बागवानी विकास मिशन के तहत किसानों को संरक्षित खेती के लिए मिल रही तकनीकी और वित्तीय सहायता

Farmers receiving technical and financial assistance for protected cultivation under the Horticulture Development Mission

नई दिल्ली। देश में बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा समेकित बागवानी विकास मिशन (MIDH) के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक एवं संरक्षित खेती तकनीकों को अपनाने के लिए संस्थागत, तकनीकी, प्रशिक्षण और विस्तार संबंधी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का जोर किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, बेहतर उत्पादन तकनीक और बागवानी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर है।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार देश में बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्र प्रायोजित योजना समेकित बागवानी विकास मिशन (MIDH) को लागू कर रही है। मिशन के अंतर्गत किसानों को संरक्षित खेती प्रौद्योगिकियों को अपनाने में मदद देने के लिए विभिन्न संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

इन संस्थानों के माध्यम से किसानों को मिल रहा सहयोग

एमआईडीएच के तहत किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए राज्य बागवानी मिशन, तकनीकी सहायता समूह (TSG), सटीक कृषि विकास केंद्र (PFDC), उत्कृष्टता केंद्र (CoE), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थान, राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAU), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) तथा अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।

इन संस्थानों के माध्यम से किसानों को संरक्षित खेती की नई तकनीकों की जानकारी, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाता है। इससे किसान पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस और अन्य आधुनिक संरक्षित खेती प्रणालियों का उपयोग कर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रभाव को कम करते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

61 फसल-विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्र स्थापित

सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए देश में 61 फसल-विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्र (CoE) स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों की स्थापना भारत-इजरायल सहयोग, भारत-डच सहयोग और विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से की गई है।

उत्कृष्टता केंद्र किसानों के लिए प्रदर्शन और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया जाता है। इसके अलावा, संरक्षित खेती के लिए आवश्यक विशिष्ट रोपण सामग्री और सब्जियों के पौधों के स्रोत के रूप में भी इन केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

किसानों को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर जोर

एमआईडीएच के मानव संसाधन विकास (HRD) घटक के तहत किसानों और फील्ड कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों से परिचित कराना है, ताकि वे अपनी बागवानी फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार कर सकें।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को संरक्षित खेती के संचालन, फसल प्रबंधन, पौध संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और आधुनिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

पॉलीहाउस और शेडनेट निर्माण के लिए वित्तीय सहायता

सरकार संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को केवल तकनीकी सहयोग ही नहीं, बल्कि विभिन्न संरचनाओं के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करा रही है। एमआईडीएच के अंतर्गत पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस, प्लास्टिक या नॉन-वॉवन क्लॉथ टनल, वॉक-इन टनल जैसी संरक्षित खेती संरचनाओं के निर्माण के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता का प्रावधान है।

इन तकनीकों की मदद से किसान नियंत्रित वातावरण में बागवानी फसलों का उत्पादन कर सकते हैं। इससे मौसम आधारित जोखिमों को कम करने, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने और कई मामलों में ऑफ-सीजन फसलों का उत्पादन करने में भी मदद मिलती है।

एनएचबी भी दे रहा संस्थागत और तकनीकी सहयोग

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा भी बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थागत और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें स्वच्छ पौध कार्यक्रम और बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम प्रमुख हैं।

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने, बागवानी उत्पादन को संगठित रूप देने और किसानों को आधुनिक उत्पादन एवं विपणन व्यवस्था से जोड़ना है। इसके अलावा, वाणिज्यिक स्तर पर संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए भी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

व्यावसायिक स्तर पर भी संरक्षित खेती को बढ़ावा

एनएचबी के माध्यम से व्यावसायिक पैमाने पर संरक्षित खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एकीकृत वाणिज्यिक बागवानी उत्पादन और प्रसंस्करण परियोजनाओं की स्थापना में सहायता दी जाती है। ऐसी परियोजनाओं में रोपण सामग्री, पौध, सिंचाई, उर्वरक और मशीनीकरण जैसे विभिन्न घटकों को शामिल किया जाता है।

सरकार का प्रयास है कि बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा देकर किसानों को अधिक लाभकारी खेती की ओर अग्रसर किया जाए।

निजी क्षेत्र के लिए अलग प्रावधान नहीं

एमआईडीएच के परिचालन दिशानिर्देशों में गैर-सरकारी संगठनों या निजी क्षेत्र की संस्थाओं को शामिल करने के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है। हालांकि, मिशन प्रबंधन घटक के तहत राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न गतिविधियों के प्रबंधन के लिए कुल वार्षिक आवंटन का 2.5 प्रतिशत राज्य बागवानी मिशन को प्रदान किया जाता है।

कुल मिलाकर, एमआईडीएच के माध्यम से सरकार संरक्षित खेती के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। PFDC, CoE, राज्य बागवानी मिशन, NHB, ICAR संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय और KVK जैसे संस्थानों के माध्यम से किसानों तक तकनीक और प्रशिक्षण पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे देश में आधुनिक बागवानी को बढ़ावा मिलने और किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

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