हलधर किसान नई दिल्ली। देश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्रधानमंत्री Narendra Modi 13 मार्च को असम के Guwahati में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) की 22वीं किस्त जारी करेंगे। इस किस्त के तहत देशभर के लगभग 9.32 करोड़ किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से कुल ₹18,640 करोड़ की राशि सीधे भेजी जाएगी।
यह जानकारी केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों की आय बढ़ाने और खेती में निवेश को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण पहल है।
श्री चौहान ने बताया कि योजना की शुरुआत से अब तक किसानों को लगभग ₹4.09 लाख करोड़ से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है। इस योजना का लाभ देश के करोड़ों किसानों तक पहुंचा है, जिनमें 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों से यह सामने आया है कि इस प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता से किसानों की खेती में निवेश क्षमता बढ़ी है और साहूकारों पर उनकी निर्भरता कम हुई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि विकास और किसान कल्याण के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, कृषि उत्पादन में वृद्धि करना और कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
कृषि क्षेत्र में बढ़ी उत्पादन क्षमता
पत्रकारों से चर्चा के दौरान श्री चौहान ने बताया कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि कभी अनाज की कमी झेलने वाला भारत आज वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन में मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। सरकार की नीतियों और किसानों की मेहनत के कारण देश ने कृषि क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि भारत आज लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है और इस मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। वहीं कुल खाद्यान्न उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014 में जहां देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 252 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है।
बागवानी क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। फल और सब्जियों का उत्पादन 277 मिलियन टन से बढ़कर लगभग 369 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इसके साथ ही दाल उत्पादन में भी देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत आज दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश बन चुका है। सरकार द्वारा तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की रिकॉर्ड खरीदी भी की जा रही है।
किसानों के लिए नई तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म
श्री चौहान ने बताया कि किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने “भारत विस्तार” (Bharat Vistar) नामक एक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का पहला चरण शुरू किया है। इसके माध्यम से किसान केवल एक फोन कॉल के जरिए अपनी स्थानीय भाषा में खेती से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसमें फसल प्रबंधन, मौसम, बीज, उर्वरक और बाजार से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ दिलाने के लिए गेहूं, धान, कपास, तिलहन और दलहन की रिकॉर्ड खरीदी की है। साथ ही किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।
कृषि वित्त और बीमा में भी सुधार
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कृषि ऋण की सीमा में भी बड़ा विस्तार किया गया है। वर्ष 2014 में जहां कृषि ऋण लगभग ₹8.45 लाख करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर ₹28.69 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के खातों में अब तक लगभग ₹2 लाख करोड़ की क्लेम राशि जमा की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
श्री चौहान ने यह भी बताया कि कृषि क्षेत्र के बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जहां यूपीए सरकार के समय कृषि बजट लगभग ₹27 हजार करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर सालाना ₹1.40 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगातार नए कदम उठा रही है और आने वाले समय में भी किसानों को मजबूत बनाने की दिशा में यह प्रयास जारी रहेंगे।
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