कृषि आदान विक्रेता संघ ने बीज कंपनियों से सीजन के बाद बचा माल वापस लेने की मांग की, गेहूं बीज की कीमतों पर सरकार से निगरानी की अपील
हलधर किसान भोपाल। रबी सीजन शुरू होने से पहले गेहूं बीज की अग्रिम बुकिंग व्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश के कृषि आदान व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। कृषि आदान विक्रेता संघ मध्य प्रदेश, भोपाल से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि बीज उत्पादक एवं सप्लाई करने वाली कंपनियां सीजन से पहले कृषि आदान विक्रेताओं से बड़ी मात्रा में बीज की अग्रिम बुकिंग करवा लेती हैं। इसके लिए कई कंपनियां लगभग 35 से 40 रुपये प्रति किलो तक की टोकन राशि भी व्यापारियों से लेती हैं। इसके बाद बीज की सप्लाई के समय शेष राशि का भुगतान करना पड़ता है।
व्यापारियों के अनुसार, कई कंपनियों की रिसर्च वैरायटी के नाम से उपलब्ध कराई जाने वाली गेहूं बीज की कीमत लगभग 90 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है। ऐसे में व्यापारी अपने क्षेत्र की मांग और संभावित बिक्री के आधार पर बीज की बुकिंग तो कर लेते हैं, लेकिन सीजन समाप्त होने के बाद यदि कुछ मात्रा में बीज स्टॉक बच जाता है तो उसके निस्तारण की जिम्मेदारी पूरी तरह व्यापारी पर आ जाती है।
बचे स्टॉक की वापसी नहीं होने से नुकसान
कृषि आदान विक्रेताओं का कहना है कि बीज कारोबार में प्रति किलो मिलने वाला वास्तविक मार्जिन बहुत अधिक नहीं होता। व्यापारियों के मुताबिक 5 से 10 रुपये प्रति किलो का मार्जिन मिलने के बावजूद उन्हें दुकान, कर्मचारी, परिवहन, भंडारण और अन्य खर्च उठाने पड़ते हैं। ऐसे में सीजन के अंत में यदि गेहूं बीज का स्टॉक बच जाता है और उसे खुले बाजार अथवा मंडी में कम कीमत पर बेचना पड़ता है तो पूरे सीजन का मुनाफा प्रभावित हो जाता है।
व्यापारियों का आरोप है कि कंपनियां सीजन से पहले अग्रिम बुकिंग के माध्यम से अपनी बिक्री सुनिश्चित कर लेती हैं, जबकि बचा हुआ स्टॉक व्यापारी के लिए बड़ी आर्थिक परेशानी बन जाता है। संघ का कहना है कि यदि कंपनी व्यापारी को माल बेचती है तो सीजन समाप्त होने के बाद निर्धारित शर्तों के अनुसार बचा हुआ स्टॉक वापस लेने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
कंपनियों से सेल्स रिटर्न की मांग
कृषि आदान विक्रेता संघ मध्य प्रदेश, भोपाल के उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इस मामले में गंभीरता से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मानसिंह जी राजपूत तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी के समक्ष व्यापारियों की यह समस्या रखी गई है।
श्री दुबे ने प्रदेश के सभी जिलों के संगठन पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों से भी आग्रह किया है कि वे अपने-अपने संगठन के लेटरहेड पर वरिष्ठ पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराएं। उनका मानना है कि यदि प्रदेश के सभी जिलों से इस मुद्दे पर मांग उठती है तो बीज कंपनियों के साथ प्रभावी तरीके से चर्चा कर व्यापारियों के हित में समाधान तलाशने में संगठन को मजबूती मिलेगी।
अग्रिम बुकिंग बंद करने की चेतावनी
व्यापारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि कंपनियां सीजन समाप्त होने के बाद बचा हुआ बीज वापस लेने की व्यवस्था नहीं करती हैं तो भविष्य में कृषि आदान व्यापारी ऐसी कंपनियों की अग्रिम बुकिंग से दूरी बना सकते हैं।
व्यापारियों का तर्क है कि जिस प्रकार कंपनियां अपने स्तर पर बचा हुआ स्टॉक खुले बाजार में बेचकर पूंजी को वापस प्राप्त करने का प्रयास करती हैं, उसी प्रकार छोटे एवं मध्यम कृषि आदान व्यापारियों को भी अपने बचे हुए स्टॉक के लिए उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए। व्यापारियों के अनुसार, पूरे सीजन मेहनत करने के बाद यदि आखिरी में बचा हुआ माल घाटे में बेचना पड़े तो व्यापार करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो जाता है।
गेहूं बीज की कीमतों पर भी उठे सवाल
इसी मुद्दे के साथ गेहूं बीज की कीमतों को लेकर भी व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि बाजार में कुछ कंपनियां गेहूं की सामान्य किस्मों को रिसर्च वैरायटी या अलग-अलग नामों से बेचकर किसानों से अपेक्षाकृत अधिक कीमत वसूल रही हैं। उनका यह भी कहना है कि गेहूं में हाइब्रिड बीज के नाम पर बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है और किसानों को 40 रुपये के आसपास मिलने वाले बीज के मुकाबले 80 से 90 रुपये या उससे अधिक प्रति किलो तक कीमत चुकानी पड़ रही है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। बीज की वास्तविक कीमत, किस्म, प्रमाणन, गुणवत्ता, शोध एवं विकास लागत तथा कंपनी द्वारा निर्धारित व्यापारिक मूल्य जैसे पहलुओं की जांच संबंधित विभागों द्वारा की जानी चाहिए।
सरकार से मूल्य निर्धारण पर निगरानी की मांग
कृषि आदान व्यापारियों का कहना है कि गेहूं सहित अन्य कृषि बीजों के मूल्य निर्धारण और बाजार में उनकी बिक्री की व्यवस्था पर केंद्र एवं राज्य सरकार को भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी बीज की कीमत में असामान्य वृद्धि हो रही है तो उसकी लागत, गुणवत्ता, किस्म और प्रमाणन की जांच की जानी चाहिए, ताकि किसानों और कृषि आदान व्यापारियों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
व्यापारियों का कहना है कि बीज कृषि उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण इनपुट है। यदि महंगे बीज के नाम पर किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है और दूसरी ओर बचा हुआ स्टॉक व्यापारियों के लिए नुकसान का कारण बनता है तो पूरी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
कृषि आदान विक्रेता संघ ने वरिष्ठ पदाधिकारियों से इस मामले को प्रदेश स्तर पर बीज कंपनियों के समक्ष उठाने तथा आवश्यक होने पर संबंधित सरकारी विभागों के सामने भी रखने का आग्रह किया है। अब देखना होगा कि आगामी रबी सीजन से पहले बीज कंपनियां व्यापारियों की सेल्स रिटर्न संबंधी मांग पर क्या निर्णय लेती हैं और सरकार गेहूं बीज के मूल्य एवं बिक्री व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाती है।
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