बीज निरीक्षकों की अधिकार सीमा जानें – बीज कानून पाठशाला – 38

Know the scope of authority of seed inspectors

हलधर किसान । बीज गुणवत्ता नियंत्रण और बीज व्यापार से जुड़े मामलों में बीज निरीक्षकों तथा बीज लाइसेंसिंग प्राधिकारियों की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हाल ही में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त भारत सरकार के एक स्पष्टीकरण ने इस विषय पर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। इसमें कहा गया है कि बीज निरीक्षक और बीज लाइसेंसिंग प्राधिकारी अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर न तो कार्रवाई कर सकते हैं और न ही सीधे बीज कंपनियों से पत्राचार या व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उन्हें बुला सकते हैं।

बीज अधिनियम, 1966 की धारा-13 के अनुसार प्रत्येक राज्य सरकार बीज कानूनों के पालन के लिए बीज निरीक्षकों की अधिसूचना जारी करती है। केवल वही अधिकारी बीज निरीक्षक के रूप में कार्य कर सकता है जिसे विधिवत अधिसूचित किया गया हो। किसी अधिकारी को केवल प्रशासनिक आदेश से बीज निरीक्षक का अतिरिक्त प्रभार देने मात्र से उसे यह अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।

हरियाणा सरकार ने समय-समय पर बीज निरीक्षकों की अधिसूचनाएं जारी की हैं। नवीनतम अधिसूचना 23 अगस्त 2021 के अनुसार उप निदेशक कृषि, उप मंडल कृषि अधिकारी, गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक तथा विषय वस्तु विशेषज्ञ सहित कई अधिकारियों को बीज निरीक्षक की शक्तियां प्रदान की गई हैं। हालांकि बीज अधिनियम के अंतर्गत ये अधिकारी केवल अधिसूचित किस्मों पर ही कार्रवाई कर सकते हैं, जबकि बीज नियंत्रण आदेश, 1983 के तहत अधिसूचित बीज निरीक्षक अधिसूचित एवं गैर-अधिसूचित दोनों प्रकार की किस्मों के संबंध में कार्रवाई करने के लिए अधिकृत होते हैं।

इसी प्रकार बीज नियंत्रण आदेश, 1983 की धारा-11 के अनुसार प्रत्येक राज्य सरकार बीज लाइसेंसिंग प्राधिकारी नियुक्त करती है। हरियाणा में 6 दिसंबर 2016 से उप निदेशक कृषि को ही बीज लाइसेंसिंग प्राधिकारी के रूप में अधिसूचित किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक अधिसूचना में संबंधित अधिकारी का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाता है। कुछ अधिकारियों को पूरे राज्य में अधिकार प्राप्त होते हैं, जबकि कई अधिकारियों का अधिकार केवल जिला, उप मंडल अथवा निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहता है। ऐसे अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर ही बीज का नमूना ले सकते हैं, निरीक्षण कर सकते हैं, छापेमारी कर सकते हैं अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि किसी बीज लॉट में गुणवत्ता संबंधी कमी या अन्य त्रुटि सामने आती है तो संबंधित अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित बीज उत्पादक कंपनी से सीधे पत्राचार नहीं कर सकते। उदाहरण के तौर पर यदि सिरसा जिले का कोई अधिकारी किसी बीज लॉट की जांच कर रहा है तो वह हिसार स्थित बीज उत्पादक कंपनी को सीधे नोटिस या पत्र जारी नहीं कर सकता।

ऐसी स्थिति में बीज नियंत्रण आदेश, 1983 की धारा-13(1)(a) स्पष्ट व्यवस्था प्रदान करती है। इसके अनुसार आवश्यक जानकारी संबंधित क्षेत्र के अधिकृत बीज विक्रेता के माध्यम से प्राप्त की जानी चाहिए। अर्थात अधिकारी को उसी विक्रेता से अभिलेख, बिल, स्टॉक विवरण अथवा अन्य आवश्यक जानकारी लेनी होगी, जिसके यहां से बीज का नमूना लिया गया है।

कई मामलों में यह शिकायत सामने आती रही है कि कुछ अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित बीज कंपनियों को व्यक्तिगत सुनवाई के नाम पर अपने कार्यालय बुलाते हैं। कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि ऐसा किया जाता है तो यह वैधानिक प्रावधानों की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष न्यायालय के समक्ष अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का सहारा ले सकता है।

इस पूरे विषय पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत भारत सरकार से जानकारी मांगी गई थी। प्राप्त उत्तर में भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि बीज अधिनियम, 1966, बीज नियम, 1968 तथा बीज नियंत्रण आदेश, 1983 के अंतर्गत बीज निरीक्षक और बीज लाइसेंसिंग प्राधिकारी अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं कर सकते। आवश्यक सूचनाएं उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अधिकृत बीज विक्रेताओं से ही प्राप्त करनी चाहिए। साथ ही अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित बीज कंपनियों से सीधे पत्राचार करना अथवा उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना उचित नहीं माना गया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्पष्टीकरण से बीज कंपनियों, बीज विक्रेताओं और कृषि अधिकारियों के बीच अधिकारों एवं जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता आएगी। साथ ही बीज गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विधिसम्मत तरीके से संचालित हो सकेगी।

बीज व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सभी बीज विक्रेताओं और बीज उत्पादक कंपनियों को अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में वे कानून के अनुसार अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रख सकें।

कृषि आदान व्यापारियों और बीज कंपनियों से श्री कृष्णा दुबे की अपील

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श्री कृष्णा दुबे ने कहा कि कई बार देखा गया है कि कुछ बीज निरीक्षक अधिनियम एवं नियमों की पूरी जानकारी के अभाव में या अपनी व्यक्तिगत व्याख्या के आधार पर ऐसे प्रकरण बना देते हैं, जिनसे कृषि आदान व्यापारी और बीज उत्पादक कंपनियां अनावश्यक रूप से परेशान होती हैं। ऐसे मामलों में घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी व्यापारी या कंपनी को यह महसूस होता है कि उसके साथ कानून के विपरीत कार्रवाई की गई है, तो वह न्यायालय के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

उन्होंने प्रदेश के सभी कृषि आदान व्यापारियों एवं बीज उत्पादक कंपनियों से अपील करते हुए कहा कि अपने वैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी अनुचित कार्रवाई के सामने झुकने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाएं। यदि किसी अधिकारी द्वारा बिना अधिकार या नियमों के विपरीत कार्रवाई की जाती है तो उसकी जानकारी तत्काल संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को दें, ताकि आवश्यक मार्गदर्शन एवं कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

अंत में श्री दुबे ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अधिकारियों तथा व्यापारियों दोनों को निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए। अधिकारों की जानकारी और विधिक प्रक्रिया का पालन ही अनावश्यक विवादों से बचने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी कृषि आदान व्यापारियों से संगठित रहकर अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।

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”बीज निरीक्षक की अधिनायक वादी प्रवृति“ आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स
कारपोरेशन लि॰ (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति – ”कला निकेतन“, ई-70, विथिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625

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