हलधर किसान खरगोन। किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्राम छोटी कसरावद में बायो रिसर्च सेंटर की शुरुआत की गई। कलेक्टर भव्या मित्तल ने सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) योजना के अंतर्गत किसान महेंद्र मंडलोई के खेत पर स्थापित इस बायो रिसर्च सेंटर का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उन्होंने केंद्र का अवलोकन कर यहां संचालित गतिविधियों की जानकारी ली और इसे किसानों के लिए उपयोगी पहल बताया।
कलेक्टर ने कहा कि आज के समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में जैविक और प्राकृतिक खेती की पद्धतियां किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही हैं। जैविक उत्पादों के उपयोग से न केवल खेती की लागत कम की जा सकती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बायो रिसर्च सेंटर किसानों को नई तकनीकों और जैविक उत्पादों के निर्माण की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
निरीक्षण के दौरान किसानों को खेत पर स्थापित विभिन्न इकाइयों की जानकारी भी दी गई। इनमें एडवांस जीवामृत यूनिट, बायोपेस्टिसाइड यूनिट और बायोटॉनिक यूनिट प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन इकाइयों के माध्यम से किसानों को बताया गया कि वे अपने खेतों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर किस प्रकार जैविक खाद और कीटनाशक तैयार कर सकते हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी तथा खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकेगी।
विशेषज्ञों ने किसानों को एडवांस जीवामृत बनाने की विधि, इसके उपयोग और इससे होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जीवामृत का उपयोग मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने में मदद करता है, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है। इसी तरह बायोपेस्टिसाइड यूनिट में प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए जाने वाले जैविक कीटनाशकों के बारे में बताया गया, जो फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने में प्रभावी होते हैं।
किसानों को बायोटॉनिक यूनिट के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से फसलों की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले जैविक घोल तैयार किए जाते हैं। इनका उपयोग करने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि यदि किसान जैविक खेती को अपनाते हैं तो उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। आज के समय में उपभोक्ताओं के बीच जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में किसान यदि जैविक पद्धति से खेती करते हैं तो उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ मिल सकता है।
कलेक्टर भव्या मित्तल ने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्राकृतिक खेती की विधियों को भी अपनाएं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से मिट्टी की सेहत सुधरती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कृषि संसाधन सुरक्षित बने रहते हैं।
इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी, स्थानीय किसान और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। किसानों ने बायो रिसर्च सेंटर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे उन्हें खेती में नई जानकारी और तकनीक सीखने का अवसर मिलेगा।
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