नई किस्मों, टॉप–वर्किंग, फ्रूट कवर और बेहतर बाजार व्यवस्था से बागवानी सुधार पर जोर : शिवराज सिंह चौहान
हलधर किसान नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की लगातार गिरती आय और मंडियों में फसल के दाम टूटने की समस्या को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीर पहल शुरू की है। किसानों की शिकायतों के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट में तोतापुरी आम की खेती से लेकर प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समिति की रिपोर्ट केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए नीति, तकनीक और बाजार—तीनों स्तरों पर ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं।
बैठक की अध्यक्षता श्री शिवराज सिंह चौहान ने की। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समिति के अध्यक्ष एवं ICAR–CISH (केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ) के निदेशक डॉ. दामोदरन टी. ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।

यह विशेषज्ञ समिति 2 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत गठित की गई थी। इसमें ICAR–CISH, ICAR–IIHR (भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु), डॉ. वाईएसआर उद्यानिकी विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के विशेषज्ञों तथा राज्य उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया था। समिति ने 8 से 10 जुलाई के दौरान आंध्र प्रदेश के तिरुपति और चित्तूर जिलों का दौरा किया। इस दौरान किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), मंडी प्रतिनिधियों, पल्प निर्माण इकाइयों, निर्यातकों और जिला प्रशासन से बातचीत कर तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला का जमीनी स्तर पर अध्ययन किया गया।
कीमतों में गिरावट के सामने आए प्रमुख कारण
समिति की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण रहे। इनमें प्रोसेसिंग क्षमता और खरीद व्यवस्था के बीच समय पर समन्वय का अभाव, सीजन की शुरुआत में प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा पर्याप्त खरीद नहीं कर पाना, घरेलू बाजार में आम आधारित पेय पदार्थों में वास्तविक आम के गूदे की कम मात्रा तथा वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं।
कई क्षेत्रों में किसानों की फसल एक साथ मंडियों और पल्प बनाने वाली इकाइयों तक पहुंचने के कारण आपूर्ति बढ़ गई, लेकिन खरीद व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने से दाम अचानक नीचे आ गए। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ा।
आम आधारित पेय पदार्थों में वास्तविक गूदे की मात्रा बढ़ाने का सुझाव
समिति ने आम आधारित पेय पदार्थों में 22 से 25 प्रतिशत तक वास्तविक प्राकृतिक आम के गूदे की अनिवार्यता का सुझाव दिया है। समिति का मानना है कि यदि निर्धारित मात्रा से अधिक आम का गूदा इस्तेमाल करने वाले पेय पदार्थों को 5 प्रतिशत की रियायती GST श्रेणी में रखा जाए और कम गूदे वाले उत्पादों पर अधिक GST लागू हो, तो आम के गूदे की खपत बढ़ सकती है। इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलने के साथ उपभोक्ताओं को भी अधिक पौष्टिक और वास्तविक फल आधारित पेय उपलब्ध होंगे।
इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने FSSAI, GST परिषद, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि खाद्य मानकों और कर व्यवस्था पर आवश्यक सहमति बनाई जा सके।

मूल्य स्थिरीकरण के लिए बनेगा केंद्रीय समन्वय तंत्र
तोतापुरी आम की मूल्य श्रृंखला को स्थिर और व्यवस्थित करने के लिए समिति ने केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति गठित करने की सिफारिश की है। यह तंत्र आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों के लिए सर्वोच्च संस्थागत व्यवस्था के रूप में काम करेगा।
यह समिति हर वर्ष आम सीजन से पहले उत्पादन का अनुमान, प्रोसेसिंग और निर्यात की मांग, उत्पादन लागत तथा बाजार की स्थिति की समीक्षा करेगी। इसके आधार पर किसानों के लिए संकेतात्मक लाभकारी फार्म-गेट खरीद मूल्य और मैंगो पल्प के संदर्भ मूल्य तय करने में मदद मिलेगी।
पुराने बागों का होगा कायाकल्प
समिति ने पाया कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों में तोतापुरी आम के कई बाग पुराने हो चुके हैं। इससे उनकी उत्पादकता और फलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके समाधान के लिए टॉप–वर्किंग तकनीक अपनाने की सिफारिश की गई है।
इस तकनीक के तहत मौजूदा पेड़ों पर नीलम, अल्फांसो, हिम्मायत, बंगनपल्ली जैसी उच्च मूल्य वाली आम की किस्मों की कलमें लगाई जाएंगी। इससे दो से तीन वर्षों में किसानों को अधिक मूल्य वाली फसल प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही क्लस्टर स्तर पर गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (GAP) लागू करने, किसानों को प्रशिक्षण देने और प्रदर्शन उद्यान विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट कवर का सुझाव
फल की गुणवत्ता सुधारने और प्रीमियम बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए शुरुआती चरण में चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों के लगभग 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट कवर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है। इससे फलों की बाहरी गुणवत्ता बेहतर होगी, कीटों से होने वाली क्षति कम होगी और किसानों को उच्च मूल्य वाले बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा क्षेत्रीय खरीद और प्रारंभिक प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की गई है। इसके तहत उद्यानिकी विभाग, प्रसंस्करण उद्योग और FPO मिलकर हर वर्ष खरीद योजना तैयार करेंगे। आंध्र प्रदेश सरकार को पंजीकृत प्रसंस्करण इकाइयों के लिए हर वर्ष 15 मई से खरीद और पल्प निर्माण शुरू करने संबंधी SOP जारी करने की अनुशंसा भी की गई है।
बीज से भी बढ़ेगी किसानों की आमदनी
बैठक में किसान नेतृत्व वाली प्रोसेसिंग इकाइयों और FPO आधारित मूल्य संवर्धन मॉडल पर भी चर्चा हुई। ICAR–CISH और IIHR द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से आम के बीज के अंदर के हिस्से यानी सीड कर्नेल से मैंगो बटर और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया। इससे आम के बीज और अन्य उप-उत्पाद भी किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को किसान-केंद्रित बनाना चाहती है। केंद्र और राज्य सरकारें, ICAR, APEDA, FPO और प्रसंस्करण उद्योग मिलकर जिम्मेदारी साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि समिति द्वारा सुझाए गए उपायों को समग्र रूप से लागू किया जाता है, तो आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादकों की आय में स्थायी वृद्धि हो सकती है और भारतीय आम को वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान मिल सकती है।
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