हलधर किसान नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक कार्ययोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर सड़क धूल नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार, सार्वजनिक परिवहन, अपशिष्ट प्रबंधन और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण जैसे प्रमुख मुद्दों पर प्रगति का आकलन किया।
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि आने वाले महीने दिल्ली की वायु गुणवत्ता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और जन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नियोजित उपायों का समय पर क्रियान्वयन, सख्त प्रवर्तन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास का विषय है।
सड़क धूल को प्रदूषण का प्रमुख कारण मानते हुए मंत्री ने सड़क पुनर्निर्माण कार्यों में देरी दूर करने और अक्टूबर 2026 तक सभी लंबित कार्य पूरे करने के निर्देश दिए। साथ ही सड़कों के किनारे खाली स्थानों पर हरियाली बढ़ाने और धूल नियंत्रण उपायों को मजबूत करने पर बल दिया गया।
मशीनीकृत सड़क सफाई को प्रभावी बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने सितंबर 2026 तक 78 बड़ी एवं मध्यम क्षमता वाली सड़क सफाई मशीनों तथा 1,000 कूड़ा एकत्रीकरण मशीनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि नियमित और व्यापक सफाई शहरी क्षेत्रों में कण प्रदूषण कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने के लिए अधिक इलेक्ट्रिक बसों की खरीद तथा पूरे शहर में ईवी चार्जिंग ढांचे के विस्तार पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि दिल्ली और एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके साथ ही मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने की आवश्यकता भी बताई गई।
पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एनसीआर से बाहर वाहनों के स्थानांतरण संबंधी एनओसी प्रक्रिया तेज करने और सभी सीमा प्रवेश बिंदुओं पर सितंबर 2026 तक स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरे लगाने का सुझाव दिया गया।
यातायात जाम को प्रदूषण का बड़ा कारण बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली के 15 क्षेत्रों को सिग्नल-मुक्त कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इससे वाहनों के अनावश्यक ठहराव और ईंधन खपत में कमी आने की उम्मीद जताई गई है।
औद्योगिक प्रदूषण पर समीक्षा के दौरान उद्योगों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली की नियमित जांच तथा प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के सुचारू संचालन पर जोर दिया गया। नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और आवश्यक होने पर सीलिंग की बात भी कही गई।
निर्माण एवं तोड़फोड़ अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर केंद्रीय मंत्री ने वर्तमान प्रसंस्करण क्षमता में कमी का उल्लेख करते हुए अतिरिक्त सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता बताई। निर्माण स्थलों के नियमित निरीक्षण और गैर-अनुपालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में नगर निगमों को पुराने कचरे के निस्तारण और नए ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों के विस्तार में तेजी लाने के लिए कहा गया। खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सर्दियों के दौरान सख्त निगरानी और जनजागरूकता बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि वायु प्रदूषण के प्रमुख क्षेत्रों की निगरानी के लिए विशेष कार्यबल गठित कर मासिक समीक्षा की जाए, जिससे जवाबदेही तय हो और समयसीमा के भीतर परिणाम सामने आएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन हुआ तो आगामी सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।
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