अल नीनो की चुनौती से निपटने को केंद्र सरकार तैयार

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किसानों को नहीं होगी परेशानी: शिवराज सिंह चौहान

हलधर किसान नई दिल्ली संभावित अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, वैज्ञानिक संस्थानों और मौसम विभाग के विशेषज्ञों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर किसानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य से काफी देर से आगे बढ़ रहा है और अब तक वर्षा में लगभग 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में भी बारिश कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने पहले से ही वैज्ञानिक रणनीति और जमीनी तैयारी शुरू कर दी है।

315 जिलों पर विशेष नजर

कृषि मंत्रालय और वैज्ञानिक संस्थानों ने देश के 315 ऐसे जिलों की पहचान की है जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा अधिक है। इनमें 111 जिले उच्च प्राथमिकता, 76 जिले मध्यम प्राथमिकता और 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में रखे गए हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित 12 राज्यों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

जिला आकस्मिकता योजनाएं होंगी लागू

कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (DACP) तैयार की गई है। इन योजनाओं में कम बारिश की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, फसल परिवर्तन, जल प्रबंधन और किसानों की आय सुरक्षित रखने के उपाय शामिल हैं। केंद्र ने राज्यों और जिला प्रशासन को इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने की तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं।

जल संरक्षण पर विशेष जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कमजोर मानसून की स्थिति में पानी की हर बूंद महत्वपूर्ण होगी। तालाब, खेत-तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नालों और जलाशयों के संरक्षण एवं मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। मनरेगा और ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से जल संचयन क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा

सरकार ने किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली तथा कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। साथ ही मिश्रित खेती और फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि जोखिम कम हो सके।

बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए बीजों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज भी सुरक्षित रखे गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर पुनर्बुवाई कराई जा सके। यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक बताई गई है।

किसानों तक पहुंचेगी वैज्ञानिक सलाह

देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और कृषि मौसम सलाह इकाइयों को किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को बुवाई, फसल चयन और मौसम संबंधी वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।

पशुधन और चारे की भी तैयारी

कमजोर मानसून से चारे की संभावित कमी को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। जिन क्षेत्रों में चारे की उपलब्धता अधिक है, वहां से जरूरतमंद क्षेत्रों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।

पीएमएफबीवाई, केसीसी और पीएम-किसान बनेंगे सहारा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की वित्तीय सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और पीएम-किसान सम्मान निधि महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। प्रभावित क्षेत्रों में फसल बीमा का दायरा बढ़ाने और नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।

हर सप्ताह होगी समीक्षा

दिल्ली में अल नीनो मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप का गठन किया गया है, जो मानसून, फसलों और कृषि गतिविधियों की लगातार निगरानी करेंगे। राज्यों को भी कंट्रोल रूम स्थापित करने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों से अपील

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर इस चुनौती का सामना करेंगे। जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अल नीनो के संभावित प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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