पहले ही दिन वैज्ञानिक पशुपालन का संदेश, पशुपालकों को योजनाओं की दी जानकारी
हलधर किसान बालाघाट। मध्य प्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा प्रदेशभर में संचालित ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ के तृतीय चरण का शुभारंभ सोमवार को बालाघाट जिले के विकासखंड क्षेत्र में उत्साहपूर्वक हुआ। अभियान के पहले ही दिन विभागीय अधिकारियों ने गांव-गांव पहुंचकर पशुपालकों से सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दी। साथ ही पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों से भी अवगत कराया।
अभियान का उद्देश्य केवल पशुपालकों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है, ताकि पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हो, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो और ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी बढ़ोतरी हो सके।
विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज पुशाम ने अभियान के पहले दिन ग्राम कोचेवाड़ा, बुढ़िया गांव एवं अत्री का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पशुपालकों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा उनके समाधान के लिए आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक पशुपालन पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर ही पशुपालक अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।
डॉ. पुशाम ने पशुपालकों को बताया कि पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। यदि पशुओं की नियमित देखभाल की जाए तो वे विभिन्न संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं और उनकी उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है। उन्होंने पशुपालकों को संतुलित पशु आहार के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि हरा चारा, सूखा चारा और दाना मिश्रण का संतुलित उपयोग पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों के लिए आवश्यक है।
उन्होंने नस्ल सुधार कार्यक्रम पर भी विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि उन्नत नस्ल के पशुओं का पालन और कृत्रिम गर्भाधान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने से बेहतर गुणवत्ता वाले पशु तैयार होते हैं, जिनसे अधिक दूध प्राप्त किया जा सकता है। इससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और दुग्ध व्यवसाय अधिक लाभकारी बनता है।
अभियान के दौरान श्री अशुल नागोसे, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी, लामता भी उपस्थित रहे। उनके साथ गौ सेवक एवं गौ मैत्री ने भी गांवों में पशुपालकों से संपर्क कर विभाग की योजनाओं और सेवाओं की जानकारी साझा की। टीम ने पशुपालकों से आग्रह किया कि वे शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर निकटतम पशु चिकित्सालय या विभागीय अधिकारियों से संपर्क करें।
भ्रमण के दौरान विभागीय टीम ने ग्राम कोचेवाड़ा के सरपंच श्री सुशील कटरे तथा बुढ़िया गांव के सरपंच श्री लखन लाल बघेले से उनके निवास पर सौजन्य भेंट भी की। इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा पशुपालकों को विभागीय योजनाओं से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने भी विभाग के इस अभियान की सराहना करते हुए ग्रामीणों को इसका लाभ लेने के लिए प्रेरित करने का भरोसा दिलाया।
अधिकारियों ने बताया कि दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के माध्यम से गांव-गांव जाकर पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों, रोग नियंत्रण, पोषण प्रबंधन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, पशु बीमा, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण एवं विभाग की अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। अभियान का उद्देश्य पशुपालकों और विभाग के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पशुपालक वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हैं तो कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है, पशुओं की उत्पादक आयु बढ़ती है और दुग्ध व्यवसाय अधिक टिकाऊ एवं लाभदायक बनता है। यही कारण है कि राज्य सरकार पशुपालन को कृषि के साथ आय के प्रमुख स्रोत के रूप में विकसित करने पर लगातार जोर दे रही है।
पशुपालन विभाग ने जानकारी दी कि अभियान के आगामी चरणों में भी विकासखंड के विभिन्न गांवों का दौरा किया जाएगा। प्रत्येक गांव में पशुपालकों से संवाद, पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी देने का कार्य निरंतर जारी रहेगा। विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़कर दुग्ध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का पहला दिन उत्साहजनक रहा और ग्रामीणों ने भी विभाग की इस पहल का स्वागत किया। पशुपालकों ने अधिकारियों से सीधे चर्चा कर अपनी समस्याएं साझा कीं तथा वैज्ञानिक पशुपालन संबंधी उपयोगी जानकारी प्राप्त की। विभाग को उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालकों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी।
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