दुकान सील,एफआईआर, लायसेंस निलंबन की कार्रवाई पर उठाए सवाल
अनिश्चितकाल के लिए व्यापार बंद करने को मजबुर न करें विभाग
हलधर किसान इंदौर। प्रदेश के सागर जिले में कृषि विभाग की कार्रवाई इन दिनों सवालों और विवादों में घिर रही है। यहां खाद- बीज कृषि औषधि विक्रेता संघ के बैनर तले व्यापारियों ने विभाग की कार्रवाई के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। विक्रेता संघ ने अपनी विभिन्न मागों को लेकर रैली निकालते हुए कृषि विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में बताया कि कृषि विभाग खाद- बीज विक्रेता को आतंकी की तरह बर्ताव किया जा रहा है। किसी ने यदि शिकायत की तो बिना जांच के दुकानें सील करने के सााथ ही लायसेंस निरस्त किए जा रहे है। हमारी मांग है कि शिकायत मिलने पर जांच की जाए, तथ्य सामने आने पर ही कार्रवाई की जाए, क्योंकि हम कोई निर्माता नही, हम कंपनी का प्रोडक्ट खरीदकर बेचते है। प्रोडक्ट में कमी है तो कंपनी पर कार्रवाई की जाए। व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ दिन पहले सागर के एक व्यापारी के गोदाम में देररात दबिश दी गई, क्या हम आतंकी है? विभाग कार्रवाई कर कह देता है कि कोर्ट जाईये समस्या है तो, हम कोर्ट जाने को भी तैयार है। लेकिन कोर्ट में कई मामले सालों- साल चलते है। ऐसे में कोर्ट के चक्कर कब तक लगाएंगे। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि विभाग की पिछले कुछ दिनों की गई कार्रवाई गैरकानूनी तरीके से की गई, जिस पर कोई रोक नही लगा पा रहा। नतीजतन व्यापारी कानूनी पचड़े में पढऩे के साथ ही किसानों का भरोसा भी खो रहे है।
कृषि आदान विक्रेता संघ ने भी जताई नाराजगी

सागर में व्यापारियो के आक्रोश को कृषि आदान विक्रेता संघ ने समर्थन किया है। प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपूत व सागर के जिला अध्यक्ष राजेश मलैया व सागर जिला कृषि आदान विक्रेता संघ के समस्त पदाधिकारी साथियों ने सदस्यों ने व्यापारियों के हित के लिए उपसंचालक कृषि व जिला कलेक्टर से मुलाकात कर व्यापारियों को होने वाली परेशानियों से अवगत कराया है। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि इसी प्रकार की विभाग के द्वारा कार्रवाई या होती रही, तो एक दिन यह कृषि आदान व्यापार शासन और कृषि मंत्रालय के लिए भी जो है गले की फांस बन सकता है। वर्तमान परिस्थितियों में इतने सालों से जो हम प्राइवेट सेक्टर के कृषि आदान व्यापारी किसानों को कृषि आदान उपलब्ध करा रहे हैं जो उनकी सेवा कर रहे हैं। यह शासन या सरकारी समितियों के द्वारा संभव नहीं है।
हड़ताल को मजबुर न करें सरकार
यदि अभी हम सब एकजुट होकर और अनिश्चितकाल के लिए प्रदेश में हड़ताल कर दें तो शासन की हालत विभाग की हालत मंत्रालय की हालत खराब हो जाएगी। वह किसी भी कीमत पर किसान भाइयों को जो आवश्यकता है, कृषि आदान की चाहे वह बीज, कीटनाशक हो, चाहे खाद हो। किसी कीमत पर वह सप्लाई करने में असमर्थ रहेगी। अभी एक खाद का ही उदाहरण ले लीजिए, जो आपूर्ति पूरी नहीं कर पा रही है। जगह.जगह किसान भाई सड़क पर आंदोलन कर रहे हैं। हम तो सिर्फ किसान भाइयों के हित के लिए अभी राष्ट्रीय संगठन के द्वारा प्रदेश संगठन के द्वारा जिला संगठन के द्वारा इस प्रकार का कोई भी कदम नहीं उठा रहे हैं, क्योंकि वर्तमान स्थिति में किसान भाई परेशान है। बारिश नहीं हो रही है। फसल का क्या होगा यह अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में यदि हम सब कृषि आदान व्यापारी अपना व्यापार अनिश्चितकाल के लिए बंद करके बैठ जाएंगे तो किसान भाइयों का बहुत बड़ा नुकसान होगा।
किसान- व्यापारी का चोली- दामन का साथ
कृषि आदान विक्रेता संघ प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीकृष्णा दुबे ने कहा कि किसान भाइयों का और हम कृषि आदान व्यापारियों का चोली दामन का साथ है। हम उनके हित की बात भी सोचते हैं। इस मामले को गंभीरता से लेकर विचार करें। जिले, प्रदेश एवं केंद्र के विभाग वाले, मंत्रालय वाले कृषि आदान व्यापारियों के ऊपर इस प्रकार की कोई भी अनुचित कार्रवाई न करें। यदि कोई कृषि आदान अमानक पाया जाता है, तो बनाने वाली उत्पादक कंपनी को पार्टी बनाएं, उसके ऊपर कार्रवाई हो। सिर्फ विक्रेता ही निशाने पर रहे यह उचित नहीं है। यदि हमारी उचित मांगों को नहीं माना गया तो हमें आंदोलन का सहारा लेकर अनिश्चितकाल के लिए हमारा व्यापार बंद करके सड़क पर उतरना पड़ेगा।

