किसानों के हित में बड़ा फैसला: किसान आईडी, खाद आपूर्ति और MSP खरीद पर केंद्र सरकार सख्त

Big decision in the interest of farmers Central government strict on farmer ID fertilizer supply and MSP purchase

19 राज्यों में 9.25 करोड़ किसान आईडी तैयार, कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश, 7 अप्रैल से जयपुर में शुरू होगा कृषि सम्मेलन

हलधर किसान दिल्ली l  देश के किसानों के हितों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल समीक्षा बैठक कर किसान आईडी, उर्वरक की उपलब्धता और पीएम-आशा योजना के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की।

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बैठक में सबसे बड़ा फोकस “किसान आईडी” पर रहा। मंत्री ने बताया कि अब तक 19 राज्यों में करीब 9.25 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि अगले 6 महीनों में 100% किसानों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा जाए। किसान आईडी के माध्यम से किसानों की जमीन, फसल, पशुधन और मत्स्य पालन से जुड़ी पूरी जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।

उर्वरक (खाद) की उपलब्धता को लेकर भी सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आई। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों को खाद की कमी किसी भी हालत में नहीं होने दी जाएगी। इसके साथ ही राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए कि खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने टेक्नोलॉजी आधारित वितरण प्रणाली लागू करने पर जोर दिया, ताकि जरूरत के अनुसार किसानों को उर्वरक मिल सके और असंतुलित उपयोग पर भी रोक लगाई जा सके।

सीमा क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने की भी बात कही गई, ताकि उर्वरकों की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। इस दौरान हरियाणा की “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” योजना की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बताया गया।

बैठक में पीएम-आशा योजना के तहत दलहन और तिलहन की MSP पर खरीद की समीक्षा भी की गई। सरकार ने कई राज्यों को विभिन्न फसलों की खरीद की मंजूरी दी है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। मंत्री ने निर्देश दिया कि केवल FAQ (फेयर एवरेज क्वालिटी) की उपज ही खरीदी जाए और किसानों का पंजीकरण आधार आधारित पोर्टलों पर किया जाए।

खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य करने की बात कही गई है। साथ ही, भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किया जाएगा। मंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि खरीद केंद्रों की संख्या पर्याप्त हो, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान पर भी जोर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलना चाहिए और खरीद सीधे किसानों से ही होनी चाहिए, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।

इसके साथ ही सरकार कृषि क्षेत्र में संवाद और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों का आयोजन करने जा रही है। पहला सम्मेलन 7 अप्रैल को Jaipur में आयोजित होगा, जहां पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों के कृषि मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। देश को पांच एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में बांटकर इस तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

वहीं, “विकसित कृषि संकल्प अभियान (VKSA)” को भी इस साल फिर से चलाने की तैयारी है। पिछले साल इस अभियान के तहत 728 जिलों के 60,000 से ज्यादा गांवों में वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधा संवाद किया था। इस बार भी मई महीने में 15 से 20 दिन तक यह अभियान चलाया जाएगा, जिसमें नई तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।

इस अभियान में Indian Council of Agricultural Research और कृषि मंत्रालय की अहम भूमिका रहेगी। मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और गुणवत्तापूर्ण बीजों के प्रति जागरूकता इस अभियान की प्राथमिकता होगी।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि किसानों को उचित मूल्य, पारदर्शी खरीद प्रणाली और प्रभावी वितरण तंत्र उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन किया गया, तो कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।

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