कलेक्टर भव्या मित्तल की पहल से किसानों को मिलेगी राहत, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
हलधर किसान खरगोन। जिले में नरवाई जलाने की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और फसल अवशेष प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर भव्या मित्तल ने हार्वेस्टर ऑपरेटर्स एवं गौशाला संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नरवाई जलाने की घटनाओं, उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान तथा किसानों को उपलब्ध वैकल्पिक तकनीकों की विस्तार से समीक्षा की गई।
कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नरवाई जलाना न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसे रोकने के लिए प्रशासन द्वारा ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि गांव-गांव बैठकों का आयोजन कर किसानों को नरवाई न जलाने के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाए तथा वैकल्पिक यंत्रों और तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि नरवाई जलाने के बजाय एसएमएस (स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम), रीपर कम बाइंडर एवं स्ट्रा रीपर (भूसा कटाई यंत्र) का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से पहले निर्मित हार्वेस्टर का उपयोग नहीं किया जाएगा, ताकि आधुनिक तकनीक के माध्यम से अवशेष प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
किसानों के लिए राहत की खबर देते हुए कलेक्टर ने बताया कि स्ट्रा रीपर (भूसा कटाई यंत्र) पर शासन द्वारा 50 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों को भूसा आसानी से प्राप्त होगा, जो गौशालाओं एवं पशुपालन के लिए उपयोगी साबित होगा। साथ ही नरवाई जलाने की आवश्यकता भी समाप्त होगी।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा रीपर ले जाना अनिवार्य होगा। हार्वेस्टर ऑपरेटर्स को सख्त हिदायत दी गई कि जब भी उनका हार्वेस्टर किसी किसान के खेत में जाएगा, वह बिना एसएमएस या स्ट्रा रीपर के नहीं जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित ऑपरेटर के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से किसानों के साथ हार्वेस्टर ऑपरेटर्स का टाई-अप कराया जाए, ताकि हार्वेस्टिंग के समय किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इससे छोटे एवं मध्यम किसानों को भी आधुनिक यंत्रों का लाभ मिल सकेगा।
कलेक्टर ने केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि मक्का एवं गन्ना जैसी फसलों में भी इन यंत्रों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि फसल अवशेषों का सही ढंग से प्रबंधन किया जाए तो मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, उत्पादन लागत घटती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
बैठक में उपसंचालक कृषि शिव सिंह राजपूत, सहायक यंत्री कृषि मनीष मिश्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कलेक्टर को जिले में उपलब्ध यंत्रों, सब्सिडी की स्थिति एवं किसानों के रुझान की जानकारी दी।
अंत में कलेक्टर भव्या मित्तल ने कहा कि प्रशासन, किसान, हार्वेस्टर ऑपरेटर और गौशाला संचालक—सभी के सहयोग से ही नरवाई जलाने की समस्या का स्थायी समाधान संभव है। उन्होंने सभी पक्षों से जिम्मेदारीपूर्वक नियमों का पालन करने और जिले को नरवाई मुक्त बनाने में योगदान देने की अपील की।
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