नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा। भारत के प्रमाणित जैविक (ऑर्गेनिक) उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने और किसानों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने 6 से 8 अगस्त 2026 तक बायोफैच इंडिया 2026 का आयोजन ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट (आईईएमएल) में किया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्देश्य भारतीय जैविक उत्पादों को वैश्विक खरीदारों से जोड़ना और देश के ऑर्गेनिक निर्यात को नई गति देना है।
इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी में 200 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया, जिनमें एपीईडीए पवेलियन के तहत 60 से अधिक निर्यातक, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियां (एफपीसी), महिला उद्यमी, स्टार्टअप और जैविक उद्यम शामिल हैं। प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न राज्यों की जैविक कृषि विविधता को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक की जैविक ताकत का प्रदर्शन
एपीईडीए पवेलियन में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, महाराष्ट्र सहित देश के अनेक राज्यों के प्रमाणित जैविक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इनमें जैविक अनाज, दालें, श्रीअन्न (मिलेट्स), मसाले, चाय, कॉफी, ताजे फल एवं सब्जियां, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, शहद, खाद्य तेल, औषधीय पौधे, जड़ी-बूटियां, कोको उत्पाद, न्यूट्रास्युटिकल्स तथा अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद शामिल रहे।
इन उत्पादों ने यह साबित किया कि भारत केवल जैविक उत्पादन में ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और विविधता के मामले में भी विश्व बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
35 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे भारत
भारतीय जैविक उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ाने के लिए एपीईडीए ने 13 प्रमुख देशों के 35 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को आमंत्रित किया। इनमें ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, मंगोलिया और मिस्र सहित कई देशों के आयातक, वितरक, थोक व्यापारी और रिटेल चेन के प्रतिनिधि शामिल रहे।
इन विदेशी खरीदारों ने भारतीय निर्यातकों के साथ बायर-सेलर मीट (बीएसएम) में भाग लेकर संभावित व्यापारिक साझेदारी, नए उत्पादों की खरीद और दीर्घकालिक निर्यात सहयोग पर चर्चा की। इससे भारतीय किसानों और जैविक उद्यमों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने की उम्मीद बढ़ गई है।
किसानों और निर्यातकों को मिली नई जानकारी
प्रदर्शनी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें तकनीकी सम्मेलन, इंटरैक्टिव नॉलेज सेशन, उत्पाद प्रदर्शन और ट्रेंड शोकेस भी आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में प्रतिभागियों को जैविक प्रमाणन, ट्रेसिबिलिटी, गुणवत्ता मानकों, अंतरराष्ट्रीय नियमों, बाजार तक पहुंच, उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और वैश्विक ऑर्गेनिक व्यापार के नए अवसरों की विस्तृत जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि भविष्य में जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ेगी और यदि किसान गुणवत्ता मानकों का पालन करते हैं तो उन्हें बेहतर मूल्य और स्थायी बाजार दोनों मिल सकते हैं।
जैविक निर्यात बढ़ाने पर सरकार का जोर
उद्घाटन समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव श्री कटिकिथला श्रीनिवास ने कहा कि जैविक खेती भारत के कृषि निर्यात को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि बायोफैच इंडिया जैसे मंच भारतीय जैविक उत्पादों को विश्व बाजार तक पहुंचाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री नितिन कुमार यादव ने कहा कि भारत का ऑर्गेनिक सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने गुणवत्ता आश्वासन, बाजार पहुंच और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम में एपीईडीए के अध्यक्ष अभिषेक देव, भारतीय मसाला बोर्ड के सचिव एम.एस. मणिवन्नन, न्यूर्नबर्ग मेसे इंडिया की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सोनिया पराशर, आईएफओएएम-ऑर्गेनिक्स इंटरनेशनल के वाइस प्रेसिडेंट मार्को श्लूटर तथा जर्मनी दूतावास के वरिष्ठ प्रतिनिधि सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
किसानों के लिए बड़ा अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में जैविक खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है और विश्व बाजार में भारतीय ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यदि किसान प्रमाणित जैविक खेती अपनाते हैं, एफपीओ के माध्यम से संगठित होकर उत्पादन और विपणन करते हैं तथा निर्यात मानकों का पालन करते हैं, तो उन्हें घरेलू बाजार की तुलना में बेहतर कीमत और स्थायी आय के अवसर मिल सकते हैं।
बायोफैच इंडिया 2026 केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारतीय जैविक कृषि को वैश्विक पहचान दिलाने का ऐसा मंच बनकर उभरा है, जो किसानों, निर्यातकों और जैविक उद्यमों के लिए नए व्यापारिक अवसरों के साथ भारत को विश्व के अग्रणी ऑर्गेनिक निर्यातक देशों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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