20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ फिर गूंजेंगी शहनाइयां, दिसंबर में विवाह के लिए 10 शुभ मुहूर्त
अजमेर। धार्मिक और सनातन परंपराओं में विशेष महत्व रखने वाला चातुर्मास 26 जुलाई से शुरू हो गया है। इसके साथ ही विवाह सहित विभिन्न प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर चार माह के लिए विराम लग गया है। अब लोगों को विवाह और अन्य मांगलिक आयोजनों के लिए करीब चार महीने का इंतजार करना होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास की अवधि में भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम करते हैं और इस दौरान विवाह, मुंडन संस्कार, जनेऊ संस्कार सहित अन्य शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी के अनुसार चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है, से मानी जाती है। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के जागृत होने के साथ ही चातुर्मास की अवधि समाप्त होती है और शुभ एवं मांगलिक कार्यों की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त होता है।
शुभ कार्यों पर क्यों लगती है रोक
भारतीय धार्मिक परंपराओं में किसी भी मांगलिक कार्य के लिए शुभ तिथि और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना गया है। विवाह जैसे संस्कारों में देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु शयन मुद्रा में रहते हैं, इसलिए इस अवधि में विवाह सहित अन्य प्रमुख मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान किए गए मांगलिक कार्यों को अपेक्षित शुभ फल नहीं मिलता। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश और अन्य बड़े शुभ आयोजनों को टालने की परंपरा रही है। हालांकि क्षेत्रीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ कार्यों को लेकर अलग-अलग मत भी हो सकते हैं।
मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद चार माह तक सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव के हाथों में रहती है। इस अवधि को धार्मिक साधना, व्रत, तप और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विशेष माना जाता है। चातुर्मास के दौरान श्रद्धालु विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और व्रत करते हैं।
20 नवंबर को देवउठनी एकादशी
चातुर्मास की समाप्ति 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ होगी। इसी दिन भगवान विष्णु के जागृत होने की धार्मिक मान्यता है। देवउठनी एकादशी के बाद विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध होने लगेंगे। इसके साथ ही विवाह समारोहों की तैयारियां भी तेज हो जाएंगी और एक बार फिर शादी-विवाह के आयोजनों में शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी।
ज्योतिषाचार्य श्री सोनी के अनुसार देवोत्थान एकादशी के अगले दिन 21 नवंबर को व्रत का पारण किया जाएगा। इसी तिथि की रात 3 बजकर 41 मिनट पर विवाह नक्षत्र के साथ तुलसी विवाह संपन्न होने की बात भी बताई गई है। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपरा के अनुसार तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के दिन या इसके अगले एक-दो दिनों में भी कराया जा सकता है।
दिसंबर से बजेगी मंगल शहनाई
चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर में विवाह के लिए सीमित अवसर रहेंगे। वैदिक पंचांग के अनुसार नवंबर माह में विवाह के लिए कोई विशेष शुभ दिन उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकांश विवाह आयोजन दिसंबर से शुरू होने की संभावना है। दिसंबर 2026 में विवाह के लिए कुल 10 शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार दिसंबर में 11, 12, 13, 14, 19, 20, 21, 26, 30 और 31 दिसंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इन तिथियों के साथ ही विवाह समारोहों का सिलसिला शुरू होगा और शहरों से लेकर गांवों तक शादी-ब्याह की तैयारियां जोर पकड़ेंगी।
जनवरी 2027 में फिर रहेगी विवाह की धूम
दिसंबर के बाद नए वर्ष 2027 के जनवरी माह में भी विवाह समारोहों की धूम रहने की उम्मीद है। चातुर्मास के कारण लंबे समय तक रुके रहने वाले विवाह आयोजनों के चलते देवउठनी एकादशी के बाद विवाह स्थलों, मैरिज गार्डन, होटल, टेंट व्यवसाय, कैटरिंग, बैंड-बाजा और अन्य संबंधित कारोबार से जुड़े लोगों के कामकाज में तेजी आने की संभावना है।
विवाह सीजन का इंतजार कर रहे परिवार भी अब शुभ मुहूर्त के अनुसार आयोजन की तैयारियों में जुट सकेंगे। हालांकि विवाह की अंतिम तिथि तय करने से पहले संबंधित परिवारों को स्थानीय पंचांग और ज्योतिषाचार्य से मुहूर्त की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अलग-अलग पंचांगों और स्थानों के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

इस तरह 26 जुलाई से शुरू हुए चातुर्मास के कारण चार माह तक विवाह और प्रमुख मांगलिक आयोजनों पर विराम रहेगा। इसके बाद देवउठनी एकादशी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत होगी और दिसंबर 2026 से एक बार फिर विवाह समारोहों का दौर शुरू हो जाएगा।
यह भी पढेंः- 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, चार महीने तक विवाह सहित मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक
