Headlines

कसरावद के कृषक सुरेंद्र पाटीदार बने ‘ऊर्जादाता’, 2 मेगावाट सौर संयंत्र से हर माह लाखों की सुरक्षित आय

Kasrawad farmer Surendra Patidar becomes Urjadaata secures monthly income of lakhs from 2 MW solar plant

हलधर किसान खरगोन | खरगोन जिले के कसरावद क्षेत्र से एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है, जहां एक किसान ने परंपरागत खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन का मार्ग अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। कसरावद निवासी कृषक सुरेंद्र पाटीदार ने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत 2 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर खुद को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ के रूप में स्थापित किया है।

36317523 09dc 4ef0 b2f6 39b4143284f7

राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में आगे बढ़ाते हुए किसानों को अक्षय ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पाटीदार ने योजना के घटक-ए के अंतर्गत आवेदन कर ऊर्जा विकास निगम के माध्यम से अपने 6 एकड़ खेत में सौर संयंत्र स्थापित कराया। इस संयंत्र से प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन की क्षमता है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 11 हजार यूनिट तथा प्रतिमाह 3 से 3.5 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

इस परियोजना के लिए पाटीदार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 6.65 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जबकि शेष राशि की व्यवस्था उन्होंने स्वयं की। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के साथ 25 वर्षों के लिए 3.25 रुपये प्रति यूनिट की दर से विद्युत खरीद अनुबंध हुआ है। इस दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) ने उन्हें स्थिर और सुरक्षित आय का भरोसा दिया है।

वर्तमान में संयंत्र से 10 से 11 लाख रुपये प्रतिमाह की बिलिंग हो रही है। ऋण की किश्त, रखरखाव और अन्य खर्चों को घटाने के बाद भी उन्हें लगभग 3 लाख रुपये प्रतिमाह का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। यह आय मौसम की अनिश्चितताओं से परे एक स्थायी आर्थिक आधार प्रदान कर रही है।

71d157c3 76b5 4900 87f1 049fb8dffc22

सौर संयंत्र के डिजाइन, खरीद और निर्माण का कार्य इंदौर की ईपीसी कंपनी SolarSure द्वारा किया गया। कंपनी के सीईओ भावेश पाटीदार के अनुसार, पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत खरगोन जिले में सुरेंद्र पाटीदार के संयंत्र सहित एक दर्जन अन्य परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। पूरे प्रदेश में लगभग 300 मेगावाट क्षमता के 130 से अधिक प्रोजेक्ट उनकी देखरेख में प्रगति पर हैं।

सुरेंद्र पाटीदार बताते हैं कि सौर संयंत्र का रखरखाव अपेक्षाकृत सरल है। पैनलों के नीचे उगी घास-फूस की नियमित सफाई और समय-समय पर पैनलों की धुलाई ही मुख्य कार्य है, जिसमें किसी विशेष कुशल श्रमिक की आवश्यकता नहीं होती। इससे संचालन लागत सीमित रहती है।

उन्होंने साझा किया कि पिछले वर्ष इसी खेत में टमाटर की खेती की थी, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा। अब वे अप्रैल-मई में सौर पैनलों के नीचे अदरक की खेती की योजना बना रहे हैं, जिससे भूमि का दोहरा उपयोग संभव हो सकेगा।

पीएम कुसुम योजना के घटक-ए के तहत किसान, सहकारी समितियां, पंचायतें और कृषक उत्पादक संगठन (FPO) बंजर, परती या कृषि योग्य भूमि पर 2 मेगावाट तक की क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुरूप बैंक किसानों को इस योजना के लिए सरल शर्तों पर ऋण उपलब्ध करा रहे हैं।

कसरावद के सुरेंद्र पाटीदार का यह प्रयास न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। बदलते कृषि परिदृश्य में जब पारंपरिक खेती जोखिमों से घिरी है, तब अक्षय ऊर्जा उत्पादन किसानों को आय का स्थायी और सुरक्षित विकल्प प्रदान कर रहा है। सच मायनों में, अब किसान केवल अन्न ही नहीं, ऊर्जा भी पैदा कर रहे हैं—और यही है समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश की दिशा में एक सशक्त कदम।

यह भी पढेंः- किसान हमारे वीआईपी’: संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए युवाओं से सीधे सुझाव मांग रही सरकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *