उज्जैन, प्रतिनिधि। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले कृषि आदान व्यापार जगत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से होने वाले कृषि उत्पादों के कारोबार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। देश की कई प्रमुख कीटनाशक एवं कृषि उत्पाद निर्माता कंपनियों द्वारा कुछ ऑनलाइन व्यापारिक संस्थाओं के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद प्रदेश के कृषि आदान व्यापारियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी ने व्यापारियों को जारी सूचना में बताया कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कृषि उत्पादों की बिक्री और वितरण को लेकर निर्माता कंपनियों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इनमें ई-फसल, ग्रामोफोन, अग्रिम, एग्रो ऑर्बिट हब तथा बॉक्स एग्री सॉल्यूशंस जैसे नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार कुछ कंपनियों ने इन संस्थाओं के विरुद्ध कानूनी नोटिस जारी किए हैं तथा उनके प्रिंसिपल सर्टिफिकेट (पीसी) को लेकर भी आपत्ति जताई है।
संघ का कहना है कि कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 10(4) के तहत किसी भी कीटनाशक उत्पाद के वैध व्यापार के लिए संबंधित कंपनी द्वारा जारी प्रिंसिपल सर्टिफिकेट आवश्यक होता है। इस दस्तावेज में कंपनी द्वारा अधिकृत वितरक या डिस्ट्रीब्यूटर का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है और उसी चैनल के माध्यम से जारी बिल को मान्यता प्राप्त होती है। यदि कोई व्यापारी ऐसे स्रोत से माल खरीदता है जिसे कंपनी ने अधिकृत नहीं किया है, तो निरीक्षण अथवा जांच की स्थिति में उसे कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार केवल इंसेक्टिसाइड इंडिया लिमिटेड (आईआईएल) ही नहीं, बल्कि सिंजेंटा इंडिया लिमिटेड, यूपीएल, स्वाल तथा यारा जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा भी संबंधित मामलों को लेकर कृषि विभाग के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। कंपनियों का पक्ष है कि जिन संस्थाओं को उन्होंने अधिकृत नहीं किया है, उनके माध्यम से होने वाला व्यापार नियमानुसार स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
इसी परिप्रेक्ष्य में कृषि आदान विक्रेता संघ ने प्रदेशभर के व्यापारियों से अपील की है कि वे खरीफ सीजन के दौरान विशेष सावधानी बरतें और केवल उन्हीं वितरकों से कृषि आदान सामग्री खरीदें, जिनके नाम कंपनी द्वारा जारी प्रिंसिपल सर्टिफिकेट में दर्ज हों। संगठन का मानना है कि वैध दस्तावेजों के अभाव में किया गया व्यापार भविष्य में लाइसेंस संबंधी विवादों का कारण बन सकता है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि किसी व्यापारी के अभिलेखों में ऐसे स्रोतों से खरीद के दस्तावेज पाए जाते हैं, जिनकी वैधता पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है, तो विभागीय स्तर पर जांच की जा सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यापारी को अपने लेन-देन की वैधता सिद्ध करनी होगी। इसलिए सभी व्यवसायियों को खरीद प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच और सत्यापन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
प्रदेश संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी ऑनलाइन माध्यम से कृषि उत्पादों की बिक्री के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि पारंपरिक वितरण व्यवस्था के बाहर होने वाला व्यापार स्थानीय विक्रेताओं के लिए प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है। साथ ही, यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता, वैधता अथवा स्रोत को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो उसकी जवाबदेही तय करना भी कठिन हो सकता है।
संगठन के अनुसार कुछ क्षेत्रों से ऐसी सूचनाएं भी प्राप्त हुई हैं कि किसानों को आकर्षक छूट और विशेष ऑफरों का प्रलोभन देकर कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, फिर भी व्यापारिक संगठन ने इस विषय पर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले उत्पादों की खरीद केवल अधिकृत एवं प्रमाणित स्रोतों से ही की जानी चाहिए।
प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी विशेष कंपनी, प्लेटफॉर्म या व्यापारिक संस्था के पक्ष अथवा विपक्ष में प्रचार करना नहीं है, बल्कि व्यापारियों को वर्तमान कानूनी प्रावधानों और नियामकीय व्यवस्था की जानकारी देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक नियमों में कोई संशोधन नहीं होता, तब तक वैध प्रिंसिपल सर्टिफिकेट और अधिकृत आपूर्ति श्रृंखला का पालन करना सभी लाइसेंसधारी व्यापारियों के हित में रहेगा।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मानसिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे, सदस्यता अभियान प्रभारी श्री विनोद जैन, जॉइंट सेक्रेटरी श्री राजेश मलैया सहित प्रदेश के समस्त पदाधिकारियों ने ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से हो रहे कृषि आदान व्यापार पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

पदाधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से कृषि आदान का व्यापार प्रदेश के अधिकृत कृषि आदान विक्रेताओं के हितों के विपरीत है। साथ ही, ऐसे माध्यमों से होने वाले व्यापार पर संबंधित विभागों की विशेष निगरानी रहती है, जिससे व्यापार संचालन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
संगठन को प्राप्त जानकारी के अनुसार हरदा जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ ऑनलाइन कंपनियों के प्रतिनिधि किसानों को 15 से 20 प्रतिशत तक के डिस्काउंट का लालच देकर कृषि आदान सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसी स्थिति में सामग्री की वैधता, गुणवत्ता एवं नियमों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
अतः संगठन प्रदेश के सभी कृषि आदान व्यापारियों से अपील करता है कि यदि कोई व्यापारी ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से व्यापार कर रहा है, तो वह तत्काल इसे बंद करने पर विचार करे। यह कदम व्यापारियों और किसानों दोनों के हित में होगा।
संगठन यह भी स्पष्ट करता है कि इस चेतावनी के बावजूद यदि कोई व्यापारी ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से व्यापार जारी रखता है और भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक, कानूनी अथवा व्यावसायिक समस्या का सामना करता है, तो उसमें संगठन की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी तथा संगठन ऐसी स्थिति में सहायता प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं होगा।
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