हलधर किसान भोपाल। मध्य प्रदेश के कृषि आदान व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से उर्वरक निर्माता कंपनियों द्वारा यूरिया, डीएपी और अन्य फास्फेटिक उर्वरकों के साथ अतिरिक्त उत्पादों की अनिवार्य टैगिंग (जबरन बिक्री) का विरोध कर रहे कृषि आदान व्यापारियों को अब बड़ी सफलता मिली है। मध्य प्रदेश शासन के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ऐसे गैर-अनुदानित उत्पादों की बिक्री से संबंधित अनुमतियां निरस्त कर दी गई हैं, जिन्हें उर्वरकों के साथ जोड़कर व्यापारियों पर थोपे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।

यह निर्णय मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ द्वारा लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों और संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों ने इसे प्रदेश के कृषि आदान व्यापारियों के हित में मिली “सबसे बड़ी जीत” बताया है।
क्या था मामला?
प्रदेश के कई कृषि आदान व्यापारियों की शिकायत थी कि कुछ उर्वरक निर्माता कंपनियां यूरिया, डीएपी तथा अन्य फास्फेटिक उर्वरकों की आपूर्ति के साथ अतिरिक्त गैर-अनुदानित उत्पादों को भी अनिवार्य रूप से जोड़ रही थीं। यदि व्यापारी मुख्य उर्वरक लेना चाहते थे तो उन्हें अन्य उत्पाद भी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। इस प्रक्रिया को व्यापारियों ने अनुचित बताया और इसे जबरन टैगिंग का नाम दिया।
व्यापारियों का कहना था कि इस व्यवस्था से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही थी, क्योंकि कई बार अतिरिक्त उत्पादों की मांग बाजार में नहीं होती थी। परिणामस्वरूप उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था और स्टॉक का दबाव भी बढ़ता था।
संगठन ने लगातार उठाई आवाज
मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों और मंत्रालय स्तर तक पहुंचाया। संगठन द्वारा व्यापारियों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा गया और मांग की गई कि खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।
लगातार प्रयासों के बाद अब राज्य शासन की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश स्तर से जारी उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र में दी गई अनुमतियों के अंतर्गत गैर-अनुदानित उर्वरकों के विक्रय से संबंधित व्यवस्था पर प्रतिबंध लागू किया गया है। इससे खाद के साथ अतिरिक्त उत्पादों की अनिवार्य बिक्री पर रोक लगने का रास्ता साफ हो गया है।
व्यापारियों को मिलेगा लाभ
इस निर्णय के बाद अब कृषि आदान व्यापारी अपनी आवश्यकता और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादों की खरीद कर सकेंगे। उन्हें किसी भी अतिरिक्त उत्पाद को जबरन लेने की बाध्यता नहीं होगी। इससे व्यापारियों पर आर्थिक दबाव कम होगा और खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
व्यापारियों का मानना है कि यह फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। लंबे समय से चल रही समस्या के समाधान से प्रदेश के हजारों कृषि आदान व्यापारियों को लाभ मिलने की संभावना है।
संगठन पदाधिकारियों ने दी बधाई
इस उपलब्धि पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रदेश के समस्त कृषि आदान व्यापारियों को शुभकामनाएं दी हैं। संगठन से जुड़े नेताओं ने कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और व्यापारियों की एकजुटता ने इस मुद्दे को मजबूत बनाया।
इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा दुबे, प्रदेश जॉइंट सेक्रेटरी राजेश मलैया तथा सदस्यता अभियान प्रभारी विनोद जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रदेशभर के कृषि आदान व्यापारियों को बधाई दी।
प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी, उज्जैन ने कहा कि संगठन लगातार कृषि आदान व्यापारियों की समस्याओं को शासन और विभाग तक पहुंचाता रहा है। इसी का परिणाम है कि सरकार ने इस विषय पर निर्णय लेते हुए व्यापारियों के हित में कदम उठाया है। उन्होंने इसे संगठन की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि आगे भी व्यापारियों के अधिकारों और समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
व्यापारियों में खुशी का माहौल
शासन के आदेश के बाद प्रदेशभर के कृषि आदान व्यापारियों में खुशी और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कई व्यापारियों ने इसे वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे व्यापार करने की स्वतंत्रता बढ़ेगी और अनावश्यक दबाव कम होगा।
मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ की यह सफलता न केवल संगठन की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संगठित प्रयासों से व्यापारियों की समस्याओं का समाधान संभव है। आने वाले समय में इस निर्णय का प्रभाव प्रदेश के कृषि आदान व्यापार और किसानों तक पहुंचने वाली उर्वरक व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
