मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ ने किया समर्थन, कहा- व्यापारियों की समस्याओं का हो तत्काल समाधान
हलधर किसान जयपुर/भोपाल। राजस्थान में कृषि आदान व्यापारियों के बीच बढ़ते असंतोष ने एक बार फिर बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त सुझावों और मांगों के बाद कृषि आदान व्यापारियों ने 12 जून 2026 को सम्पूर्ण राजस्थान में कृषि आदान व्यापार बंद रखने का निर्णय लिया है। सीकर में आयोजित आक्रोश प्रदर्शन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल व्यापारिक हितों के लिए नहीं, बल्कि कृषि आदान व्यापार को भय, भ्रष्टाचार और कथित विभागीय उत्पीड़न से मुक्त कराने के लिए किया जा रहा है।
संगठन द्वारा जारी अपील में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से कृषि आदान व्यापारियों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों, दबाव और कथित अवैध वसूली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि बार-बार अपनी समस्याएं रखने के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है। ऐसे में संगठन ने सभी व्यापारियों से एकजुट होकर संघर्ष में भाग लेने की अपील की है।
व्यापारियों ने वर्ष 2016 के आंदोलन को भी याद किया है। संगठन के अनुसार मार्च और अप्रैल 2016 के दौरान कृषि आदान व्यापारी भय और असुरक्षा के माहौल में व्यापार करने को मजबूर थे। उस समय लगातार वार्ताओं के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद 13 मई 2016 से राज्यव्यापी बंद का आयोजन किया गया। आंदोलन के दौरान 19 मई 2016 को जयपुर में विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 7 से 8 हजार कृषि आदान विक्रेताओं ने भाग लिया था। उस आंदोलन के बाद सरकार को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा और लिखित समझौते के माध्यम से व्यापारियों की कई मांगों का समाधान किया गया।
संगठन का कहना है कि लगभग दस वर्षों बाद एक बार फिर वैसी ही परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं। व्यापारियों का आरोप है कि विभागीय दबाव, भ्रष्टाचार और कथित अवैध वसूली के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लगभग 20 हजार कृषि आदान विक्रेता एकजुट होकर यह संदेश देना चाहते हैं कि वे किसी भी प्रकार के अन्याय और अवैध वसूली को स्वीकार नहीं करेंगे।
अपील में व्यापारियों ने भावनात्मक रूप से अपने साथियों से एकजुटता की मांग करते हुए कहा है कि कृषि आदान व्यवसाय से जुड़े लोग कड़ी धूप, विपरीत मौसम और कठिन परिस्थितियों में 12 से 15 घंटे तक मेहनत करके अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में उनकी मेहनत की कमाई पर किसी प्रकार का अवैध दबाव या वसूली स्वीकार्य नहीं हो सकती। संगठन ने सभी व्यापारियों से अपने प्रतिष्ठान बंद कर सीकर पहुंचने और अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने का आग्रह किया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने राजस्थान के कृषि आदान व्यापारियों द्वारा उठाए गए कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यदि समय रहते व्यापारी संगठित होकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आवाज नहीं उठाते, तो भविष्य में व्यापार करना और अधिक कठिन हो सकता है।
श्री दुबे ने कहा कि राजस्थान में जो परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं, वे केवल एक राज्य का विषय नहीं हैं बल्कि कृषि आदान व्यापार से जुड़े पूरे देश के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खरीफ सीजन सामने है, किसान भी परेशान हैं और व्यापारी भी विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में यदि प्रशासन और व्यापारियों के बीच टकराव की स्थिति बनती है तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा।
उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की कि कृषि आदान व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए तथा उनका त्वरित और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। श्री दुबे के अनुसार कृषि आदान व्यापार देश की कृषि व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है और यदि इस क्षेत्र में असंतोष बढ़ता है तो इसका प्रभाव किसानों तक पहुंचना स्वाभाविक है।
कृषि आदान विक्रेता संगठनों का मानना है कि सम्मान और सुरक्षा के साथ व्यापार करना उनका अधिकार है। इसी भावना के साथ राजस्थान के व्यापारियों ने संघर्ष का मार्ग चुना है। अब सभी की निगाहें 12 जून को सीकर में होने वाले आक्रोश प्रदर्शन और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह प्रशासन और व्यापारियों के बीच होने वाली वार्ताओं पर निर्भर करेगा।
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