कृषि विपणन को मजबूत करने पर सरकार का जोर, ई-नाम से 1.89 करोड़ किसान जुड़े

Government focuses on strengthening agricultural marketing

हलधर किसान नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों को उनकी उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। कृषि विपणन राज्य का विषय है, लेकिन भारत सरकार नीतिगत उपायों और विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से राज्यों को कृषि बाजारों के सुदृढ़ीकरण, बेहतर बुनियादी ढांचे और किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने में सहायता प्रदान कर रही है। सरकार का जोर किसानों को पारदर्शी बाजार व्यवस्था, बेहतर मूल्य निर्धारण, भंडारण, प्रसंस्करण और आधुनिक कृषि विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि विपणन को लेकर सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वास्तविक कृषि उपज विपणन समितियों यानी एपीएमसी को वर्चुअल रूप से एकीकृत करते हुए राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) की शुरुआत की है। ई-नाम एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच है, जो किसानों को पारदर्शी ऑनलाइन बोली और बेहतर मूल्य निर्धारण की सुविधा उपलब्ध कराता है।

30 जून 2026 तक ई-नाम पर 1.89 करोड़ किसान और 2.78 लाख व्यापारी पंजीकृत हो चुके हैं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को देशभर के बड़े खरीदार समूह तक पहुंच मिलती है। साथ ही, देश के विभिन्न हिस्सों के खरीदार ऑनलाइन बोली में भाग ले सकते हैं, जिससे अंतर-राज्यीय व्यापार को भी बढ़ावा मिला है। ई-नाम पर अंतर-राज्यीय व्यापार वर्ष 2018-19 में 563 मीट्रिक टन, जिसकी कीमत 37 लाख रुपये थी, से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 2,984.3 मीट्रिक टन और 14.28 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, संचयी रूप से 83.95 करोड़ रुपये मूल्य का 28,566 मीट्रिक टन अंतर-राज्यीय व्यापार दर्ज किया गया है। प्रति लॉट व्यापारियों की औसत बोली भी वर्ष 2016-17 के 2.1 से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 2.8 हो गई है, जो बाजार में खरीदारों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत है।

सरकार किसानों को संगठित कर उनकी सामूहिक सौदेबाजी क्षमता बढ़ाने के लिए 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन एवं संवर्धन की केंद्रीय क्षेत्र योजना भी लागू कर रही है। इस योजना के तहत देशभर में 10,000 एफपीओ पंजीकृत किए जा चुके हैं। एफपीओ किसानों की उपज को एकत्रित कर उन्हें बड़े पैमाने पर बाजार में बेचने में मदद करते हैं। इससे किसानों को इकोनॉमीज ऑफ स्केल का लाभ मिलता है और उनकी मोलभाव करने की क्षमता मजबूत होती है। वर्ष 2020 में योजना शुरू होने के बाद से एफपीओ का कुल संचयी कारोबार 20,340 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों को बेहतर बाजार सुविधा देने के लिए कृषि विपणन इन्फ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) योजना के तहत भी बड़े पैमाने पर काम किया गया है। पिछले दस वर्षों में 369.18 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाली 12,353 भंडारण इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं तथा 6,901 गैर-भंडारण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

इसी तरह एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) के तहत 18,893 गोदामों, 3,110 कोल्ड स्टोर और कोल्ड चेन परियोजनाओं तथा 2,105 एकीकृत प्राथमिक एवं द्वितीयक प्रसंस्करण इकाइयों को ब्याज अनुदान सहायता प्रदान की गई है। वहीं, समेकित बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के अंतर्गत पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रीजिरेटेड वैन, राइपनिंग चैंबर, प्री-कूलिंग और प्रसंस्करण इकाइयों सहित लगभग 1.76 लाख बुनियादी ढांचा इकाइयां विकसित की गई हैं।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य पोस्ट-हार्वेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं का विकास करना है। 30 जून 2026 तक इस योजना के तहत 1,256 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या संचालित हैं, जिनसे लगभग 37.76 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।

इसके अलावा, सहकारिता मंत्रालय द्वारा पैक्स यानी प्राथमिक कृषि साख समितियों के स्तर पर दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज के भंडारण की सुविधा देना है, ताकि वे मजबूरन कम कीमत पर बिक्री करने से बच सकें और बेहतर बाजार मूल्य मिलने तक अपनी फसल सुरक्षित रख सकें। अब तक 313 पैक्स में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इससे 1.80 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है।

नीति आयोग ने वर्ष 2020 और 2025 की अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट में समेकित कृषि विपणन योजना (आईएसएएम) को कृषि विपणन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, योजना ने बेहतर बाजार इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रतिस्पर्धी बाजार, एफपीओ आधारित कृषि उपज एकत्रीकरण, मूल्यवर्धन और पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं के विकास को बढ़ावा दिया है। मूल्यांकन में यह भी सामने आया कि 60 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने आईएसएएम के तहत पोस्ट-हार्वेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और फसल प्रसंस्करण सुविधाओं के उपयोग की जानकारी दी।

सरकार के अनुसार, कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय और उत्पादन बढ़ाने के लिए ऋण, बीमा, आय सहायता, सिंचाई, बीज, कृषि मशीनीकरण, डिजिटल कृषि, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, किसान समूह, फसल खरीद और अन्य क्षेत्रों में भी केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं राज्यों के प्रयासों को सहयोग प्रदान कर रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।

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