नई दिल्ली। देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब देश के लगभग सभी आबाद गांवों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो चुकी है। सरकार के अनुसार, देश के 99.92 प्रतिशत आबाद गांवों में अब पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हुई है।
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि बैंकों द्वारा जन धन दर्शक (जेडीडी) ऐप पर अपलोड किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल 6,01,328 आबाद गांवों में से 6,00,868 गांवों में पांच किलोमीटर के दायरे में बैंक शाखा, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की सुविधा उपलब्ध है। इस तरह देश में लगभग सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज हासिल की जा चुकी है।
1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाओं का नेटवर्क
सरकार के अनुसार, देश में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। 17 जुलाई 2026 तक देश में 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाएं, करीब 17.36 लाख बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (बीसी) और लगभग 1.65 लाख इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) केंद्र कार्यरत हैं। इन संस्थानों और प्रतिनिधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बैंकिंग सेवाएं उनके घर और गांव के नजदीक उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि देश के प्रत्येक आबाद गांव के पांच किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक बैंकिंग केंद्र उपलब्ध हो। इसके लिए बैंक शाखाओं के साथ-साथ बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाएं खोलने पर जोर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी बैंकिंग विस्तार को आसान बनाने के लिए कई प्रावधान किए हैं। आरबीआई के नियमों के तहत वाणिज्यिक बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक देश में कहीं भी बैंक शाखाएं खोल सकते हैं। हालांकि, उन्हें अपनी कुल शाखाओं में से कम से कम 25 प्रतिशत शाखाएं बैंकिंग सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में खोलना जरूरी है।
आरबीआई के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन इलाकों में अभी बैंकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां बैंकिंग आउटलेट खोलना एक निरंतर प्रक्रिया है। इस कार्य की निगरानी राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) और केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समिति (यूटीएलबीसी) द्वारा संबंधित सरकारों, बैंकों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर की जाती है।
58.77 करोड़ जनधन खातों में जमा हैं 3.12 लाख करोड़ रुपये
वित्तीय समावेशन की दिशा में प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 17 जुलाई 2026 तक देश में कुल 58.77 करोड़ पीएमजेडीवाई खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में कुल 3,12,414 करोड़ रुपये की राशि जमा है।
जनधन खातों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है। इसके साथ ही ग्रामीण और गरीब परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खातों के माध्यम से पहुंचाने में भी मदद मिली है।
कृषि ऋण वितरण को डिजिटल बनाने पर जोर
सरकार ने कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए भी कई डिजिटल पहल शुरू की हैं। जन समर्थ पोर्टल को सरकारी ऋण और सब्सिडी योजनाओं के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से किसान और अन्य पात्र लाभार्थी ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं और डिजिटल माध्यम से उनके आवेदन का मूल्यांकन कर समय पर ऋण स्वीकृत करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।
कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए नाबार्ड का ई-केवाईसी एप्लिकेशन, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विकसित कृषिका और बैंकों के विभिन्न डिजिटल एप्लिकेशन भी उपयोग में लाए जा रहे हैं। इन डिजिटल माध्यमों से लाभार्थियों की पहचान, संपर्क, ऋण आवेदन की प्रक्रिया और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने सितंबर 2023 में किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) शुरू किया था। यह पोर्टल आधार आधारित लाभार्थी सत्यापन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से लिए गए ऋणों के लिए संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (एमआईएसएस) के तहत डिजिटल दावों के तेजी से निपटारे में मदद करता है।
डिजिटल भुगतान में साइबर सुरक्षा पर सरकार की नजर
बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना भी सरकार की प्राथमिकता बन गया है। सरकार और आरबीआई द्वारा डिजिटल भुगतान लेनदेन की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने आरबीआई के परामर्श से इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (आईडीपीआईसी) की स्थापना की है। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी और अलर्ट को वास्तविक समय में साझा करना है।
आरबीआई ने फरवरी 2021 में डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियंत्रणों पर मास्टर दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनके तहत बैंकों को इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और कार्ड भुगतान सहित विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानकों को लागू करना आवश्यक है।
आरबीआई ने मनी म्यूल खातों की पहचान के लिए एआई आधारित ‘म्यूलहंटर’ टूल भी शुरू किया है। वहीं, गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) डिजिटल लोन ऐप्स की निगरानी और विश्लेषण कर रहा है।
सरकार ने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। आरबीआई और बैंक एसएमएस, रेडियो और अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
सरकार के अनुसार, बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार, जनधन खातों की बढ़ती संख्या, डिजिटल ऋण व्यवस्था और साइबर सुरक्षा उपाय मिलकर देश में एक अधिक समावेशी, सुरक्षित और डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।
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