कृषि आदान विक्रेता संघ ने किसानों और व्यापारियों को किया सतर्क
हलधर किसान न्यूज | ऑनलाइन माध्यम से कृषि आदानों की खरीद को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हरियाणा के सिरसा जिले में एक किसान द्वारा ऑनलाइन खरीदे गए कीटनाशक की गुणवत्ता जांच में कथित रूप से भारी अनियमितता सामने आने के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है। किसान की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस घटना के बाद कृषि आदान विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने किसानों और कृषि आदान व्यापारियों से अपील की है कि वे बिना सत्यापन वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कृषि आदानों की खरीद से बचें।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिरसा के एक किसान ने गुजरात स्थित एक कंपनी से ऑनलाइन माध्यम से क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत, सल्फर 90 प्रतिशत तथा मोनोक्रोटोफॉस और डीडीवीपी (नुवान) जैसे कीटनाशक मंगवाए थे। किसान को उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने के बाद उसने कृषि विभाग में शिकायत दर्ज कराई। विभाग द्वारा कराई गई जांच में क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत उत्पाद में सक्रिय तत्व शून्य प्रतिशत (0%) पाए जाने का दावा किया गया। इसके बाद किसान ने संबंधित कंपनी के विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई।


इस मामले में एक और गंभीर पहलू यह भी सामने आया कि मोनोक्रोटोफॉस और डीडीवीपी (नुवान) जैसे उत्पादों की बिक्री पर विभिन्न सरकारी निर्देशों के तहत प्रतिबंध या कड़े नियामकीय प्रावधान लागू हैं। इसके बावजूद ऐसे उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह न केवल कानून का उल्लंघन होगा बल्कि किसानों की फसल, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
घटना के बाद कृषि आदान विक्रेता संघ, भोपाल के प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी ने कहा कि संगठन लंबे समय से किसानों और व्यापारियों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कृषि आदानों की खरीद-फरोख्त में सावधानी बरतने की सलाह देता रहा है। उनका कहना है कि बिना सत्यापित स्रोतों से खरीदे गए उत्पादों में नकली या घटिया सामग्री मिलने की आशंका बनी रहती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संगठन का कहना है कि पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन कृषि आदान व्यापार से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं। कई मामलों में किसानों के साथ-साथ अधिकृत कृषि आदान विक्रेताओं को भी नुकसान हुआ है। नकली अथवा मानक से कम गुणवत्ता वाले उत्पाद बाजार में आने से किसानों का भरोसा प्रभावित होता है और अधिकृत व्यापारियों की छवि भी खराब होती है।
मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से किसानों और व्यापारियों से अपील की है कि कृषि आदानों की खरीद केवल अधिकृत और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही करें। संगठन ने यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिबंधित या संदिग्ध कृषि रसायनों की बिक्री की जानकारी मिलती है तो उसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दी जानी चाहिए।
संगठन के अनुसार प्रदेश के कुछ जिलों से प्रतिबंधित कीटनाशकों की कथित अवैध बिक्री की शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं। इनमें फोरेट 10जी, डीडीवीपी (नुवान) तथा अन्य प्रतिबंधित उत्पादों का उल्लेख किया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई लाइसेंसधारी कृषि आदान व्यापारी ऐसे उत्पादों की बिक्री करते हुए पाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं की होगी और संगठन ऐसे मामलों में किसी प्रकार का संरक्षण या सहयोग नहीं देगा।

इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मान सिंह राजपूत, प्रदेश सचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा दुबे, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजेश मलैया, प्रकाश जैन तथा सदस्यता अभियान प्रभारी विनोद जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने किसानों और व्यापारियों से जागरूक रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कृषि आदानों की खरीद के समय बिल अवश्य लें, उत्पाद का बैच नंबर, निर्माण तिथि, निर्माता का नाम तथा लाइसेंस संबंधी जानकारी जांचें और किसी भी प्रकार की शंका होने पर तुरंत कृषि विभाग से संपर्क करें।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि नकली या अमानक कीटनाशकों का उपयोग फसलों की सुरक्षा के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। इससे उत्पादन घटने के साथ-साथ किसानों को आर्थिक हानि होती है। इसलिए केवल पंजीकृत कंपनियों और अधिकृत विक्रेताओं से ही कृषि आदानों की खरीद करना सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
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