पेयजल और सिंचाई संकट से परेशान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा, तालाबों से पानी छोड़ने की मांग तेज
हलधर किसान खरगोन (मध्य प्रदेश)। जिले के बिलाली और आसपास के गांवों में गहराते पेयजल एवं सिंचाई संकट ने किसानों का धैर्य जवाब दे दिया। लंबे समय से पानी की समस्या का समाधान नहीं होने से नाराज किसानों ने शुक्रवार को खंडवा-वडोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों के इस आंदोलन के कारण हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार ग्राम बिलाली सहित आसपास के सात गांवों के किसान सुबह बड़ी संख्या में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एकत्रित हुए। किसानों ने अपने ट्रैक्टर, दोपहिया और अन्य वाहन सड़क पर खड़े कर यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया। देखते ही देखते हाईवे पर ट्रकों, बसों और अन्य वाहनों की लंबी लाइन लग गई। आंदोलन के दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र के तालाबों से पानी छोड़ने की मांग उठाई।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। भीषण गर्मी और कम जल उपलब्धता के कारण नदी-नाले लगभग सूख चुके हैं। इससे खेतों में खड़ी फसलों पर संकट मंडरा रहा है। कई किसानों की फसलें पानी के अभाव में सूखने लगी हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई गांवों में लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पशुपालकों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है क्योंकि मवेशियों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में हालात और अधिक खराब हो सकते हैं।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि वे अपनी समस्याओं को लेकर कई बार प्रशासन के समक्ष गुहार लगा चुके हैं। किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे थे। इसके बावजूद समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज किसानों ने अंततः सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का निर्णय लिया।
किसानों का कहना है कि वेदा नदी के सूखने से पूरे क्षेत्र में जल संकट और गहरा गया है। बिलाली, सगुन-भगूर, ललनी-टेमरनी, बेहरामपुर, लाखी सहित कई गांवों में जल स्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं। नदी में पानी नहीं होने से भूजल स्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। इसका असर हैंडपंपों, कुओं और अन्य जल स्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है।
आंदोलनकारी किसानों की प्रमुख मांग है कि क्षेत्र के तालाबों से पानी छोड़कर नदी-नालों में जल प्रवाह बढ़ाया जाए। किसानों का मानना है कि यदि तालाबों का पानी छोड़ा जाता है तो न केवल पेयजल संकट में राहत मिलेगी बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा और पशुओं के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध हो पाएगा।
हाईवे जाम होने से सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को उठानी पड़ी। तेज धूप और उमस के बीच बसों तथा अन्य वाहनों में फंसे यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की ताकि आम लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि जीवन और आजीविका से जुड़े बुनियादी अधिकारों के लिए है। उनका कहना है कि पानी के बिना खेती संभव नहीं है और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन भी प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते जल प्रबंधन और जल संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल राहत उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक जल प्रबंधन योजना भी तैयार की जाए। किसानों का कहना है कि जल संकट केवल एक मौसम की समस्या नहीं है, बल्कि इसे स्थायी रूप से हल करने के लिए तालाबों, नहरों और जल संरचनाओं के संरक्षण तथा पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
फिलहाल किसानों के आंदोलन ने प्रशासन का ध्यान एक बार फिर क्षेत्र की गंभीर जल समस्या की ओर खींचा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन किसानों की मांगों पर कितना शीघ्र और प्रभावी निर्णय लेता है, ताकि क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई संकट से राहत मिल सके।
यह भी पढेंः- उज्जैन में कृषि आदान व्यापारियों का महाकुंभ: ऑनलाइन अवैध कारोबार पर सख्त चेतावनी
