कृषि के समग्र विकास के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण जरूरी : शिवराज सिंह चौहान

Whole of government approach essential for the holistic development of agriculture

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र के व्यापक विकास, किसानों की आय में वृद्धि और विकसित भारत के निर्माण के उद्देश्य से कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित “भारत की कृषि का रूपांतरण – अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन” में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सभी मंत्रालयों, राज्यों और संबंधित संस्थाओं को मिलकर ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ और ‘होल वैल्यू चेन’ दृष्टिकोण अपनाना होगा।

image002U5LG

सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों तथा वर्चुअल माध्यम से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह भी वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में कृषि क्षेत्र के रूपांतरण, किसानों की समृद्धि और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सरकार के पास योजनाओं की कमी नहीं है, बल्कि चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो और किसानों तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित न रहे, बल्कि प्राप्त सुझावों को ठोस कार्ययोजना में बदलकर धरातल पर उतारा जाए।

image001KDEY

उन्होंने बताया कि कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है। इसके लिए राज्यों के कृषि रोडमैप को मजबूत किया जाएगा तथा फसल कटाई के बाद के प्रबंधन, भंडारण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। फल एवं सब्जियों के शीघ्र खराब होने से किसानों को होने वाले नुकसान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प’ अभियान के तहत बिहार की प्रसिद्ध लीची जैसी फसलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

तकनीक के महत्व पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डिजिटल पहलें जैसे एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी कृषि क्षेत्र में परिवर्तन लाने की क्षमता रखती हैं, लेकिन इनके सफल क्रियान्वयन के लिए भूमि रिकॉर्ड और लैंड पार्सल से उनका पूर्ण एकीकरण आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग करते समय मानवीय दृष्टिकोण और किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखना अनिवार्य है।

पूर्वोत्तर भारत की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि इस क्षेत्र की जलवायु अदरक, हल्दी, कंद फसलों और विशिष्ट मिर्चों के उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर जल्द ही पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ क्षेत्रवार विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।

सम्मेलन के दौरान प्राप्त सुझावों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्रीय मंत्री ने उन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित करने का निर्देश दिया। पहली श्रेणी शॉर्ट टर्म की होगी, जिसमें ऐसे सुझाव शामिल होंगे जिन्हें मौजूदा प्रक्रियाओं में छोटे बदलाव कर तत्काल लागू किया जा सकता है। दूसरी श्रेणी मीडियम टर्म की होगी, जिसमें वर्तमान योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से जुड़े सुझाव शामिल किए जाएंगे। तीसरी श्रेणी लॉन्ग टर्म की होगी, जिसके अंतर्गत नई नीतियों और दीर्घकालिक सुधारों की आवश्यकता वाले प्रस्ताव रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों की निगरानी के लिए एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो प्रत्येक माह प्रगति की समीक्षा करेगी।

श्री चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने चावल, गेहूं और मत्स्य उत्पादन जैसे क्षेत्रों में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। उन्होंने आगामी वर्षों में जल संकट और अल नीनो जैसी चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि प्रधानमंत्री का मंत्र “आपदा को अवसर में बदल दो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से देश इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकता है।

अंत में केंद्रीय मंत्री ने सभी संबंधित पक्षों का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र के परिवर्तन और किसानों की समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास, निरंतर नवाचार और मजबूत क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सभी हितधारक मिलकर कार्य करें तो विकसित भारत के लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है।

यह भी पढेंः- उज्जैन में कृषि आदान व्यापारियों का महाकुंभ: ऑनलाइन अवैध कारोबार पर सख्त चेतावनी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *