ड्रीप सिस्टम, बांस और कृषि उपकरण भी राख; पीड़ित किसान ने मांगी सरकारी सहायता
धार, हलधर किसान। मध्यप्रदेश के धार जिले की मनावर तहसील के ग्राम अजंदीमान में भीषण गर्मी के दौरान हुई एक दर्दनाक आगजनी ने किसान परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन के तार आपस में टकराने से निकली चिंगारी ने कुछ ही देर में विकराल आग का रूप ले लिया और किसान विवेक बड़जात्या के खेत में लगी तैयार केले की फसल को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते लगभग दो एकड़ क्षेत्र में लगी केले की फसल जलकर राख हो गई। आगजनी में खेत में लगा ड्रीप सिंचाई सिस्टम, फसल सुरक्षा के लिए लगाए गए बांस तथा अन्य कृषि उपकरण भी पूरी तरह नष्ट हो गए।
पीड़ित किसान विवेक बड़जात्या ने बताया कि संबंधित कृषि भूमि उनकी माता इंदुमती बड़जात्या के नाम दर्ज है। खेत में कुल चार एकड़ क्षेत्र में केले की खेती की गई थी और फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी थी। किसान को उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन सोमवार दोपहर अचानक बिजली तारों में हुए शॉर्ट-सर्किट ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।
किसान के अनुसार दोपहर के समय तेज गर्मी के बीच बिजली लाइन के तार आपस में टकरा गए, जिससे चिंगारी निकली और खेत में सूखी घास तथा केले के पौधों में आग लग गई। शुरुआत में खेत में लगे सिंचाई उपकरणों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन तेज हवा और गर्मी के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन जब तक आग पर पूरी तरह काबू पाया गया तब तक भारी नुकसान हो चुका था।

आग के कारण न केवल दो एकड़ क्षेत्र में लगी केले की फसल नष्ट हुई, बल्कि धुएं और गर्मी का असर खेत के अन्य हिस्सों में लगी फसल पर भी पड़ा है। इससे शेष फसल की गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ गई है। किसान ने बताया कि केले की खेती में लाखों रुपए की लागत आती है। पौध तैयार करने से लेकर सिंचाई, खाद, दवाई, मजदूरी और सुरक्षा व्यवस्था तक भारी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में अचानक हुई इस आगजनी ने पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है।
पीड़ित किसान ने स्थानीय पटवारी को सूचना देकर नुकसान का सर्वे कराने तथा शासन से उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसान का कहना है कि प्राकृतिक आपदा और विद्युत लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई सरकार को करना चाहिए, क्योंकि किसान लगातार जोखिम उठाकर खेती करता है।

इस घटना के बाद किसानों में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी दिखाई दे रही है। विवेक बड़जात्या ने आरोप लगाया कि मार्च माह में आए आंधी-तूफान से भी क्षेत्र में केले की फसल को भारी नुकसान हुआ था। उस समय भी किसानों ने राजस्व विभाग को सूचना देकर सर्वे की मांग की थी, लेकिन लंबे समय तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा। बाद में किसानों को यह कहकर टाल दिया गया कि फिलहाल तहसीलदार ने सर्वे रोक रखा है।
किसानों का आरोप है कि मुआवजा वितरण से बचने के लिए कई बार राजस्व अमला समय पर सर्वे नहीं करता, जिससे किसानों को राहत नहीं मिल पाती। किसानों का कहना है कि वे किसी प्रकार की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि फसल बीमा और नुकसान की उचित भरपाई चाहते हैं। यदि समय पर सर्वे और राहत नहीं मिलती, तो किसानों का खेती से भरोसा उठने लगता है।
क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंचों से किसान हितैषी बातें करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि संकट के समय किसानों के साथ खड़े दिखाई नहीं देते। किसानों के अनुसार खेती पहले ही मौसम की मार, बढ़ती लागत और बाजार में कम दाम जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में आग, तूफान और प्राकृतिक आपदाएं किसानों की कमर तोड़ देती हैं।
विवेक बड़जात्या ने कहा कि सरकार खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने की बात करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि किसान लगातार दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर प्राकृतिक आपदाओं से फसल बर्बाद होती है, वहीं दूसरी ओर उपज के उचित दाम नहीं मिलते। उन्होंने मांग की कि केले की फसल के लिए मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू की जाए तथा केले का न्यूनतम और अधिकतम समर्थन मूल्य तय किया जाए।
निमाड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर केले का उत्पादन होता है और यहां की गुणवत्ता देशभर में पहचान बना चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि शासन “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत केले को प्राथमिकता देकर निर्यात को बढ़ावा दे, तो क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि आगजनी से प्रभावित किसान को तत्काल राहत राशि प्रदान की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए बिजली लाइनों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए।
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