हलधर किसान इंदौर। 19 मार्च 1963 में भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र में केन्द्रीय स्तर पर सर्वप्रथम बीज उत्पादन, प्रमाणीकरण विपणन की एक सुसंगठित संस्था नेशनल सीड्स कारपोरेशन की स्थापना की। इसके 1382 दिन बाद 30.12.1966 को बीज अधिनियम की रचना की जिसका उद्देश्य बीज की गुणवत्ता कायम रखना था। इस अधिनियम में कोई मिसब्रांड तथा नकली बीज (Spurious Seed) की परिभाषा नहीं थी मात्र मानक या अमानक बीज का उल्लेख था। आजकल सोशल मीडिया पर लोग चटखारे लेकर बीज व्यापारियों की अपकृति फैलाने में नकली बीज / मिसब्रांड बीज का उल्लेख करते हैं। कृषि अधिकारी भी कीटनाशी अधिनियम 1968 या उर्वरक नियन्त्रण आदेश
1. Misbranded Seed (कटनामी बीज) :- 1985 के आधार पर बीज में भी मिसब्रांड (Misbrand) (कूटनामी) बीज का उल्लेख करते हैं। बीज अधिनियम 1966 में दण्ड / शास्ती सजा कम होने के कारण अधिनियम बिना दान्त का शेर रह गया है। बूढ़े शेर को गीदड़ भी गुर्राने लगते हैं क्योंकि उन्हें बूढ़े शेर की क्षमता का अन्दाजा हो गया है अतः हमारा बीज अधिनियम 1966 प्रभावहीन होने के कारण बिना दान्त के बूढ़े शेर के समान रह गया। अतः व्यापारियों में इसके प्रति कोई भय नहीं रहा। कुछ राज्य सरकारों ने जैसे महाराष्ट्र-हरियाणा और अब पंजाब ने बीज अधिनियम-1966 की शास्ती (Punishment) धारा-19 में अनाधिकृत होते हुए संशोधन करने का असफल प्रयास किये हैं। इन राज्य सरकारों द्वारा संशोधन की प्रक्रिया अपनाने में केन्द्रीय कृषि मन्त्री के संज्ञान में आया है कि अब सीड बिल-2019 को पास किया जाए। इस सीड बिल में Misbrand बीज की निम्न परिभाषा दी है:-
2.अन्य कोई बीज जो अन्य किसी किस्म के विकल्प के रूप में या अन्य किसी किस्म से मिलती जुलती हो और जिस नाम से वह बैची जा रही है वह स्पष्टतया तथा शुद्ध रूप में लेबल न की गई हो।
टीका :- किसी शासकीय संस्था की या किसी निजी कम्पनी की लोक प्रिय किस्म का रातोंरात नाम बदल कर प्रस्तुत किस्म का बीज कूटनामी बीज कहलायेगा।
3. अन्य देश या प्रदेश की किस्म बता कर बीज वितरण करना कूटनामी बीज कहलायेगा।
टीका :- विक्रय की जा रही किस्म को बाहरी देशों, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, ताईवान या अन्य प्रदेशों की किस्म कह कर बेचना कूटनामी (Misbrand) बीज कहलायेगा।
किसी अन्य किस्म को अपना नाम देकर विक्रय करना।
टीका :- किस्म का ऐसा नाम रखकर बेचना जो किसी दूसरी कम्पनी ने पहले ही नाम दे रखा हो। किसने पहले नाम दिया इस विवाद को तय करने के लिये ट्रेड मार्क किसने पहले कराया इसके प्रमाण देने होंगे या भारत सरकार में पादप प्रजाति संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम-2001 के अधीन कौन पहले पंजीकृत हुआ उसका दावा (Claim) सच्चा माना जायेगा।
4. किस्म के लेबल पर अंकित कर या अन्य प्रकार से झूठा दावा किया गया हो।
टीका किस्म के पैकेजिंग पर अधिकमि उत्पादन जैसे आजकल DWR. सीरीज की गेहूँ की किस्मों में अधिकतम उपज क्षमता बढ़ा-चढ़ा कर बता कर ठगी कर रहे हैं या रोग रोधिता कीट से मुक्ति आदि गलत सूचना पाई गई तो बीज कूटनामी माना जायेगा।
5. बीज के प्रत्येक नग पर पैकेजिंग के अन्दर कई प्रकार के बीज रखे हैं तो बाहर की पैकेजिंग पर प्रत्येक बीज की सूचनाएं नहीं लिखी हैं तो वह बीज कूटनामी है।
टीका :- बी.टी. कपास के पैकेट के अन्दर नॉन बी.टी. का पैकेट भी रखा
जाता है अतः उसके बाहरी पैकेट पर बी.टी. तथा नॉन बी.टी. के मानक अंकित किये जाते हैं। ऐसा न होने पर वह कूटनामी बीज माना जायेगा। नेशनल सीड्स कारपोरेशन, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सब्जियों के किटस वितरित करती है उसमें जितने भी प्रकार के बीज हैं उनका विवरण एवं मानक लेबल पर होने चाहिए अन्यथा बीज कूटनामी माना जायेगा।
6. बीज के पात्र (Container) या उस पर लगे लेबल पर बीज की गुणवत्ता के बारे झूठी बातें लिखी हैं या भ्रामक बातें लिखी हैं ऐसा बीज मिब्रांड कहलायेगा।
टीका :- बीज के पात्र या लेबल पर लिखना कि बीज की शिकायत आने पर केवल बीज के मूल्य तक की गारन्टी है, किस्म के बारे बढ़ा-चढ़ा कर विशेषताएं लिखना भ्रामक सूचनाएं हैं, अतः बीज कूटनामी है।
7. किस्म इस अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं।
टीका :- बीज अधिनियम 1966 में केवल उन किस्मों का उत्पादन प्रमाणीकरण होता था जो अधिसूचित किस्में थी परन्तु गैर अधिसूचित किस्मों का केवल लेबल बीज, टी. एल. बीज ही बनता था परन्तु अब नोटीफिकेशन/अधिसूचना का स्थान पंजीकरण ने ले लिया और किस्मों का 100% पंजीकरण आवश्यक है हालांकि लेबल सीड (T.L.) पंजीकृत किस्मों का भी बनेगा परन्तु अब बाजार में Brand नाम से बिकने वाली किस्म भारत सरकार या राज्य सरकार जैसा हो पंजीकृत होना आवश्यक अन्यथा बीज कूटनामी है।
8. लेबल पर वास्तविक रजिस्ट्रेशन नम्बर के अतिरिक्त अन्य नम्बर होना।
टीका :- भारत सरकार द्वारा प्रत्येक किस्म पंजीकृत की जायेगी। प्रत्येक किस्म को एक पंजीकरण नम्बर दिया जायेगा जो भारत सरकार द्वारा बनाए गये रजिस्टर में अंकित होगा। अतः प्रत्येक लेबल पर सही पंजीकरण नम्बर डाला हो अन्यथा बीज Misbrand कूटनामी कहलायेगा।
9. यदि लेबल पर ऐसी आवश्यक चेतावनी नहीं लिखी होगी जिनका लिखना मानव, पशु, एवं पादप स्वास्थ्य के लिये आवश्यक हो।
टीका :- यदि उत्पादक ने बीज उपचारित किया है और रसायन मरक्यूरियल पदार्थ है तो ऐसे बीज के पैकेट के प्रत्येक लेबल पर सूचना
“Do not use for Food, Feed & Oil Purposes” तथा POISION (लाल रंग में) लिखा होना आवश्यक है अन्यथा बीज कूटनामी माना जायेगा।
10. बीज पात्र पर या उसके लेबल पर डीलर के रूप में किसी काल्पनिक व्यक्ति या काल्पनिक कम्पनी का नाम अंकित होना।
टीका :- बीज के कट्टे, थैले, बोरे या पैकेट पर अथवा उस पर लगे लेबल पर विक्रेता के रूप में किसी फर्जी व्यक्ति, फर्जी कम्पनी का नाम अंकित होगा तो वह बीज कूटनामी बीज (Misbrand Seed) होगा।
11. बीज इस अधिनियम तथा इसके तहत बने नियमों के अनुसार लेबल नहीं किया गया हो।
टीका :- वर्तमान में लागू बीज अधिनियम के अनुसार विधिवत बीज की लेबलिंग करने की 4 अधिसूचनाएं भारत सरकार ने जारी की हुई हैं उनके अनुसार बीज के पैकेजिंग की लैबलिंग नहीं होती है। नये अधिनियम के अनुसार विधिवत लेबलिंग की पालना न होने पर बीज कूटनामी (Misbrand) कहलायेगा।
श्री कृष्णा दुबे की प्रतिक्रिया

हमारे* *देश* *के* *प्रदेश* *के* *जिले* *के समस्त कृषि आदान व्यापारी साथियों और बीज उत्पादक कंपनियां व बीज विक्रेता साथियों एवं हमारे किसान भाइयों अभी कुछ समय से या यू कहूंगा कि पिछले दो माह से हमारे देश के जो जिम्मेदार लोग हैं जैसे के केंद्रीय कृषि मंत्री और कृषि विभाग से संबंधित उच्च अधिकारी आप सभी के द्वारा कितनी ही बार बीज को बदनाम किया गया है नकली शब्द से संबोधित करके मैं पूछना चाहता हूं कि नकली की परिभाषा क्या है नकली उसे कहा जाता है जो वास्तविक जो भी वस्तु है ठीक हु बहू उसी से मिलता जुलता मिट्टी का रबड़ का लोहे का या अन्य किसी पदार्थ से बनाया हुआ वह वस्तु है तो उसको नकली कहा जाएगा यह बीज व्यवसाय में पिछले दो माह से जिम्मेदार हमारे केंद्रीय मंत्री महोदय नकली बीज नकली बीज कर करके जो है हमारे* *बीज व्यवसाय को कृषि आदान व्यवसाय को बदनाम कर रहे हैं आप उसको अमानक कह सकते हैं कि वह उसकी गुणवत्ता के अनुसार अंकुरण में जो उसका प्रतिशत है उसको पूरा नहीं कर पा रहा है तो वह अमानक हो गया नकली तो नहीं बोल सकते इस प्रकार की बातें बार-बार जो है व्हाट्सएप पर ग्रुप पर मीटिंगों में कर करके हमारे कृषि आदान व्यापार को बीज के व्यापार को बदनाम किया जा रहा है मेरा उन सभी जिम्मेदार सज्जनों से केंद्रीय कृषि मंत्री महोदय से कृषि विभाग के अधिकारियों से निवेदन है कि कृपया यह बीजों के साथ नकली शब्द का प्रयोग न करें हमारे सभी कृषि या दान व्यापारी भाइयों को इसका विरोध करना चाहिए धन्यवाद l
श्री कृष्णा दुबे अध्यक्ष जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिला इंदौर*

1. ‘कला आर०बी० सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति निकेतन, ई-70, विधिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)
2. डॉ० आर०पी० भारद्वाज, पूर्व प्रिंसीपल कपास वैज्ञानिक, स्वामी केश्वानन्द कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर, राजस्थान, दूरभाष सम्पर्क 94145-00218
