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कपास फसल में फूल आने पर ऐसे करें देखभाल, मिलेगा बम्पर उत्पादन 

कपास फसल में फूल आने पर ऐसे करें देखभाल

हलधर किसान | नई दिल्ली: इस साल कपास की खेती में पिछले वर्ष के मुकाबले कपास के रकबे में लगभग 11 लाख हेक्टेयर की गिरावट देखी गई है. ऐसे में कपास उगाने वाले किसानों को अपने फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि वे अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकें और अधिक लाभ कमा सकें. अगस्त के महीने में, बादल छाए रहने और बारिश के समय, कपास पूरी तरह खिलने की अवस्था में होते हैं। इस समय धूप और सूरज की किरणों की तीव्रता बहुत कम होती है। ऐसी परिस्थितियों में पौधे ऑक्सिन का उत्पादन नहीं कर पाते हैं जो मुख्य रूप से पौधों में हार्मोन उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

इस समय खेत में जल भराव की भी स्थिति हो जाती है। जिसके कारण मिट्टी से फसल को पोषक तत्व भी नहीं मिल पाते हैं। इसलिए, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पोषक तत्वों का चयन करें और समस्या को दूर करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाओं का पालन करें। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कपास की खेती में खाद पानी और रोगों का प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है. अत्यधिक और असामयिक बारिश के कारण पौधों की ऊंचाई 1.5 मीटर से अधिक हो सकती है, जो कि फसल की उपज पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. ऐसे में मुख्य तने की ऊपर वाली सभी शाखाओं की छंटाई करने की सलाह दी जाती है, जिससे कीटनाशकों के छिड़काव में सुविधा होती है.

कपास में कम फूल लगने और फूल झड़ने की समस्या कैसे दूर करें?

1. खेत से पानी निकासी की उचित व्यवस्था करें|
2. अधिक मात्रा में यूरिया देने से बचें।
3. यूरिया की जगह अमोनियम सल्फेट का प्रयोग करें। यह मिट्टी से नमी को अवशोषित करने में मदद करेगा, और मिट्टी से अधिक पोषक तत्वों को लेने में मदद करेगा।
4. अल्फा नेफथिल एसिटिक एसिड 4.5% SL @ 4.5 मिली / 15 लीटर पानी का छिड़काव करें।
5. बोरान 20% @ 15 ग्राम/15 लीटर पानी का छिड़काव करें।
6. मैग्नीशियम सल्फेट कम से कम 15 किलो/ एकड़ म्यूरेट ऑफ पोटाश @ 25 किलो/एकड़ के साथ अमोनियम सल्फेट @25 किलो/ एकड़ मिट्टी में छिड़काव करें। (आवश्यकता के अनुसार इसे बढ़ाया जा सकता है।)
7. किसी भी हार्मोन का छिड़काव न करें।
8. सबसे खराब स्थिति में, किसान 00-52-34 @75 ग्राम/15 लीटर पंप या 13-40-13 @75 ग्राम/पंप या 13-00-45 @75 ग्राम/पंप छिड़काव कर सकते हैं।

फूल आने के समय नाइट्रोजन की बाकी आधी मात्रा देने की सलाह दी गई है. हायब्रिड कपास के लिए 1/2 बैग और अमेरिकन कपास के लिए 2/3 बैग नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है. नाइट्रोजन देने से पहले खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है, लेकिन पानी खड़ा नहीं होना चाहिए. बार‍िश के बाद अतिरिक्त जल का तुरंत निकास करना चाहिए. यदि फूल आने पर खेत में नमी नहीं होगी, तो फूल और फल झड़ सकते हैं, जिससे पैदावार कम हो जाएगी. एक तिहाई टिंडे खुलने पर आखिरी सिंचाई कर दें और उसके बाद कोई सिंचाई न करें.

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कीट प्रबंधन :

कपास में पत्ती लपेटक कीटों की इल्लियां पत्तियों को लपेटकर खा जाती हैं. इनकी रोकथाम के लिए गर्मियों में गहरी जुताई की जानी चाहिए ताकि प्यूपा धूप से नष्ट हो जाएं. लार्वा को एकत्रित करके नष्ट करें और पत्ती लपेटने वाले कीटों की उपस्थिति पर अंडा पैरासिटोइड ट्राइकोग्रामा का प्रयोग करें. अगस्त में कपास की फसल पर हरा तैला, रोबंदार सुंडी, चित्तीदार सुंडी, कुबड़ा कीट, और अन्य पत्ती खाने वाले कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है.

हरा तैला और सफेद मक्खी :

हरा तैला कीट कपास की फसल को अत्यधिक नुकसान पहुंचाता है. यह कीट पत्तियों की निचली सतह पर रहता है और पत्तों के किनारों को पीला कर देता है जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और कलियां, फूल झड़ने लगते हैं. हरा तैला जुलाई-अगस्त में सबसे अधिक हानि पहुंचाता है. सफेद मक्खी कीट पिछले वर्षों से कपास में बढ़ते प्रकोप का कारण बनी हुई है. यह कीट पत्तियों पर रस चूसकर पौधों को कमजोर करता है और चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है, जिससे काली फफूंरी उग जाती है और पौधों की खाद्य निर्माण प्रक्रिया में बाधा आती है

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