‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान से भूजल स्तर सुधारने की अनूठी पहल
हलधर किसान भुवनेश्वर। मानसून की हर बूंद को भविष्य की जल सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में ओडिशा राज्य एक नई मिसाल कायम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान के तहत राज्य सरकार ने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को जन आंदोलन का स्वरूप दे दिया है। स्कूलों की छतों, सरकारी भवनों, तालाबों और कुओं के माध्यम से वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल भंडार को मजबूत करने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
राज्य में वर्षा जल को उसके गिरने के स्थान पर ही एकत्रित कर वैज्ञानिक तरीके से भूमिगत जलभृतों (एक्विफर) तक पहुंचाया जा रहा है। इससे भूजल स्तर में सुधार हो रहा है, पेयजल उपलब्धता बढ़ रही है और किसानों को सिंचाई के लिए अधिक जल उपलब्ध हो रहा है।

जाजपुर जिले में 117 रिचार्ज शाफ्ट और 114 वर्षा जल संचयन प्रणालियां
जाजपुर जिला भूजल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य का अग्रणी मॉडल बनकर उभरा है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच जिले में एआरयूए योजना के तहत 117 रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए, जबकि छाता योजना के अंतर्गत 114 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए।

कोरेई, बिनझारपुर, बारी, रसूलपुर, दशरथपुर और जाजपुर जैसे ब्लॉकों में इन योजनाओं का विशेष प्रभाव देखने को मिला है। भूजल की निगरानी के लिए 47 डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर और 72 अवलोकन कुओं का नेटवर्क भी विकसित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल से पेयजल सुरक्षा मजबूत हुई है, किसानों को सिंचाई में राहत मिली है तथा महिलाओं पर पानी लाने का बोझ कम हुआ है।
कटक में तकनीक और जनभागीदारी का सफल संगम
कटक जिले में छाता योजना के अंतर्गत 57 रूफटॉप वर्षा जल संचयन प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसके अलावा तालाबों और जलाशयों में 35 रिचार्ज शाफ्ट बनाकर अतिरिक्त वर्षा जल को भूमिगत जलभृतों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
जिले में भूजल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाए गए। नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाएं, सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदायों को इस अभियान से जोड़ा गया।
जिले के 66 स्वचालित निगरानी केंद्र और 100 अवलोकन कुएं लगातार भूजल स्तर पर नजर रख रहे हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान भूजल दोहन का स्तर लगभग 47 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो संतुलित जल प्रबंधन की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
दिगापहांडी में भूजल पुनर्जीवन का सफल प्रयोग
गंजाम जिले के दिगापहांडी नगर क्षेत्र में बढ़ते शहरीकरण और घटती वर्षा के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा था। वर्ष 2020 से 2022 के बीच कई स्थानों पर भूजल स्तर में एक से तीन मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई थी।
इस चुनौती से निपटने के लिए सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए। इन संरचनाओं के माध्यम से छतों का पानी फिल्टर होकर सीधे रिचार्ज बोरवेल में पहुंचाया जाने लगा।
इस पहल के बाद मानसून के पश्चात भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। पुनर्भरण संरचनाओं के आसपास स्थित अवलोकन कुओं में जलस्तर बेहतर पाया गया है, जिससे यह मॉडल शहरी क्षेत्रों के लिए भी प्रभावी साबित हुआ है।
जन आंदोलन बना जल संरक्षण
ओडिशा में भूजल संरक्षण केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जनभागीदारी के माध्यम से एक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया गया है। स्वयं सहायता समूह, स्थानीय निकाय, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक संगठन वर्षा जल संचयन तथा जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक योजना, आधुनिक तकनीक और सामुदायिक भागीदारी का यह संगम देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
भविष्य के लिए मजबूत जल सुरक्षा
ओडिशा का अनुभव बताता है कि यदि वर्षा जल का वैज्ञानिक ढंग से संचयन और भूजल पुनर्भरण किया जाए तो जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। छाता और एआरयूए जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य ने भूजल संरक्षण का ऐसा मॉडल विकसित किया है जिसे देशभर में अपनाया जा सकता है।
मानसून की हर बूंद को संजोने का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
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