पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की, प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी और प्रभावी कार्रवाई पर जोर
हलधर किसान नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगातार बनी रहने वाली वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ समन्वित और प्रभावी रणनीति बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने एनसीआर के राज्यों द्वारा तैयार की गई व्यापक कार्ययोजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई, जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए नागरिकों, स्थानीय निकायों, उद्योगों, किसानों, निर्माण एजेंसियों और अन्य संबंधित पक्षों को साथ लेकर एक समन्वित अभियान चलाना जरूरी है। उन्होंने राज्यों से कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार की गई योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
25 से अधिक बैठकों के बाद कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 25 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में एनसीआर के विभिन्न नगर निकायों की व्यक्तिगत वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं और निर्धारित लक्ष्यों की समीक्षा की गई।

इन लगातार हुई बैठकों और समीक्षा के बाद राज्यों की व्यक्तिगत कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इन योजनाओं में वायु प्रदूषण के अलग-अलग चिन्हित स्रोतों पर नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर किए जाने वाले विभिन्न कार्यों को शामिल किया गया है।
सरकार का फोकस अब केवल प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसके प्रमुख स्रोतों की पहचान कर पहले से रोकथाम करने पर है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया है।
जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर
बैठक में हितधारक सहभागिता योजना की भी समीक्षा की गई। श्री यादव ने कहा कि आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना वायु प्रदूषण के खिलाफ अभियान को सफल बनाना मुश्किल होगा।
उन्होंने राज्यों द्वारा तैयार की गई सूचना, शिक्षा एवं संचार यानी आईईसी गतिविधियों और व्यवहार परिवर्तन संबंधी अभियानों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को प्रदूषण के कारणों, उसके दुष्प्रभावों और रोकथाम में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करना है।
मंत्री ने राज्यों से कहा कि जो अच्छी पहल किसी एक राज्य या शहर में प्रभावी साबित हो रही है, उसे दूसरे राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने और दोहराने पर विशेष जोर दिया।
कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास विभागों में बेहतर तालमेल
वायु प्रदूषण की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए केंद्र ने कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई है।
श्री भूपेंद्र यादव ने प्रस्ताव दिया कि केंद्रीय कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास मंत्री अपने-अपने राज्य समकक्षों के साथ बैठकें करें और वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए समन्वित रणनीति तैयार करें।
इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को एक दिशा में लाना और प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।
प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी
बैठक में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जहां प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है या प्रदूषण के स्रोत लगातार सामने आते हैं।
ऐसे प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान कर उनके शमन के लिए व्यावहारिक और प्रभावी कार्ययोजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि योजनाओं का क्रियान्वयन नियमित रूप से जांचा जाए और जरूरत के अनुसार सुधार किए जाएं।
प्रदूषणकारी उद्योगों पर ‘जीरो टॉलरेंस’
केंद्रीय मंत्री ने प्रदूषण फैलाने वाली और नियमों का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का स्पष्ट संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि गैर-अनुरूपता वाली प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जानी चाहिए। यानी जो उद्योग निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ बिना ढिलाई के कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने उल्लंघन और लापरवाही के मामलों में जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबदेही और नियमों के पालन को मजबूत बनाने के लिए आवश्यकता पड़ने पर गैर-अनुरूपता वाले हितधारकों के नाम सार्वजनिक करने जैसे कदम भी अपनाए जाने चाहिए।
केवल जागरूकता नहीं, कार्रवाई भी जरूरी
श्री यादव ने स्पष्ट किया कि केवल आईईसी और जागरूकता अभियान चलाने से वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रभावी क्रियान्वयन और सख्त प्रवर्तन भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने राज्यों से कहा कि योजनाओं में निर्धारित लक्ष्यों की नियमित निगरानी की जाए और जहां कमी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
केंद्र सरकार अब इन योजनाओं की प्रगति की भी निगरानी करेगी। मंत्री ने बताया कि विभिन्न राज्यों द्वारा की गई पहलों और कार्रवाई की प्रगति का आकलन करने के लिए सितंबर में केंद्रीय मंत्री स्तर पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
राज्यों को केंद्र के पूर्ण सहयोग का भरोसा
बैठक के दौरान श्री भूपेंद्र यादव ने एनसीआर के राज्यों को भरोसा दिलाया कि वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए भारत सरकार राज्यों के प्रयासों को पूरा सहयोग प्रदान करेगी। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल के साथ प्रदूषण नियंत्रण की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया।
बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष तथा मंत्रालय और सीएक्यूएम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
राज्यों की ओर से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मंत्री एवं सचिवों के साथ-साथ संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अध्यक्ष और सदस्य सचिवों ने भाग लिया। पंजाब के कृषि मंत्री एवं कृषि सचिव तथा पर्यावरण सचिव और राजस्थान के अपर मुख्य सचिव एवं पर्यावरण सचिव भी बैठक में शामिल हुए।
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