बीज कानून पाठशाला:25 “बीज कानून ज्ञान शास्वत सत्य”

beej kanun pathshala

हलधर किसान इंदौर।बीज कृषि का प्रधान आदान है अतः उसका चरित्रवान होना आवश्यक है। कृषि के इस महत्त्वपूर्ण आदान बारे तकनीकि एवं विधिक ज्ञान आवश्यक है। बीज उद्योग में लगे उद्यमी तकनीकि (Technical) तथा विधिक (Legal) ज्ञान अंग्रेजी भाषा में होने के कारण समझने में असहज होते हैं इसलिये उनकी रूचि बीज कानून को अपनाने में कम होती है और उन्हें बीज निरीक्षक तथा बीज अनुज्ञाधिकारी (Licensing Officer) की अनेकों प्रताड़नाओं का शिकार होना पड़ता है।

अन्धेरे में कुछ नहीं दिखाई देता। अंधेरे का अभिप्राय प्रकाश के अभाव में बनने वाली स्थिति से है जो प्रकाश पुंज सम्मुख आते ही तिरोहित हो जाती है। यह अंधेरा तो शास्वत स्वव्यापक सत्य है जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के छोटे-बड़े, चर-अचर पिंडों के बाहर-भीतर,

beej kanun pathshala

1. अन्धेरे में कुछ नहीं दिखाई देता। अंधेरे का अभिप्राय प्रकाश के अभाव में बनने वाली स्थिति से है जो प्रकाश पुंज सम्मुख आते ही तिरोहित हो जाती है। यह अंधेरा तो शास्वत स्वव्यापक सत्य है जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के छोटे-बड़े, चर-अचर पिंडों के बाहर-भीतर,उपर-नीचे, आगे-पीछे, दायें बायें अवस्थित है। इसे सभी मानवकृत प्रकाश पुंजों का समूह भी नष्ट नहीं कर सकता। इस अंधेरे से लड़ना ठीक नहीं। वैसे भी यह अन्धेरा तो विश्राम देकर थकान मिटाता है और कार्य करने में जो उर्जा लगती है उसकी क्षतिपूर्ति करता है।

यहाँ अंधेरे / तमस / अंधकार से मतलब बीज उद्योग में बीज कानूनों के ज्ञान के अंधकार से है। कुछ बीज अधिकारी और बीज व्यापारियों को छोड़ दें. तो अधिकांश बीज व्यवसायीयों का समूह बीज कानूनों से अनभिज्ञ है और बीज निरीक्षकों, बीज लाइसैंससिंग प्राधिकारियों के हर गलत, सही आदेशों को मान लेने के अलावा उनके पास अन्य कोई चारा भी नहीं है। लगभग 50 वर्षों से अधिक समय से बीज व्यापार करने वाले व्यापारियों को भी बीज अधिनियम बारे किंचित जानकारी नहीं। इसका एक कारण तो यह है कि ज्यादातर बीज कानून अंग्रेभी भाषा में हैं। कुछ के मन मस्तिष्क में यह धारणा घर कर गई है कि समुन्द्र में रह कर मगरमच्छ से बैर नहीं लिया जा सकता यानि कृषि विभाग से लड़ कर व्यापार नहीं चलाया जा सकता। बीज कानूनों का ज्ञान का मतलब किसी से लड़ना नहीं बल्कि बीज उद्यमियों को उनके अधिकारों से अवगत करवाना है। वास्तविकता यह है कि ऐसे व्यापारी बीज कानूनों की पालना करने में अक्षम हैं और वे कृषि अधिकारियों से अपना एक हक नहीं मांग सकते क्योंकि वे अन्य 99 मामलों में नियम की पालना करने में सक्षम नहीं हैं। यही वह व्यापारी हैं जो गाहे-वगाहे चिल्लाते रहते हैं कि बीज उद्योग में व्याभीचार बढ़ गया है। बीज कानूनों के प्रति अवहेलना का कारण यह भी है कि आज धन कमाने की लालसा में सॉर्टकट रास्ते की टोह रहती है। बीज उद्योग में नवागंतुक 50 या ज्यादा सालों से बीज व्यवसाय करने वालों से आगे निकलना चाहते हैं और कानूनों को दर किनार कर सकरी गली से गुजर कर धनाढय होना चाहते हैं। ऐसी हालत में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिये बीज कानूनी ज्ञान ही शास्वत सत्य है।

कुछ व्यक्ति ही बीज कानून जानते हैं लेकिन उनके पास बीज कानूनों का लाभ लेने का साहस नहीं है। कहावत है कि “साहसी व्यक्ति के हाथ ही तलवार होती है बुजदिल की हिफाजत तो मिसाइल भी नहीं कर पाती है। इसी तरह कहा गया है कि “Shining swords can never win the war” चमचमाती तलवार से युद्ध नहीं जीते जाते तलवारों को रक्त रंजित करना पड़ता है। कुछ ही बीज व्यापारी हैं जो बीज कानून जानते हैं या जानने की इच्छा है और उसके द्वारा कृषि अधिकारियों के उचित अनचित आदेशों से अपने व्यवसाय को बचा पाते है। 

मैंने भारत सरकार की 35 वर्ष सेवा का अनुभव लेकर पिछले 23 वर्षों से बीज उद्योग को 4 पुस्तकें “बीज उद्योग एवं बीज निरीक्षक’, ‘बीज उद्योग एवं बीज नियामक”, “बीज कानून मन्त्र’ तथा ‘लेबल बीज उत्पादन के सिद्धान्त” दी। साथ ही समय-2 पर तत्कालिक समस्याओं पर लेख लिख कर व्यापारियों का पक्ष रखा और समाधान सुझाया परन्तु बीज उद्योग ने इन कानूनों को जानने में विशेष रूचि नहीं दिखाई। कुछ ने इन ज्ञानवापी पुस्तकों को खरीदा परन्तु उनका अध्ययन नहीं किया। कोरोना काल में अध्ययन के लिए सुझाया नाकामी मिली। रूचि हो तो सब कार्य सम्भव होते हैं। बीज कानून अंग्रेजी भाषा में होने का बहाना भी नहीं रहा क्योंकि इन पुस्तकों में मूल धाराएं आंग्ल (English) भाषा में फिर हिन्दी भाषा में रूपान्तरण। इसके अलावा टीका द्वारा समझाया गया है परन्तु इरादे नेक हों तो कुछ भी असम्भव नहीं।

बीज कानूनों का ज्ञान बीज उत्पादक, बीज विक्रेता तथा बीज निरीक्षक के मध्य उपजे विवादों के निराकरण की चाबी (Key) है। बीज कानूनों के बारे ज्ञान रखना भार नहीं बल्कि यह समझने का सुअवसर है कि हम बीज उद्योग में कानून की दृष्टि से कहाँ खड़े हैं। बीज विज्ञान और बीज कानून का समिश्रण बीज के व्यवसाय को अट्टालिका पर ले जा सकता है परन्तु कानून और विज्ञान को जानने की जिज्ञासा चाहिए।

मैं मानता हूँ कि जब तक बीज व्यवसायी नुकसान से उस ज्ञान की कीमत न चुका दे तब तक उस ज्ञान का महत्त्व नहीं समझ पाते हैं। मुफ्त में मिले ज्ञान को बीज व्यापारी गम्भीरता से नहीं लेते हैं। मेरा हमेशा प्रयास रहा कि मैं बीज कानून रूपी ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच दूँ जिससे बीज उद्योग को कृषि विभाग के कोप का भाजन न बनना पड़े परन्तु यथोचित परिणाम नहीं मिले। हरियाणा कानून बदलने और राजस्थान में कृषि मन्त्री के भ्रमण स ‘उपजी समस्याऐं बार-बार आयेंगी।

सच्ची बात, सीधी बात, बेधड़क बात, निडर बात कहने की राह आसान नहीं। सच की बात कड़वी लगती है, आलोचनाएं होती हैं, स्वार्थ इंगित किया जाता है परन्तु मेरा नैतिक कर्त्तव्य बनता है कि बेधड़क हो कर कह सकूं कि मात्र कृषि अधिकारियों का ही दोष बता कर पल्ला झाड़ने से कार्य नहीं चलेगा बल्कि बीज उद्यमियों को भी सुधरना पड़ेगा। बीज उद्योग में और ज्यादा कठिनाईयाँ आयेंगी अतः आपको बीज कानूनों को समझना और आवश्यक होगा। अन्यथा आर्थिक तथा प्रतिष्ठा की हानि उठानी होगी।

अतः मेरा निवेदन है कि आपको जहाँ से हिन्दी-अंग्रेजी या अन्य भाषा में बीज कानून पुस्तक मिले अध्ययन करो और कानूनी रूप से अपने आप को संबल बनाएं। आसानी से कानून समझने के लिये नीचे दी गई पुस्तकों का अध्ययन करें।

आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति “कला निकेतन”, ई-70, विथिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)

उक्त जानकारी संकलन सहयोगी- 

वेद नारंग-बालाजी एग्रीकल्चर स्टोर बीज विक्रेता-हिसार।

संकलन सहयोगी-

कृषि आडकन विक्रेता संघ राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलन्त्री

राष्ट्रीय सचिव प्रवीण भाई पटेल 

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल

 राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रदेश सचिव संजय रघुवंशी 

प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपूत 

प्रदेश संगठन मंत्री विनोद जैन 

प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा दुबे …

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