कृषि आदान व्यापारियों की आवाज बुलंद, NFL के निर्णय के खिलाफ प्रदेश संगठन का बड़ा कदम

Agricultural input traders raise their voice state organization takes a big step against NFLs decision

ओ फार्म जारी करने और टैगिंग प्रथा खत्म करने की मांग को लेकर संगठन सक्रिय

भोपाल। मध्यप्रदेश के कृषि आदान व्यापारियों की समस्याओं को लेकर कृषि आदान विक्रेता संघ लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। प्रदेश संगठन द्वारा नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) के झोनल मैनेजर श्री जी.आर. शर्मा को ज्ञापन सौंपकर कंपनी के उस निर्णय का विरोध किया गया है, जिसमें डीलरशिप सिक्योरिटी डिपॉजिट को बिना ब्याज के 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है। संगठन ने इसे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।

संगठन ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि यदि सिक्योरिटी राशि बढ़ाई जाती है तो उस पर कम से कम 10 से 12 प्रतिशत ब्याज दिया जाना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि बिना ब्याज इतनी बड़ी राशि जमा करवाना छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए बेहद कठिन होगा, जिससे खाद व्यापार प्रभावित हो सकता है।

इसके साथ ही संगठन ने उन व्यापारी साथियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया, जिनके “ओ फार्म” 31 मार्च के बाद जारी नहीं किए गए हैं। संगठन का कहना है कि फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर 1985 के खंड-10 के अनुसार निर्माता कंपनी कम से कम पांच वर्षों के लिए ओ फार्म जारी कर सकती है। ऐसे में प्रतिवर्ष 31 मार्च तक सीमित अवधि के लिए ओ फार्म जारी करना नियमों के विपरीत है।

प्रदेश संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि व्यापारियों को तत्काल ओ फार्म जारी नहीं किए गए तो संगठन इस मामले में हाईकोर्ट का रुख अपनाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी एवं हेमंत सिंह चौहान (बकतरा), जिला सीहोर विशेष रूप से उपस्थित रहे। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि कृषि आदान व्यापारियों की समस्याओं को लेकर प्रदेशभर में लगातार संवाद और आंदोलन जारी रहेगा।

इसी क्रम में भोपाल में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी संगठन की महत्वपूर्ण बैठक हुई। कृषि आदान विक्रेता संघ मध्यप्रदेश भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने कृषि सचिव श्री वरवड़े से मुलाकात कर खाद व्यापार में आ रही विभिन्न कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मान सिंह राजपूत तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी ने किया।

बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा खाद के साथ जबरन “टैगिंग” किए जाने का रहा। व्यापारियों ने बताया कि कंपनियों द्वारा खाद के साथ अन्य उत्पादों की अनिवार्य टैगिंग करने से व्यापारियों और किसानों दोनों को परेशानी उठानी पड़ती है। इस पर कृषि सचिव श्री वरवड़े ने आश्वासन दिया कि खाद के साथ टैगिंग की प्रथा समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही इस तरह की जबरन टैगिंग को अपराध की श्रेणी में लेने पर भी विचार किया जा रहा है।

बैठक में एनएफएल कंपनी द्वारा सिक्योरिटी राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए किए जाने का विषय भी प्रमुखता से रखा गया। संगठन ने स्पष्ट कहा कि इतनी अधिक राशि जमा करवाने से छोटे व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सरकार एवं संबंधित कंपनियां व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।

प्रदेश के व्यापारियों ने संगठन की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि लगातार प्रयासों के कारण व्यापारियों की आवाज शासन और प्रशासन तक पहुंच रही है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा कृषि आदान विक्रेताओं के हित में किए जा रहे कार्यों की प्रदेशभर में चर्चा हो रही है।

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कृषि आदान विक्रेता संघ के उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने कहा कि संगठन हमेशा व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदेशभर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि सभी साथी अपना बहुमूल्य समय निकालकर व्यापारियों की समस्याओं को शासन के समक्ष मजबूती से रख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खाद, बीज और कृषि आदान व्यापार से जुड़े व्यापारी किसानों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि व्यापारियों को अनावश्यक आर्थिक बोझ और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा तो इसका सीधा असर किसानों तक पहुंचेगा। इसलिए आवश्यक है कि सरकार और कंपनियां व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं को गंभीरता से समझें और उनका समाधान करें।

प्रदेश संगठन ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही एनएफएल मुख्यालय स्तर पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा और व्यापारियों को राहत मिलेगी। फिलहाल पूरे प्रदेश के कृषि आदान व्यापारी संगठन की इस पहल को किसान और व्यापारी हित में बड़ा कदम मान रहे हैं।

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