2.45 करोड़ की घूस, 15 करोड़ के नकली बीज और किसानों से विश्वासघात

A bribe of ₹2.45 crore spurious seeds worth ₹15 crore and a betrayal of farmers

राजस्थान बीज निगम घोटाले ने खोली भ्रष्टाचार की परतें

हलधर किसान जयपुर राजस्थान में किसानों के हितों की रक्षा करने वाले विभाग पर ही गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगने से प्रदेश की राजनीति और कृषि जगत में हलचल मच गई है। हलधर किसान रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान राज्य बीज निगम से जुड़े एक बड़े घूसकांड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने तत्कालीन निदेशक जुगल किशोर सहित छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य के अमानक और नकली बीजों के मामले को दबाने तथा दोषियों को बचाने के लिए 2 करोड़ 45 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत का खेल खेला गया।

जानकारी के अनुसार लगभग 15 करोड़ रुपये मूल्य के सीज किए गए बीजों को कार्रवाई से बचाने और उन्हें वापस गुजरात भेजने की कथित साजिश रची गई। यह पूरा घटनाक्रम कृषि विभाग की निगरानी में हुआ, जिससे किसानों के बीच आक्रोश बढ़ गया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि लाखों किसानों की आजीविका के साथ किया गया गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।

एसीबी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और सनसनीखेज बना दिया। बीकानेर स्थित आरोपी अधिकारी के आवास पर छापेमारी के दौरान कथित रूप से नोटों से भरे दो प्लास्टिक के कट्टे पड़ोसी के खाली प्लॉट में फेंके गए। जांच एजेंसी के अनुसार इन कट्टों से 500-500 रुपये के नोटों में 1 करोड़ 1 लाख 48 हजार 200 रुपये की नकदी बरामद हुई। इसके अतिरिक्त घर से 13 लाख रुपये नकद और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी मिले।

जांच में सामने आई ऑडियो क्लिप्स और बातचीत के विवरण ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। कथित बातचीत में अधिकारियों और बिचौलियों के बीच “काम हो जाने” तथा “सेटिंग” जैसे शब्दों का उल्लेख बताया जा रहा है। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि नकली बीज प्रकरण को दबाने के लिए संगठित स्तर पर प्रयास किए गए।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नकली और अमानक बीज सीधे तौर पर किसानों की फसल, उत्पादन और आय को प्रभावित करते हैं। किसान पूरे वर्ष की मेहनत और पूंजी बीज पर निर्भर करता है। यदि बीज गुणवत्ता रहित निकले तो फसल चौपट होने के साथ किसान कर्ज के बोझ में दब जाता है। ऐसे में यदि बीज घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होते हैं तो इसका सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के किसानों को हुआ है।

विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने इस मामले को राज्य के कृषि प्रशासन की बड़ी विफलता बताया है। उनका आरोप है कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने में असफल रही है। किसान संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में किसानों को समय पर खाद और उन्नत बीज उपलब्ध कराने में लगातार समस्याएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है, जबकि नकली कृषि आदानों की शिकायतें भी बढ़ी हैं।

प्रदेश के किसान यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि विभागीय स्तर पर ही अनियमितताएं होती रहीं तो किसानों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। कृषि क्षेत्र पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में भ्रष्टाचार के आरोप किसानों की चिंता और बढ़ा देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच आवश्यक है। दोषी चाहे किसी भी पद पर हों, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना जरूरी है ताकि किसानों का विश्वास बहाल हो सके। साथ ही नकली बीज और कृषि आदानों के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

राजस्थान का किसान आज यही जानना चाहता है कि उसकी मेहनत और अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों को कब सजा मिलेगी। 2.45 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत और करोड़ों रुपये की नकदी बरामदगी से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।

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