हलधर किसान, नई दिल्ली। भारत और केन्या के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। दोनों देशों के बीच कृषि पर प्रथम संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group–JWG) की बैठक वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। इस बैठक ने भारत और केन्या के बीच कृषि, अनुसंधान, तकनीक और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में साझेदारी को सुदृढ़ करने की ठोस आधारशिला रखी है।

बैठक की सह-अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (आईसी) श्री अजीत कुमार साहू तथा केन्या के विदेश एवं प्रवासी मामलों के मंत्री श्री स्टीफन रोनो ने की। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कृषि क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों, प्राथमिकताओं और भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने देशों की कृषि संरचना, प्रमुख फसलों, जलवायु संबंधी चुनौतियों, संसाधनों की उपलब्धता और किसानों के समक्ष उपस्थित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। भारत ने लघु एवं सीमांत किसानों के सशक्तिकरण, डिजिटल कृषि, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और कृषि स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के अपने अनुभव साझा किए। वहीं केन्या ने सूखा प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीकों और कृषि निर्यात बढ़ाने के अपने प्रयासों की जानकारी दी।

संयुक्त कार्य समूह की इस पहली बैठक में कृषि अनुसंधान को सहयोग का प्रमुख क्षेत्र माना गया। दोनों देशों ने अनुसंधान संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने, नई किस्मों के विकास, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों तथा बीज गुणवत्ता सुधार पर मिलकर कार्य करने की सहमति व्यक्त की। इसके अतिरिक्त बाजार तक पहुंच को आसान बनाने, कृषि उत्पादों के निर्यात-आयात में सहयोग तथा व्यापारिक बाधाओं को कम करने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।
कृषि यंत्रीकरण को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार सामने आए। भारत ने लघु किसानों के लिए उपयुक्त कम लागत वाले कृषि यंत्रों और उपकरणों के विकास में अपने अनुभव साझा किए। केन्या ने इन तकनीकों में रुचि दिखाते हुए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी सहयोग की संभावना पर बल दिया। इससे दोनों देशों के किसानों को आधुनिक तकनीक से लाभ मिलने की उम्मीद है।
क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी सहयोग का महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया। भारत द्वारा कृषि शिक्षा, विस्तार सेवाओं और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विकसित मॉडल को साझा करने की पेशकश की गई। दोनों पक्षों ने कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों के आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई, जिससे ज्ञान और अनुभव का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान संभव हो सके।
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के फसल प्रभाग, एम एंड टी (मशीनीकरण एवं प्रौद्योगिकी) प्रभाग, एनआरएम (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) प्रभाग, पीपी (पादप संरक्षण) प्रभाग तथा विस्तार प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही केन्या में भारत के उच्चायोग और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भी सहभागिता की।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और केन्या के बीच यह सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों को ही मजबूत नहीं करेगा, बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप में कृषि विकास के नए अवसर भी खोलेगा। भारत की उन्नत कृषि तकनीक, डिजिटल समाधान और कम लागत वाली नवाचार पद्धतियां केन्या जैसे देशों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं, वहीं केन्या के अनुभव भारत के लिए भी सीख प्रदान करेंगे।
प्रथम संयुक्त कार्य समूह की यह बैठक भविष्य में नियमित संवाद और ठोस परियोजनाओं के मार्ग प्रशस्त करेगी। दोनों देशों ने इस सहयोग को दीर्घकालिक एवं परिणामोन्मुख बनाने का संकल्प दोहराया। कृषि क्षेत्र में यह साझेदारी आत्मनिर्भरता, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
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