हलधर किसान नई दिल्ली। रबी सीजन की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार के बीज और कृषि रक्षा रसायनों की बिक्री के लिए साथी पोर्टल की अनिवार्यता की गई है। इस नई व्यवस्था का विरोध भी शुरु हो गया है।
ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलन्त्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मानसिंह राजपूत ने कृषि मंत्रालय पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराई है। नई दिल्ली कृषि मंत्रालय पहुंचे पदाधिकारियों ने एडिशनल कमिश्नर आनंद कुमार प्रभाकर से मुलाकात कर एप्प से होने वाली समस्याओं के साथ ही एप्प की विसंगतियां बताते हुए इस कृषि व्यापारियों ने पर थोपने वाला निर्णय करार दिया है। अध्यक्ष श्री कलंत्री ने बताया कि एप्प में बैच नंबर एवं लाट नंबर को चढ़ाना की व्यवस्था है, जो व्यापारी के लिए उपलब्ध कराना असंभव है। एप्प संचालन का कोई प्रशिक्षण भी नही दिया गया है। कमिशनर श्री प्रभाकर ने ऑल इंडिया संगठन को आश्वासन दिया है कि साथी एप किसी भी डीलर पर जबरन नहीं थोपा जाएगा। इसमें सुधार कर हल निकाला जाएगा। इस बारे में ऑल इंडिया संगठन के पदाधिकारियों के साथ फिर से बैठक की जाएगी।
महाराष्ट्र अध्यक्ष विनोद तराळ, महासचिव विपिन कासलीवाल एवं उत्तर प्रदेश के संघटन के अध्यक्ष अतुल त्रिपाठी लगातार प्रदेश के डीलरो को आश्वस्त कर रहे है की, आपको एप के परिचालन के लिए पूरी जानकारी दी जायेगी और उसके बाद इसे लागू किया जायेगा।
महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश के व्यापारियों के नाराजगी को देखते हुए उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही नागपुर एवं लखनऊ में प्रदेश संगठन के व्यापारियों के साथ बैठक करके इसके बारे में गंभीरता पूर्वक विचार विमर्श करने के बाद ही इसको लागू किया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा भविष्य में लागू किए जाने वाले साथी ऐप को जबरन नहीं थोपा जाएगा। यह आश्वासन हमें केंद्र सरकार की ओर से मिला है। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय रघुवंशी ने बताया कि राष्ट्रीय संघटन लगातार एप्प की विसंगतियां दूर करने के साथ ही इससे व्यापारियों को नुकसान न हो इसका प्रयास कर रही है। जागरुक कृषि आदान विक्रेता संघ जिलाध्यक्ष इंदौर श्रीकृष्ण दुबे ने बताया साथी पोर्टल यह व्यवस्था सिर्फ अनुदानित बीज और कीटनाशकों तक सीमित होनी चाहिए, सामान्य बिक्री पर लागू करना अव्यवहारिक है। हमें आशा है कि राष्ट्रीय संगठन द्वारा बताई जा रही विसंगतियों को केंद्र सरकार समझते हुए व्यापारियों को राहत देगी।
