा करेगी, ताकि किसी भी राज्य या किसी भी फसल के किसानों के साथ अन्याय न हो। उन्होंने यह भी कहा कि एथेनॉल के संबंध में फैलाए जा रहे नकारात्मक प्रचार का जवाब वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर दिया जाएगा।
बैठक के अंत में AIKCC के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे देशभर के गांवों में जाकर किसानों के बीच एथेनॉल को लेकर फैले भ्रम को दूर करेंगे और सरकार के साथ मिलकर किसान हितैषी नीतियों को मजबूत बनाने का प्रयास करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और चंडीगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के किसान संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहे। सभी नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि यदि नीति निर्माण में किसानों की भागीदारी बढ़ेगी तो भारतीय कृषि अधिक मजबूत, आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनेगी।
बैठक से यह स्पष्ट संदेश निकलकर सामने आया कि सरकार और किसान संगठन टकराव के बजाय संवाद के रास्ते आगे बढ़ना चाहते हैं। एथेनॉल, राष्ट्रीय कृषि नीति और कृषि बाजार सुधार जैसे विषय आने वाले समय में भारतीय कृषि की दिशा तय करेंगे। ऐसे में किसानों की अपेक्षा है कि नीति निर्माण में उनकी आवाज को प्राथमिकता मिले और हर निर्णय का केंद्र देश का अन्नदाता ही रहे।
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