रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में 365 विद्यार्थियों को उपाधि, 15 को स्वर्ण पदक
हलधर किसान झांसी। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती पर स्थित रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “भारत माता की जय” और “झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की जय” के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने 365 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान कीं तथा 15 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया।

अपने उद्बोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “दीक्षांत समारोह जीवन का अंत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के नए अध्याय का प्रारंभ है।” उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और संस्कार के बल पर देश और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त कर रहा है और अब युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए सत्यनिष्ठा, समर्पण और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प का संदेश दिया। उनका कहना था कि प्रत्येक विद्यार्थी में असीम क्षमता है, आवश्यकता केवल स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर प्रयास की है।
खाद्य सुरक्षा से पोषणयुक्त भारत तक
केंद्रीय मंत्री ने देश की खाद्य सुरक्षा में कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है। अब समय उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता और पोषण पर ध्यान देने का है। उन्होंने ‘पोषणयुक्त भारत’ की अवधारणा को साकार करने के लिए वैज्ञानिकों और युवाओं को आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने जानकारी दी कि सरकार उर्वरक सब्सिडी को पारदर्शी बनाने के लिए सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में राशि हस्तांतरित करने की दिशा में कार्य कर रही है। अब तक 8.5 करोड़ किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है और 12 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। “भारत विस्तार प्लेटफॉर्म” के माध्यम से किसानों को फसल संबंधी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है।
बुंदेलखंड बनेगा दलहन क्रांति का केंद्र
श्री चौहान ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती दलहन क्रांति का केंद्र बन सकती है। भारत को ‘फूड बास्केट’ बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब वैज्ञानिक प्रयोगशाला से खेत तक ज्ञान पहुंचाएं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत संकल्प का उल्लेख करते हुए बताया कि वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं और सभी से अपने जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा लगाने का आग्रह किया।
समारोह में विशिष्ट अतिथि डॉ. एम.एल. जाट, महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं सचिव, डेयर ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व की संस्था बताते हुए कहा कि यह संस्थान प्रतिदिन नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने झांसी को क्रांति की धरती बताते हुए तिलहन और दलहन की नई कृषि क्रांति का सूत्रपात यहीं से होने की बात कही।
डॉ. जाट ने विकसित भारत के निर्माण में बौद्धिक संपदा, नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि अनुसंधान का लाभ अंतिम पंक्ति के किसान तक पहुंचे तथा जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर केंद्रित शोध को प्राथमिकता दी जाए। विद्यार्थियों को कृषि को उद्यमिता और स्टार्ट-अप के रूप में अपनाने की सलाह भी दी गई।
विश्वविद्यालय की प्रगति
कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में मात्र 5 विद्यार्थियों से प्रारंभ हुआ यह संस्थान आज 1100 विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है, जिनमें छात्राओं की संख्या उल्लेखनीय है। झांसी परिसर के अलावा दतिया में मात्स्यिकी महाविद्यालय तथा पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं और शीघ्र ही मुरैना (मध्य प्रदेश) में उद्यानिकी महाविद्यालय प्रारंभ होगा।
उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित पॉलीहाउस, हाई-टेक नर्सरी, समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, कठिया गेहूं, सरसों एवं चना प्रक्षेत्र और फसल कैफेटेरिया जैसे नवाचारों की जानकारी दी। विश्वविद्यालय को ‘हरित परिसर’ बनाने का संकल्प भी दोहराया गया।
365 उपाधियाँ, 15 स्वर्ण पदक
समारोह में 235 स्नातक, 127 परास्नातक और 3 पीएचडी सहित कुल 365 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। 15 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदेमातरम् से हुआ, एनसीसी कैडेट्स ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और मुख्य अतिथि ने परिसर में पौधरोपण किया। कृषि विज्ञान मंडप सहित विभिन्न भवनों का लोकार्पण भी किया गया। दीक्षांत समारोह ने यह संदेश दिया कि कृषि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सशक्त नींव है।
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