हलधर किसान | कृषि व्यापार उत्तर प्रदेश में बीज विक्रय के लिए साथी पोर्टल की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद के बीच एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। संगठन की ओर से दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2026 को स्थगन आदेश जारी किया है। संगठन का दावा है कि इस आदेश का लाभ याचिका में शामिल संगठन के व्यक्तिगत सदस्यों तक सीमित न होकर एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन के रजिस्टर्ड सदस्यों को मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा बीजों की बिक्री के लिए साथी पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी इसे लागू करने के लिए लिखित आदेश जारी किए गए थे। इन आदेशों को लेकर कृषि आदान विक्रेताओं के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आ रही थीं। इसी बीच एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अतुल त्रिपाठी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
याचिका में संगठन की ओर से मांग रखी गई कि एसोसिएशन से जुड़े रजिस्टर्ड सदस्यों को इस प्रकार के आदेशों के प्रभाव से राहत दी जाए। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केस नंबर 31398/2026 में 12 अगस्त को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए स्थगन आदेश जारी किया।
रजिस्टर्ड सदस्यों को राहत का दावा
एसोसिएशन की ओर से जारी जानकारी में इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई गई है कि इसका लाभ संगठन के रजिस्टर्ड सदस्यों को मिलने की बात कही गई है। संगठन का कहना है कि यह आदेश केवल उन चुनिंदा व्यापारियों तक सीमित नहीं है, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से याचिका में याचिकाकर्ता के रूप में हिस्सा लिया हो।
एसोसिएशन ने इसे कृषि आदान व्यापारियों के हित में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा है कि संगठन की सामूहिक कानूनी लड़ाई का लाभ उसके सभी पात्र रजिस्टर्ड सदस्यों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
हालांकि, स्थगन आदेश की वास्तविक कानूनी सीमा और उसके अनुपालन को लेकर संबंधित न्यायालय के आदेश की मूल प्रति तथा संबंधित प्रशासनिक निर्देशों को देखना महत्वपूर्ण होगा। किसी भी व्यापारी को अपने स्तर पर आदेश की व्याख्या करने के बजाय आवश्यकता पड़ने पर कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेने की भी जरूरत हो सकती है।
संगठन ने सदस्यों से की सदस्यता सुनिश्चित करने की अपील
हाईकोर्ट के आदेश के बाद एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से संगठन की रजिस्टर्ड सदस्यता सूची में अपना नाम सुनिश्चित करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि भविष्य में भी कृषि आदान व्यापारियों से जुड़े विभिन्न सरकारी आदेशों और नीतिगत फैसलों के खिलाफ कानूनी लड़ाई में संगठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए प्रयास करता रहेगा।
एसोसिएशन की ओर से व्यापारियों को संदेश दिया गया है कि जो व्यापारी संगठन के साथ जुड़े रहेंगे, संगठन भी उनके अधिकारों और हितों के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा। इसी आधार पर सभी कृषि आदान विक्रेताओं से अपनी सदस्यता की स्थिति जांचने और रजिस्टर्ड सदस्यता सूची में नाम सुनिश्चित करने को कहा गया है।
दूसरे स्थगन आदेश से अलग होने का दावा
एसोसिएशन ने अपने संदेश में हाल ही में सामने आए एक अन्य स्थगन आदेश का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि उस मामले में राहत केवल उन्हीं लोगों को मिली थी, जो संबंधित याचिका में व्यक्तिगत रूप से याचिकाकर्ता के रूप में शामिल थे।
इसके विपरीत, एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन का दावा है कि उसकी याचिका में संगठन के सभी रजिस्टर्ड सदस्यों के लिए राहत सुनिश्चित हुई है। संगठन ने दोनों मामलों के बीच इस अंतर को अपनी कानूनी लड़ाई की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है।
कृषि आदान व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम
साथी पोर्टल को लेकर उत्तर प्रदेश में सामने आया यह घटनाक्रम कृषि आदान व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीज, उर्वरक और कीटनाशक कारोबार से जुड़े व्यापारियों के लिए सरकार की नई डिजिटल व्यवस्थाओं का सीधा असर उनके रोजमर्रा के कारोबार पर पड़ता है। ऐसे में पोर्टल की अनिवार्यता, बिक्री प्रक्रिया और उससे जुड़े अनुपालन को लेकर व्यापारी संगठनों की ओर से लगातार अपनी चिंताएं उठाई जाती रही हैं।
एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने इस कानूनी सफलता का श्रेय संगठन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों तथा विभिन्न राज्यों और जिला इकाइयों के सहयोग को दिया है।

संगठन की ओर से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव तथा उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा दुबे, इंदौर सहित संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों के सहयोग का उल्लेख किया गया है।
एसोसिएशन का संदेश स्पष्ट है कि कृषि आदान व्यापारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन सामूहिक रूप से कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संघर्ष जारी रखेगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में साथी पोर्टल को लागू करने की प्रक्रिया पर संबंधित विभाग और जिला प्रशासन किस तरह आगे बढ़ते हैं।
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