सासन गिर में गूंजा शेर संरक्षण का संदेश, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया ‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम का उद्घाटन

The message of lion conservation resonates in Sasan Gir with Union Minister Bhupendra Yadav inaugurating the Lion Species Spotlight Programme

गुजरात हलधर किसान । गुजरात के सासन गिर में आयोजित ‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम के माध्यम से भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन 2026 से पहले आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा रहा, जिसमें शेर संरक्षण और वैश्विक सहयोग पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वर्चुअल माध्यम से की। इस अवसर पर गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया, वन राज्य मंत्री प्रवीण माली, अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के प्रतिनिधि तथा केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सोच की सराहना करते हुए कहा कि इसी दूरदृष्टि के कारण आईबीसीए जैसी वैश्विक पहल संभव हो सकी। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में शेर संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गिर क्षेत्र में शेर केवल वन्यजीव नहीं, बल्कि स्थानीय लोक संस्कृति और जनजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। यही कारण है कि यहां सामुदायिक भागीदारी के कारण एशियाई शेरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि गिर इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि आर्थिक विकास और वन्यजीव संरक्षण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को एशियाई शेरों के प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है, ताकि भविष्य में शेरों के लिए सुरक्षित और विस्तृत आवास उपलब्ध हो सके।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में जानकारी दी कि भारत 1 और 2 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रथम आईबीसीए शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी करेगा। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के लगभग 95 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, संरक्षण विशेषज्ञ, बहुपक्षीय एजेंसियां और 400 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन का मुख्य संदेश होगा — “शेरों को बचाओ, मानवता को बचाओ, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाओ।”

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों — शेर, बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा — के संरक्षण के लिए समर्पित वैश्विक मंच है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करना है।

भूपेंद्र यादव ने सासन गिर को भारत की समृद्ध जैव विविधता और प्रकृति संरक्षण की प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गिर का शेर केवल गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के गौरव, साहस और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एशियाई शेरों की गणना, जूनागढ़ में राष्ट्रीय वन्यजीव केंद्र की स्थापना और बर्दा अभयारण्य के विकास जैसे कई कार्य मिशन मोड में किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, पर्यावास का क्षरण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शेर संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर शेरों की आबादी में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि एशियाई शेर केवल भारत के गिर क्षेत्र में ही जंगली अवस्था में पाए जाते हैं।

भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ग्रेटर गिर लैंडस्केप में वर्ष 2025 तक शेरों की अनुमानित संख्या 891 तक पहुंच गई है, जो 2020 की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि प्रभावी संरक्षण, बेहतर प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने बताया कि एशियाई शेर को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 और सीआईटीईएस परिशिष्ट-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2020 में शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट लायन’ एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक व्यापक योजना है, जिसके तहत पर्यावास सुधार, जनसंख्या प्रबंधन और पारिस्थितिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान ‘शेर संरक्षण ब्रोशर’ का विमोचन भी किया गया। साथ ही विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को शेर संरक्षण से जुड़ी शैक्षिक प्रस्तुतियां और फिल्में दिखाई गईं। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि सरकार, वैज्ञानिक समुदाय और स्थानीय समाज मिलकर कार्य करें, तो वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलताएं हासिल की जा सकती हैं।

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