हलधर किसान, बागवानी। उत्तरप्रदेश में कासगंज के एक किसान ने सेब की विदेशी प्रजाति का बाग लगाया है। इस बाग में स्वदेशी कश्मीर या हिमाचल नहीं, बल्कि इजराइल और केन्या की गर्म मौसम के अनुकूल सेब लहलहा रहे है। तीन साल पहले इन विदेशी प्रजातियों के पौधे लगाए थे जो अब तीन साल बाद फल देने लगे है।
सहावर तहसील क्षेत्र के गांव बोड़ा नगरिया के किसान राजीव कुमार सिंह ने प्रयोग के तौर पर एक बीघा खेत में सेब के करीब दो सौ पौधे लगाए और तीसरे वर्ष में अच्छी.खासी सेब की फसल की पैदावार हुई। विदेशी प्रजाति के सेब की खेती वाला बाग लोगों में चर्चा का केंद्र है। लोग उसे देखने पहुंच रहे हैं। किसान के मुताबिकए एक बीघा बाग से अगले वर्ष में 7 से 8 लाख रुपये कीमत की सेब की फसल की पैदावार होगी। पांच वर्ष बाद इसकी पैदावार में और बढ़ोतरी होगी।
गर्म जलवायु में सेब के बाग –
किसान राजीव ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि राजस्थान के किसानों ने गर्म जलवायु होने के बावजूद सेब के बाग लगाए हैं और वह अच्छी फसल दे रहे हैं। यह जानकारी मिलने के बाद वह सेब का बाग लगाने के लिए उत्सुक हुए और वर्ष 2021 के दिसंबर माह में उन्होंने हिमाचल प्रदेश से सेब के विशेषज्ञ हरिभान शर्मा से मुलाकात की। उनके द्वारा गर्म जलवायु की सेब की प्रजातियां विकसित की गई हैंए वहां से सेब के पौधे लिए। इसके अलावाए हिमाचल प्रदेश के अन्य स्थानों से पौधे लिए और तकनीकी जानकारी हासिल की। इसके बादए एक बीघा खेत में सेब का बाग लगाया। इसमें दो सौ पौधे लगाए गए हैं।
50 डिग्री तापमान में मिलती है पैदावार –
हिमाचल के सेब विशेषज्ञ हरिमन व अन्य विशेषज्ञों की मदद से इस्राइल की सेब प्रजाति अन्नाए केन्या की प्रजाति ट्रॉफिक स्वीट एवं गोल्डन डोरसेट और हरिमन 99 के पेड़ बाग में लगाए गए हैं। दावा किया कि 4.5 वर्ष की उम्र पूरी करने पर 50 किलो फल प्रत्येक पेड़ से मिलेंगे। वह कहते हैं कि जो प्रजातियां उन्होंने अपने बाग में लगाई हैं उनमें 50 डिग्री तापमान में भी दिक्कत नहीं होगी। ऑर्गेनिक तरीके से सेब का बाग तैयार किया गया है।

छोटे और मझोले किसानों को हो सकता है फायदा –
किसान राजीव सिंह का कहना है कि छोटे और मझोले किसानों की आर्थिक स्थिति सेब की बागवानी से संवर सकती है। छोटे.छोटे किसानों के पास थोड़ी जमीन होतीए जहां सेब के बाग लगाकर लाखों रुपये की कमाई की जा सकती है। उनका कहना है इस क्षेत्र को सेब उत्पादन की दृष्टि से कश्मीर बनाना चाहते हैं।
अब महाराष्ट्र का अनार लगाने का इरादा –
सेब के साथ अंजीरए लीचीए चीकू के पौधे भी लगाए गए हैं। इन पर भी फल आने लगे हैं, लेकिन वह चाहते हैं कि महाराष्ट्र के नासिक के अनार की पैदावार यहां की जाए। उनका कहना है कि वह इस संबंध में नासिक जाकर पूरी जानकारी लेंगे और पौध लाएंगे। जिससे अनार का बाग लगाया जा सके।
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